जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार (22 जनवरी) को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह मुठभेड़ चतरू सब-डिवीजन के सिंहपुरा क्षेत्र में हो रही है, जहाँ पिछले पांच दिनों से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया जा रहा था। पिछले पांच दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान चतरू सबडिवीजन के सिंहपुरा इलाके में आतंकवादियों से फिर से संपर्क स्थापित हुआ। सूत्रों के अनुसार, बलों के संपर्क में आने के बाद गोलीबारी हुई, और ऑपरेशन अभी भी जारी है।
एक पैराट्रूपर मारा गया, और सात सैनिक घायल हो गए
यह ऑपरेशन रविवार को चतरू बेल्ट में मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में शुरू किया गया था। शुरुआती गोलीबारी में एक पैराट्रूपर मारा गया और सात अन्य घायल हो गए, जिनमें से ज़्यादातर छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक ग्रेनेड हमले में छर्रे लगने से घायल हुए थे।
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को मुठभेड़ स्थल के पास आतंकवादियों के एक बड़े ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया और कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, उन्होंने कहा कि आतंकवादियों से कोई नया संपर्क नहीं हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो से तीन आतंकवादियों का एक समूह इलाके में फंसा हुआ है। किश्तवाड़ में, आतंकवादियों की तलाश में चल रहे ऑपरेशन को तेज़ करने के लिए चतरू बेल्ट में सोनार, मंडराल-सिंहपोरा और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है, जिसे सेना ने 'ऑपरेशन त्राशी-I' नाम दिया है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
अतिरिक्त कुमुक: मुठभेड़ स्थल पर सेना की अतिरिक्त टुकड़ियाँ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) को भेजा गया है।
ड्रोन का इस्तेमाल: आतंकवादियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक ड्रोन और निगरानी उपकरणों की मदद ली जा रही है।
घेराबंदी: पूरे इलाके को सील कर दिया गया है ताकि आतंकवादी घने जंगलों का फायदा उठाकर भाग न सकें।
चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति
चतरू और सिंहपुरा का इलाका अपनी खड़ी पहाड़ियों और घने देवदार के जंगलों के लिए जाना जाता है। खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण सुरक्षा बलों के लिए यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। हाल के महीनों में जम्मू संभाग के किश्तवाड़ और डोडा जिलों में आतंकी गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जिसके बाद सुरक्षा बल लगातार हाई अलर्ट पर हैं।
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कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार के असेंबली में दिए जाने वाले पारंपरिक भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रस्तावित G RAM G बिल को लागू करने से जुड़े हिस्सों पर आपत्ति जताई और सदन से बाहर चले गए। यह राजभवन और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच एक नया राजनीतिक टकराव है।
यह घटना बजट सत्र की शुरुआत में हुई, जब गवर्नर को सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को बताते हुए भाषण देना था। गहलोत ने MGNREGA योजना में बदलाव लाने वाले विवादास्पद कानून से जुड़े कुछ खास पैराग्राफ पर आपत्ति जताई, और कहा कि यह भाषण सरकारी प्रोपेगेंडा जैसा है।
गवर्नर का यह कदम तमिलनाडु के गवर्नर आर एन रवि के राज्य असेंबली में भाषण दिए बिना बाहर चले जाने के एक दिन बाद आया है, जिन्होंने टेक्स्ट में "गलतियों" का हवाला दिया था। केरल में भी, गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कथित तौर पर अपने भाषण के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था, और राजभवन ने दावा किया कि उनके सुझाए गए बदलावों को ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था।
राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
यह घटना राजभवन और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच चल रहे लंबे शीतयुद्ध का ताज़ा अध्याय है। इससे पहले भी 'मुडा' (MUDA) घोटाले और अन्य प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर राज्यपाल और सरकार के बीच तीखी बयानबाजी हो चुकी है। कांग्रेस सरकार ने राज्यपाल पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है, जबकि राजभवन ने संवैधानिक मर्यादाओं का हवाला दिया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
सत्ता पक्ष: कांग्रेस नेताओं ने इसे संवैधानिक परंपराओं का अपमान बताया है। उनका कहना है कि राज्यपाल को सरकार द्वारा तैयार किया गया अभिभाषण पढ़ने के लिए बाध्य होना चाहिए।
विपक्ष (BJP): भाजपा ने राज्यपाल के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार असंवैधानिक विधेयकों को राज्यपाल के जरिए वैध बनाने की कोशिश कर रही है।
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