Responsive Scrollable Menu

भगवान गणेश: मंगल, समृद्धि और विकसित भारत के प्रेरणास्रोत

भगवान श्री गणेश भारतीय संस्कृति के ऐसे बहुआयामी एवं सर्वस्वीकार्य देवता हैं, जिनका स्मरण किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में किया जाता है। वे केवल विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजित नहीं हैं, बल्कि उनका संपूर्ण व्यक्तित्व ज्ञान, विवेक, दूरदर्शिता, नेतृत्व, धैर्य, आत्मसंयम, संवाद, समावेशिता और कर्मशीलता का अद्भुत संदेश देता है। आज जब भारत विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, सामाजिक समरसता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब गणेशजी के प्रतीकात्मक व्यक्तित्व को केवल पूजा तक सीमित रखने के बजाय उनके जीवन-संदेश को राष्ट्रीय चरित्र और विकास-दृष्टि का आधार बनाना समय की बड़ी आवश्यकता है। गणेश चतुर्थी केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा का पर्व बन सकती है।

गणेशजी का सबसे बड़ा संदेश है—शुभारंभ करो, लेकिन विवेक के साथ। किसी भी कार्य के पहले गणेशजी का स्मरण इस बात का प्रतीक है कि सफलता केवल गति से नहीं, सही दिशा से मिलती है। विकसित भारत का निर्माण भी केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों, आधुनिक शहरों, नई तकनीक और विशाल परियोजनाओं से नहीं होगा। इसके लिए ऐसी विकास-दृष्टि चाहिए जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ मानवीय संवेदना, नैतिकता, पर्यावरण-संतुलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय का समन्वय हो। गणेशजी का स्मरण हमें बताता है कि विकास का पहला कदम बाहर नहीं, भीतर उठता है—विचारों की शुद्धता और संकल्प की दृढ़ता से।

इसे भी पढ़ें: Hartalika Teej 2026: अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं करती हैं हरितालिका तीज व्रत

गणेशजी का गजमुख उनकी सबसे विशिष्ट पहचान है। हाथी भारतीय मानस में बुद्धि, स्मृति, धैर्य और शक्ति का प्रतीक रहा है। बड़ा मस्तक हमें बड़ा सोचने की प्रेरणा देता है। आज भारत को भी सीमित सोच से बाहर निकलकर वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप दीर्घकालीन और व्यापक दृष्टि विकसित करनी होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, जैव-प्रौद्योगिकी और नई औद्योगिक क्रांति के युग में वही राष्ट्र आगे बढ़ेगा जो ज्ञान को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाएगा। गणेशजी का मस्तक मानो संदेश देता है—ज्ञान जितना व्यापक होगा, विकास उतना ही दूरगामी होगा।

उनके बड़े कान लोकतांत्रिक नेतृत्व की अनूठी सीख देते हैं। अच्छा नेतृत्व वह नहीं जो केवल बोलता है, बल्कि वह है जो सुनता है। जनता की आकांक्षाओं, युवाओं के सपनों, किसानों की समस्याओं, श्रमिकों की चुनौतियों, महिलाओं की अपेक्षाओं और वंचित वर्गों की आवाज को सुनना ही संवेदनशील शासन की पहचान है। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बने, इसके लिए विकास का मॉडल जनभागीदारी पर आधारित होना चाहिए। गणेशजी के बड़े कान हमें सिखाते हैं कि जनता की आवाज सुनना ही सुशासन की पहली शर्त है।

उनकी छोटी आंखें एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक मानी जाती हैं। आज सूचना और विकल्पों की अधिकता के दौर में ध्यान भटकना आसान है। राष्ट्र के सामने भी अनेक चुनौतियां हैं। इसलिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और ऊर्जा अनावश्यक विवादों में नहीं, राष्ट्र के निर्माण में लगनी चाहिए। विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब व्यक्ति से लेकर शासन तक प्राथमिकताओं की स्पष्टता, कार्य में एकाग्रता और परिणाम के प्रति प्रतिबद्धता हो।

गणेशजी की सूंड अत्यंत संवेदनशील होने के साथ शक्तिशाली भी है। वह सूक्ष्म वस्तु को भी संभाल सकती है और भारी कार्य भी कर सकती है। यह क्षमता हमें परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की प्रेरणा देती है। आज के भारत को भी यही लचीलापन चाहिए। तकनीक बदल रही है, रोजगार के स्वरूप बदल रहे हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था बदल रही है और पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ रही हैं। जो समाज परिवर्तन को समझकर अपनी क्षमता विकसित करेगा, वही भविष्य का नेतृत्व करेगा।

गणेशजी का लंबोदर भी गहरा जीवन-संदेश देता है। इसे विशाल हृदय, सहनशीलता और जीवन की विविधताओं को आत्मसात करने की क्षमता का प्रतीक माना जा सकता है। राष्ट्रनिर्माण में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मनभेद विनाशकारी हो सकते हैं। भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। भाषा, संस्कृति, परंपरा, विचार और जीवन-पद्धति की विविधता को संघर्ष का कारण नहीं, राष्ट्रीय शक्ति का आधार बनाना होगा। गणेशजी का व्यक्तित्व हमें समावेशी भारत की प्रेरणा देता है—ऐसा भारत जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई स्वयं को राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग महसूस न करे।

गणेशजी का वाहन मूषक भी अत्यंत अर्थपूर्ण प्रतीक है। विशालकाय गजानन का वाहन एक छोटा-सा मूषक है। यह मानो अहंकार पर नियंत्रण और छोटे से छोटे तत्व के महत्व को स्वीकार करने का संदेश देता है। आधुनिक भारत में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और बड़ी परियोजनाओं के साथ छोटे उद्यमी, कारीगर, किसान, स्टार्टअप, स्थानीय व्यवसाय और सामान्य नागरिक भी विकास की धुरी हैं। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़े भारत से नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को अवसर देने वाले भारत से है।

गणेशजी की चार भुजाएं कर्म, ज्ञान, विवेक और संतुलन के समन्वय का संदेश देती हैं। आज भारत को ज्ञान और कौशल से संपन्न युवा चाहिए, उद्यमशील नागरिक चाहिए और ऐसे संस्थान चाहिए जो नवाचार को प्रोत्साहित करें। केवल डिग्री नहीं, उपयोगी ज्ञान; केवल नौकरी नहीं, रोजगार सृजन; केवल उपभोग नहीं, उत्पादन—यही विकसित भारत की आधारभूमि बन सकती है।

गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, लेकिन विघ्नों को समाप्त करने का वास्तविक अर्थ समस्याओं से पलायन नहीं, बल्कि उनका साहसपूर्वक सामना करना है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता, प्रदूषण और अंधविश्वास जैसे राष्ट्रीय विघ्न केवल कानूनों से नहीं, सामूहिक चेतना और नागरिक जिम्मेदारी से दूर होंगे। गणेशजी का साहस हमें बताता है कि कठिनाई जितनी बड़ी हो, संकल्प उससे बड़ा होना चाहिए।

ऋद्धि और सिद्धि का गणेशजी से जुड़ाव भी विकास की व्यापक अवधारणा को स्पष्ट करता है। केवल धन-संपदा ऋद्धि नहीं और केवल उपलब्धि सिद्धि नहीं; दोनों का संतुलन आवश्यक है। भारत की आर्थिक समृद्धि के साथ ज्ञान, संस्कार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों की सिद्धि भी होनी चाहिए। तभी समृद्धि स्थायी और सार्थक बनेगी। शुभ और लाभ का संदेश भी यही है कि उपलब्धि तभी शुभ है जब वह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में हो।

गणेशजी को प्रथम पूज्य और बुद्धि के देवता के रूप में स्मरण करने की भारतीय परंपरा आज के भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। जब देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तब आवश्यकता केवल सरकारों के प्रयासों की नहीं, बल्कि विकसित सोच वाले नागरिकों की है। प्रत्येक भारतीय अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, उत्कृष्टता, नवाचार, अनुशासन और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे, तो विकास का लक्ष्य जनआंदोलन बन सकता है।

गणेश चतुर्थी इसलिए हमें केवल प्रतिमा स्थापित करने और उत्सव मनाने का अवसर न दे, बल्कि अपने भीतर गणेशत्व जगाने का संकल्प दे। बुद्धि में विशालता हो, दृष्टि में दूरदर्शिता हो, कानों में संवेदनशीलता हो, वाणी में मधुरता हो, कर्म में शक्ति हो, मन में धैर्य हो और व्यवहार में समावेशिता हो—यही गणेशजी की वास्तविक आराधना है। जब भारत का नागरिक अपने भीतर के विघ्नों—अज्ञान, आलस्य, अहंकार, स्वार्थ और संकीर्णता—पर विजय प्राप्त करेगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।

भगवान गणेश का संदेश अंततः यही है कि मंगल बाहर से नहीं आता, उसे अपने विचार, व्यवहार और कर्म से निर्मित करना पड़ता है। यदि गणेशजी की बुद्धि, विवेक, धैर्य, साहस, श्रवणशीलता, आत्मसंयम और समावेशी दृष्टि को राष्ट्रीय जीवन का हिस्सा बनाया जाए, तो भारत केवल आर्थिक रूप से विकसित राष्ट्र नहीं, बल्कि समृद्ध, संस्कारित, संवेदनशील, आत्मनिर्भर और विश्व को दिशा देने वाला आदर्श राष्ट्र बन सकता है। यही गणेश चतुर्थी की सबसे बड़ी राष्ट्रीय साधना और विकसित भारत 2047 के संकल्प की सार्थक परिणति होगी।

- ललित गर्ग
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

Continue reading on the app

Hartalika Teej 2026: अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं करती हैं हरितालिका तीज व्रत

शिव-गौरी की पूजा करना विशेषकर सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए पति-पुत्र संतति एवं पौत्रादि सुखों को बढ़ाने वाला है। जिस परिवार की महिलाएँ श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-त्योहारों का पालन करती हैं, उनके शुभ आचरण और संकल्प से परिवार की उन्नति होती है, हरतालिका तीज का व्रत शुभ ग्रहों को जागृत कर घर में सुख-समृद्धि का कारण बनता है। नियमपूर्वक हरतालिका तीज का व्रत-उपवास करने से सौभाग्य एवं ग्रहों की अनुकूलता जागृत होती है।

जानें हरितालिका तीज व्रत के बारे में 

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं इस व्रत को वैवाहिक सुख, एक समर्पित पति, पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं। यही नहीं अविवाहित महिलाएं भगवान शिव जैसे समर्पित और नेक पति पाने के लिए रखती भी यह व्रत रखती हैं। नारी का दृढ़ संकल्प पति के भाग्य को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। शिव-गौरी की पूजा करना विशेषकर सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए पति-पुत्र संतति एवं पौत्रादि सुखों को बढ़ाने वाला है। जिस परिवार की महिलाएं श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-त्योहारों का पालन करती हैं, उनके शुभ आचरण और संकल्प से परिवार की उन्नति होती है, हरतालिका तीज का व्रत शुभ ग्रहों को जागृत कर घर में सुख-समृद्धि का कारण बनता है। 

पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सुहागिन महिलाएं इस वर्ष 14 सितंबर 2026, सोमवार को हरतालिका तीज व्रत रखेंगी। वहीं कुंवारी कन्याएं सुयोग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए विधि-विधान से यह व्रत करती हैं। हरतालिका तीज को कुछ जगहों पर तीजा व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस व्रत को भारतीय परंपराओं के कुछ कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस व्रत में 24 घंटे का निर्जला उपवास किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

इसे भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Celebration: गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और Vrat Katha, क्या है चंद्र दर्शन की मनाही?

हरतालिका तीज पर पूजा का मुहूर्त

पंडितों के अनुसार हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है। हरतालिका तीज के दिन प्रात: काल पूजा का समय सुबह 06:05 बजे से सुबह 07:06 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में भगवान शिव के पूजन के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम मुहूर्त माना गया है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05:43 बजे से शाम 07:13 बजे तक रहेगा।

हरतालिका तीज व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त 

हरतालिका तीज व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात करना सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि तीज व्रत पारण के दिन भी भद्रा विद्यमान रहेगी। इसलिए व्रत पारण के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार करना पड़ेगा। तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे के बाद किया जा सकेगा।

हरतालिका तीज व्रत से जुड़ी कथा भी है रोचक

शास्त्रों में हरतालिका तीज व्रत से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने शिवजी से पूछा, ‘हे नाथ! कौन-सा व्रत ऐसा है जो स्त्री के लिए शीघ्र फलदायी हो और जिससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हो?’ तब भगवान शिव ने कहा, ‘हे पार्वती! जिस व्रत को तुमने पहले जन्म में मेरे लिए किया था, वह हरितालिका तीज व्रत ही था, वही सबसे श्रेष्ठ है। इसे तुम पुनः करो और अन्य स्त्रियों को भी उपदेश दो, क्योंकि यह व्रत स्वयं आदिशक्ति द्वारा प्रतिपादित और मेरे द्वारा अनुमोदित है।’ हरतालिका व्रत से स्त्री को अगणित जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। हरितालिका तीज सौभाग्यवर्द्धक होने के साथ स्त्रियों की जन्मकुण्डली में वर्णित वैधव्ययोग का नाश करने वाला और संतान सुख प्रदान करने वाला होता है, स्त्रियों का सम्मान करने से शुक्र ग्रह बलवान होता है।

इसलिए मनायी जाती है हरतालिका तीज 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर बिना अन्न-जल हजारों वर्ष कठिन तप किया था। माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उनकी सखियों ने उनका हरण कर लिया और उन्हें एक जंगल में छिपा दिया। संस्कृत में हरत का अर्थ हरण करने से है और आलिका का अर्थ सखी होता है। सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस पर्व का नाम हरतालिका तीज पड़ा।

हरितालिका तीज व्रत से होती है दैवीय शक्तियां जागृत

शास्त्रों के अनुसार यह व्रत स्त्री की आध्यात्मिक शक्ति को सक्रिय कर घर में सुख-शांति और समृद्धि का आधार बनता है। जिस घर की स्त्रियां धर्म, कर्म पूर्वक मर्यादित ढंग से आचरण करती हैं, वहां खुशियों का अम्बार लग जाता है। स्त्रियां इस दिन व्रत आदि के माध्यम से अपने भीतर की दैवीय शक्ति को जाग्रत करती है। जब नारी अन्तर्मन में शुभ संकल्प करती है, तो ब्रह्मांड भी उसकी शक्ति के आगे नतमस्तक हो जाता है। एक स्त्री के संकल्प में अपार शक्ति निहित है, वह यमराज से भी अपने पति के प्राणों की रक्षा करने में सक्षम है, बस इस कलिकाल में उस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता है।

हरितालिका तीज व्रत के दिन प्रदोष काल में करें पूजा 

पंडितों के अनुसार व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को प्रदोष काल में पूजन-अर्चन करेंगी। इस दौरान मिट्टी से बने उमा-महेश्वर और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से पूजा होगी। व्रती माता पार्वती और शिव जी से परिवार की सुख-शांति व सौभाग्य की प्रार्थना करेंगी।

जानें हरितालिका तीज व्रत पर्व पर पारण का शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाएं हरितालिका तीज की व्रत कथा का श्रवण कर रात्रि जागरण करेंगी। इसके बाद अगले दिन 15 सितंबर की सुबह विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाएगा। 

- प्रज्ञा पाण्डेय 

Continue reading on the app

  Sports

Asian Games 2026 Live Updates: भारतीय मुक्केबाजों के लिए बड़ा दिन, मेंस क्रिकेट का एक और मैच चढ़ा बारिश की भेंट

Asian Games 2026 Live: एशियन गेम्स के 10वें दिन भारत को किन-किन खेलों में मिलेंगे मेडल? क्या भारत को एथलेटिक्स, बॉक्सर्स दिलाएंगे मेडल? Tue, 29 Sep 2026 06:32:06 +0530

  Videos
See all

Ujjain Shahi Masjid Clash LIVE: उज्जैन में Bulldozer Action | Owaisi | Stone Pelting | Breaking News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-29T01:56:59+00:00

Jyotiraditya Scindia Gwalior Worship : 'सूफी संत मंसूर शाह के दर पर सिंधिया | #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-29T01:53:32+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers