रैपर बादशाह के शराब ब्रांड पर हनी सिंह का तंज:गाने में कहा- तेरी वोदका कहां गई, बिकी नहीं?; सिंगर ने अपना टकीला ब्रांड लॉन्च किया
पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक बार फिर से जुबानी जंग छिड़ गई है। सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह ने अपना नया गाना कासा टुपका एंथम रिलीज किया है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें हनी सिंह ने रैपर बादशाह पर निशाना साधा है। अपने प्रीमियम शराब ब्रांड के प्रमोशनल गाने में हनी सिंह ने बादशाह के शराब ब्रांड को फ्लॉप बताते हुए तंज कसा। यूजर्स दावा कर रहे हैं कि गाने में हनी सिंह बादशाह के लिए कह रहे हैं- तेरी वोडका कहां गई, बिकी नहीं? आजा मैं तुझे अपने यहां रख लेता हूं, सैलरी ले लियो। दो दिन पहले रिलीज हुए इस गाने को यूट्यूब पर अब तक 21 मिलियन (2.1 करोड़) से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। हालांकि, इसे लेकर अब तक रैपर बादशाह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हनी सिंह के गाने के ये बोल चर्चा में… बड़ा हॉट है वेदर जब बजे रेगेटन, लेट मी टेक यू बेबी गर्ल चलो मैक्सिको। तेरी वोदका कहां गई क्या हुआ बिकी नहीं, चल काम बंद कर पहन आजा बिकिनी। रखूं क्या काम पे ले लियो सैलरी, आया जो मैं वापस इनकी शक्ल भी दिखी नहीं। पिछले साल बादशाह ने वोदका ब्रांड उतारा गाने के इन लिरिक्स पर यूजर्स का दावा है कि ये बादशाह के लिए कहे गए हैं। दरअसल, यह पूरा विवाद शराब ब्रांड्स की बिजनेस राइवलरी से जुड़ा है। बादशाह ने लिकर बिजनेस में एंट्री करते हुए कार्टेल ब्रदर्स के साथ मिलकर नवंबर 2025 में अपना प्रीमियम वोदका ब्रांड शेल्टर 6 मार्केट में लॉन्च किया था। हनी सिंह ने टकीला ब्रांड लॉन्च किया इसके टक्कर में अब हनी सिंह ने भी एंट्री मारी है। 19 सितंबर 2026 को हनी सिंह ने अपना प्रीमियम टकीला ब्रांड कासा टुपका लॉन्च किया। यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं है, बल्कि हनी सिंह ने खुद मेक्सिको जाकर इसके प्रोडक्शन और इस टकीला की मेकिंग प्रोसेस पर काम किया है। गाने से छिड़ी कंट्रोवर्सी अपने टकीला ब्रांड को प्रमोट करने के लिए हनी सिंह ने 2 दिन पहले नया ट्रैक रिलीज किया। इस गाने के जरिए हनी सिंह ने यह जताने की कोशिश की है कि बादशाह का वोदका ब्रांड मार्केट में बुरी तरह फ्लॉप हो गया है। हनी सिंह ने बादशाह को सीधा-सीधा तंज कसा और अपनी बिजनेस सक्सेस को फ्लॉन्ट किया। इस गाने के जरिए हनी सिंह ने न सिर्फ अपना नया टकीला ब्रांड कासा टुपका मार्केट में उतारा है, बल्कि बादशाह और उनके वोदका ब्रांड शेल्टर 6 का सरेआम मजाक उड़ाते हुए एक नई कंट्रोवर्सी को जन्म दे दिया है। दोनों के बीच 15 साल पुराना विवाद रैपर यो यो हनी सिंह और बादशाह के बीच का विवाद लगभग 15 साल पुराना है, जो समय-समय पर नए मोड़ों के साथ मीडिया की सुर्खियों में आता रहता है। दोनों कलाकारों के बीच कड़वाहट की शुरुआत माफिया मुंडीर बैंड से हुई थी, और यह विवाद आज उनके बिजनेस तक पहुंच चुका है। साल 2000 के दशक में हनी सिंह ने माफिया मुंडीर नाम का एक रैप ग्रुप बनाया था, जिसमें बादशाह, रफ्तार, इक्का और लिल गोलू शामिल थे। साल 2012 के आस-पास इनके बीच आपसी मतभेद हुए और यह ग्रुप टूट गया। बादशाह का दावा है कि हनी सिंह के सुपरहिट गाने ब्राउन रंग के लिरिक्स उन्होंने लिखे थे, लेकिन हनी सिंह ने उन्हें इसका क्रेडिट नहीं दिया। वहीं, हनी सिंह का कहना था कि गाना और म्यूजिक उनका अपना था और अगर बादशाह ने ऐसा गाना लिखा था, तो वह खुद के लिए वैसा दूसरा गाना क्यों नहीं बना पाए? हनी सिंह ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि जब वह बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह से इंडस्ट्री से दूर थे, तब बादशाह ने करीब 10 सालों तक गानों और सोशल मीडिया के जरिए उनकी बीमारी का मजाक उड़ाया और उन्हें टारगेट किया। हालांकि, बादशाह ने एक लाइव कॉन्सर्ट में दुश्मनी खत्म करने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन हनी सिंह ने इसे केवल दिखावा कहा था। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… हनी सिंह ने बादशाह को नालायक औलाद कहा:बादशाह बोले थे- मैंने अपना नाम खुद चुना; यो यो ने पुरानी क्लिप शेयर कर सच बताया रैपर बादशाह और यो यो हनी सिंह का पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। कॉमेडियन समय रैना के शो के दौरान समय ने बादशाह से उनके स्टेज नाम 'बादशाह' को लेकर सवाल किया। पढ़ें पूरी खबर…
AI से दुनिया खत्म होने का खतरा नहीं:एनवीडिया CEO बोले- 2030 तक सब ठीक रहेगा; ऑल्टमैन-मस्क की 'तबाही वाली चेतावनियों' को बेबुनियाद बताया
AI से 2030 तक मानव सभ्यता खत्म होने की चेतावनियों को चिप कंपनी एनवीडिया के फाउंडर जेंसन हुआंग ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी 0% संभावना है। हुआंग ने इन दावों को 'डूम्सडे नैरेटिव' करार दिया और लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के डर या पैनिक में न आएं। कुछ दिन पहले एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड में काम करने वाले दो रिसर्चर्स ने कहा था कि जिस तेजी से एआई डेवलप हो रहा है उससे मानव सभ्यता खत्म हो सकती है। ओपन एआई, XAI और एंथ्रोपिक के मालिक सैम ऑल्टमैन, इलॉन मस्क और डारियो अमोदेई ने भी इसका समर्थन किया था। वैज्ञानिक आधार से परे हैं ऐसी भविष्यवाणियां हुआंग ने कहा कि इस तरह की चेतावनियां और भविष्यवाणियां 'विज्ञान पर आधारित नहीं हैं'। उन्होंने कहा कि एनवीडिया का लक्ष्य उद्योग में जिम्मेदारी से प्रोडक्ट्स बनाना और लोगों को AI के प्रति जागरूक करना है, न कि समाज में बेवजह का डर फैलाना। तबाही का डर दिखाकर मौजूदा कानूनों से बचने की कोशिश हुआंग ने कहा कि इस तबाही वाले नैरेटिव की आड़ में कुछ लोग मौजूदा कानूनों से छूट पाना चाहते हैं। अगर आप बयानों के पीछे का मतलब समझें, तो वे नए सख्त नियम नहीं मांग रहे, बल्कि उन कानूनों से राहत मांग रहे हैं जो पहले से लागू हैं। यह एक समस्या है। डोनाल्ड ट्रंप भी AI के खतरे को बता चुके हैं 'झूठ' जेंसन हुआंग की तरह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी AI से खतरे की बातों को महज एक 'अफवाह' करार दिया था। अब टेक जगत दो गुटों में बंटता दिख रहा है। एक तरफ इलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज AI की रफ्तार की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हुआंग जैसे लीडर्स का मानना है कि इस खतरे को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। AI इंडस्ट्री में क्यों अहम है एनवीडिया की भूमिका? एनवीडिया ऐसे बेहद ताकतवर कंप्यूटर चिप्स (GPU) बनाती है जो AI मॉडल को चलाने और ट्रेनिंग देने के लिए बेहद जरूरी हैं। ओपनएआई और अन्य टेक कंपनियों के बनाए लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और AI एजेंट्स एनवीडिया के इन्हीं हाई-टेक चिप्स की मदद से काम करते हैं। है। AI की दुनिया में क्या चल रहा है और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, 4 सवालों के जरिए समझिए … सवाल-1: ‘AI हम सबको मार सकता है’ इस दावे का मतलब क्या है? जवाब: इसका मतलब यह नहीं कि AI सीधे इंसानों को मार देगा। चिंता इस बात की है कि भविष्य में AI इतना ताकतवर हो जाए कि इंसानों के कंट्रोल से बाहर निकल जाए और मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन जाए। एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी कि AI भविष्य में इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इससे पहले 1 नवंबर 2023 को भारत समेत 28 देशों और यूरोपीय संघ ने भी माना था कि बेहद ताकतवर AI के कंट्रोल से बाहर होने पर मानव सभ्यता के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। सवाल-2: AI की दुनिया में ऐसा क्या चल रहा, जिससे सभी डरे हुए हैं? जवाबः ऐसी आशंकाओं के पीछे दो बड़े आधार हैं… 1. AI अब सुपर इंटेलिजेंट बन रहा है AI को इंसानों ने बनाया और वही इसे सुधारते रहे हैं। लेकिन अब AI खुद को लगातार बेहतर बनाने में जुट गया है। वो अपनी कमियां पकड़ता है और उन्हें सुधारता है। यानी इंसानों की जरूरत घटती जा रही है। नए AI मॉडल अपनी सोच और तर्क को छिपाने में बेहतर हो रहे हैं। इससे उन पर नजर रखना मुश्किल होता जा रहा है। पहले AI से सवाल पूछो और वो जवाब देता था। लेकिन अब AI एजेंट से कहा जा सकता है कि इस समस्या को हल करो। वो खुद इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करता है, फैसले लेता है और समस्या को सुलझाता है। चाहे घंटों लग जाएं। हाल ही में 10,000 AI एजेंट्स ने 90 साल पुरानी Navier-Stokes गणित समस्या को सिर्फ 88 घंटे में सुलझा दिया। 2. इंसानों को चकमा देने लगा है AI ओपन AI के मुताबिक, जुलाई 2026 में टेस्ट के दौरान उसके दो AI मॉडल जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के। एंथ्रोपिक के टेस्ट में मॉडल क्लॉड ओपस 4 ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए एक अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी दी। यह टेस्ट OpenAI, Google, Meta समेत 16 बड़े मॉडल्स पर दोहराया गया और ज्यादातर मॉडल्स ने मौका मिलने पर ऐसा ही बर्ताव किया। सवाल-3: तो क्या AI को कंट्रोल नहीं किया जा सकता? जवाब: कोशिशें हो रही हैं, लेकिन अभी इन्हें पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। कंपनियां खुद सुरक्षा नियम बना रही हैं: एंथ्रोपिक और OpenAI ने खतरनाक AI क्षमताओं के लिए अपने-अपने सुरक्षा नियम बनाए हैं। लेकिन इन नियमों को कंपनियां खुद तय और बदल सकती हैं। यही सबसे बड़ी चिंता है। सरकारें भी नियम बनाने लगी हैं: अमेरिका और भारत में AI को लेकर नए नियम और गाइडलाइंस पर काम हो रहा है। लेकिन अभी दुनिया भर में AI के लिए एक जैसे सख्त नियम नहीं हैं। सवाल-4: AI अगले कुछ सालों में हमारी जिंदगी कैसे बदल सकता है? जवाब: थ्रोपिक के मालिक डारियो अमोदेई का दावा है कि अगले 1 से 5 साल में AI की वजह से एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। अगले 5 सालों में दुनिया में बेरोजगारी दर 20% तक पहुंच जाएगी। हालांकि, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग का कहना है कि AI से नए तरह के काम और नौकरियां भी पैदा होंगी। वहीं, भारत में हुए AI समिट के दौरान डारियो अमोदेई ने दावा किया था, ‘जिन बीमारियों का इलाज सालों से नहीं मिला, AI उसका इलाज ढूंढने में काबिल है।
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