Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी पर व्रत से पूजा तक ऐसे बिताएं पूरा दिन, जानें जरूरी बातें
Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी का पर्व इस साल 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा के साथ व्रत रखने की परंपरा है और कई भक्त मध्याह्न के समय विशेष पूजा करते हैं।
अगर आप भी राधा अष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो सुबह उठने से लेकर पूजा और व्रत खोलने तक दिन की तैयारी पहले से कर लें। इससे पूजा के समय किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होगी। जानें सुबह से पूजा और व्रत खोलने तक पूरे दिन का प्लान।
1. सुबह उठकर करें दिन की शुरुआत
राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा की जगह को साफ करके राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर को व्यवस्थित करें। इसके बाद मन में व्रत का संकल्प लेकर राधा रानी का ध्यान और पूजा करें।
2. पूजा के लिए पहले से तैयार रखें सामग्री
सुबह ही पूजा की जरूरी सामग्री एक जगह रख लें। इसमें राधा-कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा, फूल-माला, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल, मिठाई, पंचामृत और गंगाजल जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं।
3. राधा रानी के नाम का जाप करें
व्रत के दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार राधा रानी का स्मरण और नाम जाप कर सकते हैं। भक्त राधा रानी के 28 नामों का जाप भी कर सकते हैं। इसके अलावा राधा-कृष्ण के भजन और 'राधे-राधे' का जाप करके भी पूजा का समय भक्ति के साथ बिताया जा सकता है।
4. फलाहार का रखें ध्यान
व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। कुछ घरों में व्रत के दौरान फल, दूध या व्रत में खाई जाने वाली चीजें ली जाती हैं, जबकि कुछ लोग निर्जल या अलग नियमों के साथ व्रत रखते हैं।
5. दोपहर में करें राधा रानी की विशेष पूजा
राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा मध्याह्न काल में करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार पूजा का सही समय शहर के हिसाब से बदल सकता है। पूजा के दौरान राधा-कृष्ण को फूल, माला, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल और भोग अर्पित करें। इसके बाद आरती और प्रार्थना करें।
पूजा के बाद व्रत खोलें
व्रत खोलने का समय भी आपकी परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार अलग हो सकता है। किसी एक समय को अंतिम न मानें और अपने क्षेत्र के पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।
राधा अष्टमी पर इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा की जगह और पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें।
- व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें।
- फलाहार कर रहे हैं तो व्रत में मान्य चीजों का ही सेवन करें।
- पूजा के समय राधा-कृष्ण का ध्यान और नाम जाप करें।
- स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और व्रत से जुड़े समय की पुष्टि करें।
राधा अष्टमी के दिन व्रत के साथ पूजा और भक्ति का भी विशेष महत्व माना जाता है। सुबह की तैयारी से लेकर मध्याह्न पूजा और व्रत खोलने तक अगर पूरा दिन पहले से प्लान कर लिया जाए, तो पूजा शांतिपूर्वक की जा सकती है।
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Chaturmas 2026: कब खत्म होगा चातुर्मास? देवउठनी एकादशी के बाद शुरू होंगे शादी-ब्याह, जानें शुभ तारीखें
Chaturmas End Date 2026: हिंदू धर्म में चातुर्मास की अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान विवाह और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करने से लोग आमतौर पर बचते हैं। साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू हुआ है और 21 नवंबर तक रहेगा। इसके बाद शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। अगर आप नवंबर या दिसंबर में विवाह की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए इन दोनों महीनों में किन तारीखों पर शादी के मुहूर्त बताए गए हैं।
चातुर्मास 2026 में कब खत्म होगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से हुई है और यह 21 नवंबर 2026 तक चलेगा। चातुर्मास की अवधि करीब चार महीने की होती है। इस दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को इस अवधि में टालने की परंपरा है।
चातुर्मास का समय मुख्य रूप से जप, तप, व्रत, पूजा-पाठ, साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
चातुर्मास की अवधि एक नजर में
शुरुआत: 25 जुलाई 2026
समाप्ति: 21 नवंबर 2026
अवधि: करीब 4 महीने
प्रमुख महीने: श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक
नवंबर 2026 में शादी के कितने मुहूर्त हैं?
चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर 2026 में विवाह के लिए चार शुभ तारीखें बताई गई हैं। ये तारीखें 21, 24, 25 और 26 नवंबर हैं।
21 नवंबर 2026, शनिवार
सुबह 6:44 बजे से 22 नवंबर की सुबह 12:08 बजे तक विवाह का मुहूर्त बताया गया है। इस दिन रेवती नक्षत्र रहेगा।
24 नवंबर 2026, मंगलवार
विवाह का मुहूर्त रात 11:25 बजे से 25 नवंबर की सुबह 6:47 बजे तक रहेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का उल्लेख किया गया है।
25 नवंबर 2026, बुधवार
सुबह 6:47 बजे से 26 नवंबर की सुबह 6:48 बजे तक विवाह का मुहूर्त बताया गया है।
26 नवंबर 2026, गुरुवार
सुबह 6:48 बजे से शाम 5:47 बजे तक विवाह के लिए मुहूर्त रहेगा।
दिसंबर 2026 में शादी के शुभ मुहूर्त
दिसंबर 2026 में विवाह के लिए कुल 7 दिन बताए गए हैं। इनमें 2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर शामिल हैं।
2 दिसंबर, बुधवार: नवमी और दशमी तिथि
3 दिसंबर, गुरुवार: उत्तर फाल्गुनी/हस्त नक्षत्र
4 दिसंबर, शुक्रवार: एकादशी तिथि
5 दिसंबर, शनिवार: द्वादशी और त्रयोदशी तिथि
6 दिसंबर, रविवार: त्रयोदशी तिथि
11 दिसंबर, शुक्रवार: तृतीया तिथि
12 दिसंबर, शनिवार: तृतीया और चतुर्थी तिथि
चातुर्मास में शादी क्यों नहीं की जाती?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के विश्राम में रहने के कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
इस दौरान संयम, व्रत, पूजा-पाठ, तपस्या और आध्यात्मिक साधना को विशेष महत्व दिया जाता है। जब कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने की मान्यता होती है, उसके बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य दोबारा शुरू करने की परंपरा है।
शादी की तैयारियों में रखें ध्यान
विवाह मुहूर्त अलग-अलग पंचांग, स्थान और पारिवारिक परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए शादी की अंतिम तारीख तय करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से तिथि, नक्षत्र और लग्न का मिलान जरूर करा लें।
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