नेशनल फिल्म अवॉर्ड में कार्तिक-यामी बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस:KGF अभिनेता को दादासाहेब फाल्के; 72 साल में अवॉर्ड्स 7 से बढ़कर 45 हुए
कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया गया। यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। सेरेमनी गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में मंगलवार को हुई। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को हुई थी। ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म और ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। तमिल स्टार धनुष को दो कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड दिया गया। एक्टर अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड 2024 दिया गया। उन्होंने कन्नड़, तेलगु और हिंदी समेत 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। राष्ट्रपति बोलीं- फेमस स्टार हानिकारक चीजों का प्रचार न करें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- मैं चाहूंगी कि प्रत्येक ज्यूरी पैनल में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। फिल्म कलाकार बहुत लोकप्रिय होते हैं, उनमें देशवासियों विशेषकर युवाओं को प्रभाविक करने की क्षमता होती है। मैं ये अनुरोध करना चाहूंगी कि लोकप्रिय कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का एंडोर्समेंट न करें। स्टार वही है, जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं। अनंत नाग बोले- पापी पेट के लिए करियर शुरू किया था सम्मान मिलने के बाद अनंत नाग बोले- एक एक्टर के तौर पर आपने मेरी परफॉर्मेंस देखी है। मैंने बचपन के 12 साल आश्रम में गुजारे। इसके बाद मुझे मुंबई भेजा गया, जहां मुझे प्ले चैतन्य महाप्रभु में एक्टिंग का मौका मिला। उस समय करियर क्या होता है किसी को नहीं पता था। पापी पेट के लिए करियर शुरू किया और फिर 5 सालों में 50 प्ले किए। आखिरी 50 साल मुझे कई अलग भाषाओं की फिल्मों में काम करने के लिए बुलाया गया। मैंने दूसरी भाषाओं की भी फिल्में कीं, लेकिन कर्नाटक और कन्नड़ फिल्मों में मुझे सबसे बड़े मौके मिले। भास्कर से बोले कार्तिक आर्यन- अनरियल फीलिंग, एक्सप्रेस नहीं कर पा रहा अवॉर्ड मिलने के बाद कार्तिक आर्यन ने भास्कर से कहा- मैं बहुत खुश हूं, पूरी फैमिली के साथ हूं, बहुत इमोशनल मूमेंट है। अनरियल फीलिंग है, एक्सप्रेस नहीं कर पा रहा हूं। 72 साल में 7 से 45 अवॉर्ड साल 1954 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड सिर्फ 7 पुरस्कारों से शुरू हुए थे, अब 72 साल बाद 45 पुरस्कार दिए गए। इनमें 26 फीचर फिल्म, 16 नॉन-फीचर फिल्म, 2 सिनेमा पर लेखन और 1 दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड शामिल है। ₹3 लाख तक पहुंची प्राइज मनी नेशनल फिल्म अवॉर्ड में पहले सिर्फ गोल्ड मेडल और मेरिट सर्टिफिकेट मिलते थे। 1957 में पहली बार नकद पुरस्कार शुरू हुआ, तब निर्देशक को ₹5 हजार और निर्माता को ₹20 हजार मिले। 1975 में बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस को पहली बार ₹10 हजार मिले, जो अब बढ़कर ₹3 लाख हो चुके हैं। वहीं, 1969 में शुरू हुए दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड की नकद राशि ₹11 हजार से बढ़कर अब ₹10 लाख हो गई है। नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी के पल-पल के अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का निधन:बंगाली सिनेमा में प्लेबैक सिंगर थीं, शाहरुख खान अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे
बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार दोपहर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। यशराज फिल्म्स (YRF) ने आधिकारिक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी है। कृष्णा मुखर्जी बंगाली सिनेमा की जानी-मानी प्लेबैक सिंगर रह चुकी हैं। वे अक्सर अपनी बेटी रानी के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आती थीं। कृष्णा मुखर्जी के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई सितारे पहुंचे। शाहरुख खान भी रानी मुखर्जी के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनके अलावा कबीर खान पत्नी के साथ नजर आए। वहीं फराह खान और साजिद खान ने भी अंतिम दर्शन किए। यशराज फिल्म्स ने जारी किया आधिकारिक बयान यशराज फिल्म्स ने बयान जारी करते हुए लिखा, 'भारी दिल से हम यह जानकारी दे रहे हैं कि रानी मुखर्जी की मां श्रीमती कृष्णा मुखर्जी का आज दोपहर निधन हो गया। वे 75 वर्ष की थीं। परिवार आप सभी के प्यार, प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए गहराई से आभारी है। इस बेहद मुश्किल समय में परिवार आपसे प्राइवेसी की अपील करता है।' कृष्णा मुखर्जी ने हर मोड़ पर बेटी का साथ दिया कृष्णा मुखर्जी का भारतीय सिनेमा, विशेषकर बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से गहरा जुड़ाव रहा। वे खुद एक पेशेवर प्लेबैक सिंगर थीं और उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में गाने गाए थे। संगीत से जुड़े रहने के कारण उन्होंने अपनी बेटी रानी मुखर्जी को भी कला और अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। रानी अपनी मां के बेहद करीब थीं और कई मौकों पर वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दे चुकी हैं। दोनों के बीच मजबूत बॉन्डिंग देखने को मिलती थी। अपने करियर की शुरुआत से ही रानी जब भी किसी अवॉर्ड फंक्शन, फिल्म स्क्रीनिंग या सार्वजनिक कार्यक्रम में जाती थीं, कृष्णा मुखर्जी उनके साथ जरूर नजर आती थीं। पति राम मुखर्जी के निधन के बाद भी कृष्णा अपनी बेटी रानी के साथ रहकर परिवार की भूमिका निभतीं थीं। प्लेबेक सिंगिंग में एक्टिव रहीं कृष्णा मुखर्जी कृष्णा मुखर्जी ने 1980 के दशक में कई चर्चित गानों में अपनी आवाज दी। उनका सबसे प्रसिद्ध गाना साल 1982 में आई फिल्म 'तीसरी आंख' का 'ईद के दिन गले मिल ले राजा' था, जिसे मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था। म्यूजिक बैकग्राउंड से जुड़े होने के कारण उनकी शास्त्रीय और लोक संगीत में मजबूत पकड़ थी। वे फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग के अलावा कई बंगाली एल्बम और स्टेज शो के जरिए भी संगीत जगत में एक्टिव रहीं। संगीत करियर के साथ-साथ कृष्ण मुखर्जी को फिल्म इंडस्ट्री के काम और बिजनेस की भी बहुत बारीक समझ थी। उन्होंने ही रानी मुखर्जी को फिल्मों में किस्मत आजमाने की सलाह दी थी, लेकिन वे काम की क्वालिटी को लेकर बहुत सख्त थीं। रानी के पहले स्क्रीन टेस्ट के समय जब उन्हें बेटी का अभिनय पसंद नहीं आया, तो उन्होंने 'राजा की आयेगी बारात' के प्रोड्यूसर सलीम से खुलकर कह दिया था कि वे रानी को फिल्म में न लें, क्योंकि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है। 'मर्दानी 3' में नजर आई थीं रानी मुखर्जी वर्कफ्रंट की बात करें तो रानी मुखर्जी ने अपने लंबे करियर में 'गुलाम', 'कुछ कुछ होता है', 'साथिया', 'हम तुम' और 'ब्लैक' जैसी कई मशहूर फिल्में दी हैं। रानी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'मर्दानी 3' में नजर आई थीं। इस फिल्म में उनके शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। ये खबर भी पढ़ें ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित ला यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (D.Litt.) की मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया है। स्टेज पर यह सम्मान लेते व्यक्त रानी मुखर्जी भावुक दिखाई दीं। पूरी खबर पढ़ें
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