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मिर्जापुर मूवी में बिरजू बना आशिकों का चेहरा:रिलीज से पहले नर्वस थीं रसिका दुग्गल, बोलीं- डर था फैंस थिएटर आएंगे या नहीं

मिर्जापुर मूवी में मोहित मलिक के बिरजू लोहार के किरदार ने दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी है। वहीं, बिना त्रिपाठी की जटिल और अप्रत्याशित कहानी लगातार चर्चा में है। दैनिक भास्कर से बातचीत में दोनों कलाकारों ने बिरजू के किरदार, उसके आखिरी सीन, शूटिंग के अनुभव और दर्शकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया पर बात की। मोहित ने बताया कि कम स्क्रीन टाइम के बावजूद बिरजू की पांच साल की जर्नी को पर्दे पर दिखाना उनके लिए कितना महत्वपूर्ण था। रसिका ने बीना त्रिपाठी के किरदार की परतों और उसकी रणनीति पर भी विचार साझा किए। सवाल: बिरजू लोहार का किरदार दर्शकों के बीच इतना लोकप्रिय हो गया है। क्या आपने सोचा था कि यह किरदार इतना प्रभाव छोड़ेगा? जवाब/मोहित मलिक: सच कहूं तो ऐसा सोचा नहीं था, लेकिन पूरी कोशिश जरूर की थी। मुझे पता था कि इतने बड़े कलाकारों और महत्वपूर्ण किरदारों के बीच मेरा स्क्रीन टाइम बहुत कम है। इसलिए मेरे लिए जरूरी था कि जब भी मैं स्क्रीन पर आऊं, तो बिरजू की पांच साल की जर्नी दिखाई दे। मुझे लगता है कि दर्शक भावनाओं से बहुत जल्दी जुड़ते हैं। मैंने इस किरदार के लिए पूरी मेहनत की और अपनी जान लगा दी। आखिर में फिल्म के कुछ खास पल सही तरीके से जुड़ जाते हैं और खूबसूरत कहानी बन जाती है। मुझे लगता है कि बिरजू के साथ भी ऐसा ही हुआ। सवाल: फिल्म का आखिरी सीन बहुत मार्मिक है। उस सीन की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? जवाब/रसिका दुग्गल: मेरे अनुभव में कई बार ऐसा होता है कि जिस सीन को बाद में फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण या सबसे ज्यादा चर्चित सीन माना जाता है, उसकी शूटिंग के दिन सेट पर बहुत ज्यादा अव्यवस्था होती है। उस दिन भी ऐसा ही हुआ था। हमारी शिफ्ट का समय काफी आगे बढ़ गया था। किसी को भूख लगी थी, किसी को घर जाना था और शूटिंग के लिए समय कम बचा था। ऐसे माहौल में एक्टर के लिए शांत रहना और समझना मुश्किल होता है कि यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। आपको उस पूरे शोर के बीच अपने विचार समेटने होते हैं और कोशिश करनी होती है कि उस पल को पूरी ईमानदारी से निभा सकें। इस सीन में भी हमारे सामने यही चुनौती थी। मोहित मलिक: उस समय हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह सीन इतना खास बन जाएगा। जैसा रसिका ने कहा, उस वक्त बहुत कुछ चल रहा था। लेकिन बाद में जब गाना, अभिनय और बाकी चीजें एक साथ जुड़ीं, तो वह सीन बहुत खूबसूरत बन गया। सवाल: इस सीन में गाने ने भी काफी भावनात्मक असर डाला है। आपको यह गाना पहली बार कब सुनने को मिला? जवाब/रसिका दुग्गल: हमने यह गाना पहली बार फिल्म की स्क्रीनिंग में सुना था। उससे पहले हमने सीन देखा था, लेकिन उसमें गाना शामिल नहीं था। मुझे लगता है कि इस गाने ने उस पूरे पल को ज्यादा प्रभावशाली बना दिया। यह गाना उस सीन को काव्यात्मक स्तर पर ले जाता है। मधुर ने इसे बहुत खूबसूरती से गाया है और पुनीत जी की लिखी हर लाइन की तरह इसमें भी बहुत गहराई है। गाने ने सीन की भावनाओं को और मजबूत किया है। मोहित मलिक: बिल्कुल। मधुर ने बहुत अच्छा गाया है। उस गाने ने सीन को अलग ही एहसास दिया। सवाल: बिरजू के किरदार को निभाते समय आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? मोहित मलिक: मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि कम स्क्रीन टाइम में भी किरदार की पूरी यात्रा दिखाई दे। मैं ऐसे कलाकारों के बीच काम कर रहा था, जिनके किरदार पहले से दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। रवि किशन जी खुद बड़े स्टार हैं और उनका अपना प्रभाव है। ऐसे में मैं नए किरदार के साथ उस दुनिया में आया था। मुझे साबित करना था कि बिरजू की अपनी पहचान है और उसकी कहानी दर्शकों तक पहुंचे। मैं आभारी हूं कि पूरी टीम ने मुझे प्यार दिया और अपनापन महसूस कराया। सभी ने सहयोग किया, जिससे मेरे लिए यह अनुभव अच्छा रहा। सवाल: रसिका, बिना त्रिपाठी का किरदार हर बार नई परत के साथ सामने आता है। क्या आपको भी उसे समझते हुए कुछ नया महसूस होता है? जवाब/रसिका दुग्गल: बिल्कुल। मुझे भी बिना के बारे में ऐसा ही लगता है। जैसे ही मुझे लगता है कि मैं उसे समझने लगी हूं, पुनीत जी कुछ ऐसा लिखकर ले आते हैं कि मैं सोचती हूं, यह कैसे हुआ? बिना का किरदार बहुत जटिल है। वह पितृसत्तात्मक समाज में रहती है, जहां जैसे ही वह अपनी जगह बनाती है, कोई न कोई उसे पीछे धकेल देता है। फिर वह दोबारा अपनी जगह बनाती है। यही प्रक्रिया उसके किरदार को दिलचस्प बनाती है। वह कमजोर भी है और रणनीतिक भी। वह भावनात्मक भी है और बहुत चतुर भी। उसके अंदर कई परतें हैं और यही चीज उसे दूसरे किरदारों से अलग बनाती है। सवाल: दर्शक अब बिना को पहले से ज्यादा समझने लगे हैं। क्या आपको भी ऐसा लगता है? जवाब/रसिका दुग्गल: हां, लेकिन जैसे ही लगता है कि दर्शक उसे समझने लगे हैं, कहानी में कुछ नया सामने आ जाता है। मुझे लगता है कि बिना की यही सबसे बड़ी खासियत है। लोग अक्सर मुझसे कहते हैं कि उन्होंने पर्दे पर ऐसी महिला पहले नहीं देखी। वह जिस तरह परिस्थितियों को समझती है और अपने तरीके से आगे बढ़ती है, वह बहुत अलग है। मुझे यह भी लगता है कि वह हर स्थिति में खुद को ढाल सकती है। वह अपनी कमजोरियों को जानती है, लेकिन उनका इस्तेमाल कैसे करना है, यह भी समझती है। सवाल: बीना की कौन-सी खूबी आप अपनी असल जिंदगी में चाहेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: बीना की यह खूबी कि वह दूसरे लोगों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना जानती है। मैं असल जिंदगी में ऐसा बिल्कुल नहीं कर पाती। काश, मैं भी परिस्थितियों पर उतना नियंत्रण रख पाती, जितना बीना रखती है। सवाल: बीना की कौन-सी बात है, जिसके लिए आप कहेंगी कि अच्छा है, यह मुझमें नहीं है? जवाब/रसिका दुग्गल: उसका लोगों को मारने का माद्दा। मैं चाहती हूं कि मेरी परफॉर्मेंस ‘किलर’ हो, लेकिन मेरे अंदर किसी को मारने वाला स्वभाव नहीं होना चाहिए। सवाल: मोहित, बिरजू का कितना हिस्सा आपकी असल जिंदगी में मौजूद है? जवाब/मोहित मलिक: मुझे लगता है कि बिरजू का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा मुझमें है। खासकर प्यार के मामले में। मैं भी भावनाओं को बहुत गंभीरता से लेता हूं और इस मामले में खुद को बिरजू के काफी करीब पाता हूं। सवाल: दर्शक आपके किरदार बिरजू और पुराने टीवी किरदार सम्राट सिंह में समानताएं देख रहे हैं। इस तुलना को आप कैसे देखते हैं? जवाब/मोहित मलिक: मैंने अपने एक टीवी शो में सम्राट सिंह का किरदार निभाया था, जो कुछ हद तक मुन्ना भैया जैसा था। इसलिए मुझे खुशी है कि मेरे पुराने टीवी शो के दर्शक और फैन क्लब फिर से सक्रिय हो गए हैं। मैंने देखा है कि उन किरदारों को पसंद करने वाले लोग अब बिरजू को भी देख रहे हैं। यह मेरे लिए अच्छी बात है। मुझे खुशी है कि इतने साल बाद मेरे पुराने काम से जुड़े दर्शक फिर से जुड़ रहे हैं और इस किरदार को भी प्यार दे रहे हैं। सवाल: फिल्म को दर्शकों की ओर से मिल रही प्रतिक्रिया के बारे में आप दोनों का अनुभव कैसा रहा? जवाब/रसिका दुग्गल: इस बार मैं थोड़ी नर्वस थी। आमतौर पर जब मैं किसी प्रोजेक्ट पर काम करती हूं, तो सिर्फ शूटिंग के दौरान अपने काम पर ध्यान देती हूं। मैं यह नहीं सोचती कि दर्शक इसे कैसे स्वीकार करेंगे। लेकिन ‘मिर्जापुर’ के मामले में जिम्मेदारी का एहसास अलग था। हमारे फैंस पिछले आठ-नौ साल से हमें बहुत वफादारी से फॉलो कर रहे हैं। उन्हें प्रोजेक्ट से जुड़ी कई बातें हमसे पहले पता चल जाती हैं। मुझे चिंता थी कि क्या हम उन्हें खुश कर पाएंगे? क्या वे फिल्म देखने के लिए थिएटर आएंगे? ओटीटी पर घर बैठे फिल्म देखना अलग अनुभव है, जबकि थिएटर जाने के लिए दर्शकों को समय और मेहनत लगती है। अब जब लोग फिल्म देखने आ रहे हैं और दोस्तों को भी साथ ला रहे हैं, तो मुझे बहुत खुशी हो रही है। इससे हमारा फैन बेस और बढ़ा है। मोहित मलिक: मुझे लगता है कि ‘मिर्जापुर’ के फैंस फिल्म देखने जा ही रहे हैं। लेकिन जब उन्हें फिल्म अच्छी लगती है, तो वे दूसरे लोगों को भी इसे देखने के लिए कहते हैं। मुझे जो फोन आते हैं, उनमें लोग कहते हैं कि हम ‘मिर्जापुर’ के फैन तो हैं ही, लेकिन फिल्म इतनी अच्छी बनी है कि हम चाहते हैं कि हर कोई इसे देखे। यही वर्ड ऑफ माउथ फिल्म को आगे ले जा रहा है। सवाल: आप दोनों दर्शकों के बीच फिल्म देखने भी गए थे। वहां का अनुभव कैसा रहा? जवाब/रसिका दुग्गल: हम ‘विमेन ऑफ मिर्जापुर’ का ग्रुप बनाकर फिल्म देखने गए थे। जब मैं थिएटर के अंदर जा रही थी, तभी वह सीन आने वाला था, जिसमें दर्शकों को बिना के बारे में एक खास बात का एहसास होता है। सीन से दो-तीन सेकेंड पहले ही मुझे दर्शकों की सामूहिक प्रतिक्रिया सुनाई दी। अचानक पूरा थिएटर शांत हो गया। जब वह महत्वपूर्ण लाइन आई, तो लोगों ने तालियां बजाईं। दर्शकों के बीच बैठकर ऐसा रिएक्शन देखना बहुत बड़ी खुशी थी। एक कलाकार के लिए यह बहुत अच्छा एहसास होता है कि जिस पल को उसने निभाया, वह दर्शकों तक उसी भावना के साथ पहुंचा। मोहित मलिक: रसिका ने जिस तरह से वह लाइन बोली है और उसके पीछे जो भावनाएं हैं, वे बहुत प्रभावशाली हैं। सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उन शब्दों के पीछे की पूरी भावना महत्वपूर्ण है। जब मैंने स्क्रीन पर वह सीन देखा, तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा। सवाल: उस महत्वपूर्ण सीन की शूटिंग के दौरान आप दोनों के बीच तालमेल कैसा रहा? जवाब/मोहित मलिक: वह फिल्म की शूटिंग का मेरा पहला दिन था और वही सीन था। हालांकि हम पहले मिल चुके थे, लेकिन उस दिन पहली बार साथ में शूट कर रहे थे। मेरे लिए यह महत्वपूर्ण था कि हम एक-दूसरे की आंखों में देखकर अभिनय कर सकें। कई बार कैमरा इस तरह लगाया जाता है कि को-एक्टर के लिए सामने वाले को देखना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस सीन में वह जरूरी था। कैमरा टीम ने सहयोग किया और कैमरे की स्थिति इस तरह बदली कि हम एक-दूसरे को देख सकें। इससे सीन में भावनाएं स्वाभाविक तरीके से आ पाईं। रसिका दुग्गल: कई बार कैमरा ऐसी जगह रखा जाता है कि को-एक्टर के लिए सामने वाले को देखना मुश्किल होता है। लेकिन इस सीन में एक-दूसरे की आंखों में देखना जरूरी था। कैमरा टीम ने हमारी जरूरत समझी और चीजें एडजस्ट कीं। इससे हमें किसी तय निशान को देखने के बजाय एक-दूसरे के साथ स्वाभाविक तरीके से अभिनय करने का मौका मिला। ऐसे भावनात्मक दृश्यों में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है। ___________________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. ‘बिरजू को क्यों मारा?’ पर बोले रसिका-मोहित:‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ जैसी ‘मिर्जापुर मूवी की बड़ी मिस्ट्री मिर्जापुर’ की दुनिया किरदारों, हिंसा और दमदार डायलॉग्स के साथ मीम्स के लिए भी मशहूर है। वेब सीरीज के पुराने मीम्स हों या फिल्म के नए किरदार बिरजू लोहार और उनके दर्दभरे सीन, सोशल मीडिया पर ‘मिर्जापुर’ का जलवा है। फिल्म में बीना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाली रसिका दुग्गल और बिरजू लोहार बने मोहित मलिक ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में वायरल मीम्स, अपने किरदारों पर बने मजेदार मीम्स और सोशल मीडिया के रिएक्शन पर बात की।पूरी खबर पढ़ें..

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‘कच्चा बादाम गर्ल’ बनीं सीता तो मचा बवाल:अंजली अरोड़ा ने ट्रोलर्स को जवाब दिया, बोलीं- पुरानी छवि मेरी पूरी जिंदगी नहीं

अंजली अरोड़ा इन दिनों फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभाने को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके लुक और किरदार की तारीफ हो रही है, वहीं सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। वजह उनकी पुरानी सोशल मीडिया इमेज, खासकर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर वायरल हुईं डांसिंग रील्स हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजली ने ट्रोलिंग और पुरानी छवि पर बात की। वहीं श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने कहा कि किसी के किए गए काम का असर उसकी पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। ‘कच्चा बादाम’ वाली इमेज को लेकर ट्रोल हो रही हैं अंजली अंजली अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर डांसिंग रील्स से पहचान बनाई थी। खासतौर पर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर उनका डांस वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं। बाद में उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 1’ में हिस्सा लिया। अब जब वह ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभा रही हैं, सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग उनकी ग्लैमरस और बिंदास सोशल मीडिया इमेज की तुलना सीता के किरदार से कर रहे हैं। इसी वजह से उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि डांसिंग और ग्लैमरस इमेज के लिए पहचानी जाने वाली अंजली सीता जैसे पवित्र किरदार को कैसे निभा सकती हैं। कुछ कमेंट्स में उन्हें ‘कच्चा बादाम गर्ल’ कहकर ट्रोल किया गया, तो कुछ यूजर्स ने लिखा कि ‘सीता के रोल में शूर्पणखा’। अंजली बोलीं- ‘वो मेरी पूरी जिंदगी नहीं है’ ट्रोलिंग को लेकर अंजली ने दैनिक भास्कर से कहा कि लोगों के पास किसी को जज करने का अधिकार है, लेकिन किसी की पुरानी जिंदगी उसकी पूरी पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “लोगों का काम है जज करना और उनके पास हक है। जो चीजें हैं, वो हैं ही। हम किसी भी चीज को अपनी लाइफ का एक पार्ट कह सकते हैं, लेकिन वो हमारी पूरी लाइफ नहीं होती।” अंजली ने कहा कि अगर लोग उन्हें पुरानी सोशल मीडिया इमेज के लिए याद करते हैं तो वह भी ठीक है, लेकिन उन्होंने इसके अलावा भी बहुत काम किया है और आगे भी करना चाहती हैं। उनके मुताबिक, “मैं चाहती हूं कि लोग मेरी पर्सनालिटी को अलग रखकर इस सिनेमा में मेरे किरदार को देखें और फिर जज करें।” ‘सीता’ के किरदार को लेकर अंजली ने की तैयारी सीता का किरदार मिलने पर अंजली खुद हैरान थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि वह यह किरदार कैसे निभा पाएंगी और उन्हें ही सीता का रोल क्यों दिया गया। डायरेक्टर के विजन और भरोसे के बाद उन्होंने खुद पर काम शुरू किया। शूटिंग के दौरान उन्होंने सीता के किरदार की कई चीजें अपनाने की कोशिश की। अंजली के मुताबिक, सीता उनके लिए धैर्य, त्याग और सादगी की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद सीता ने धैर्य नहीं खोया और गुस्से में ऐसा फैसला नहीं लिया जिससे किसी और को नुकसान पहुंचे। ‘मैं आजकल की लड़की हूं, सीता से तुलना नहीं करूंगी’ जब अंजली से पूछा गया कि सीता के व्यक्तित्व से उनमें कितनी समानताएं हैं, उन्होंने खुद की तुलना सीता से करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह आज की पीढ़ी की लड़की हैं और उनके अपने विचार और लाइफस्टाइल हैं। हालांकि वह अपने धर्म और विश्वास से जुड़ी हुई हैं। अंजली ने कहा कि उनका विश्वास है कि जो उनका है, वह उनके पास जरूर आएगा और जो उनका नहीं है, वह पास आकर भी चला जाएगा। बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना जरूरी अंजली अरोड़ा ने आज की पीढ़ी की परवरिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक सोच और लाइफस्टाइल के साथ आगे बढ़ने की आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों की जानकारी भी होनी जरूरी है। अंजली ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अपने धर्म से जुड़े रहने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ना सिखाया है। उनका मानना है कि आज के माता-पिता को भी बच्चों को समझाना चाहिए कि वे किस संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार इंसान की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। व्यक्ति कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, उसके संस्कार उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बने रहते हैं। अंजली के मुताबिक, इंसान देश में रहे या विदेश में, किसी भी जगह काम करे या किसी भी तरह की जिंदगी जिए, उसके संस्कार हमेशा उसके साथ रहते हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही परिवार, धर्म, संस्कृति और अच्छे मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। देव शर्मा बोले- ट्रोलिंग किसी की जिंदगी पर डाल सकती है असर फिल्म में श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने ट्रोलिंग के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि रामायण से मिलने वाली सबसे बड़ी सीखों में से एक यह है कि इंसान को अपने हर काम के असर के बारे में सोचना चाहिए। देव ने कहा, “ट्रोलिंग या किसी का मजाक उड़ाना तब होता है, जब हम उसके आफ्टर इफेक्ट्स के बारे में नहीं समझते। हम उस समय काम कर देते हैं, लेकिन उसका इम्पैक्ट किसी इंसान की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है।” उन्होंने कहा कि रामायण और दूसरे ग्रंथों की सीख यही है कि इंसान जाने-अनजाने ऐसा काम न करे, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी प्रभावित हो। शील वर्मा बोले- रामायण को सुपरहीरो फिल्म की तरह नहीं दिखाया फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे शील वर्मा ने बताया कि ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ को ज्यादा वीएफएक्स और भव्यता के सहारे पेश करने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मेकर्स का फोकस रामायण की कहानी को सरलता और मूल भावना के साथ दिखाने पर रहा है। शील के मुताबिक, फिल्म को सुपरहीरो या मार्वल जैसी ग्रैंड फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि “सिंप्लिसिटी हम परोस रहे हैं। रामायण को रामायण की तरह दिखा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों ने बचपन से जिस रामायण को देखा और सुना है, फिल्म में उन्हें उसकी झलक जरूर देखने को मिलेगी। उनके अनुसार, फिल्म में कहानी और किरदारों की सादगी बनाए रखते हुए इसे पर्दे पर पेश किया गया है।

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