Love Horoscope For 22 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 22 सितंबर 2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन
दैनिक प्रेम राशिफल 22 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।
यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:
मेष (Aries)
आज जीवनसाथी के साथ पल बिताने के अवसर मिलेंगे। हालांकि, बातचीत के दौरान अपने स्वभाव और भाषा पर संयम रखें, अन्यथा बेवजह कहासुनी हो सकती है। अविवाहित लोगों की आज किसी विशेष व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है।
वृषभ (Taurus)
प्रेम के मामले में आज का दिन बेहद शानदार रहेगा। यदि आप लंबे समय से अपने दिल का हाल बयां करना चाह रहे थे, तो आज का समय उत्तम है। आपस में तालमेल और आत्मीयता और मजबूत होगी।
मिथुन (Gemini)
आज प्रेम संबंध में कुछ गलतफहमियाँ पैदा हो सकती हैं। साथी की बात को धीरज से सुनें और जल्दबाज़ी में कोई प्रतिक्रिया न दें। किसी बाहरी व्यक्ति के बहकावे में आकर अपने रिश्ते में खटास न आने दें।
कर्क (Cancer)
आज आप अपने प्रियजन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील महसूस करेंगे। उनके लिए कोई छोटी-सी सरप्राइज योजना बनाना रिश्ते में नयापन लाएगा। शादीशुदा लोगों के बीच समझदारी और सामंजस्य बना रहेगा।
सिंह (Leo)
आज की लव लाइफ में नया उत्साह और अपनापन देखने को मिलेगा। साथ में कहीं घूमने-फिरने या सुकून के पल बिताने की योजना बन सकती है। सिंगल लोगों के जीवन में किसी नए इंसान की दस्तक हो सकती है।
कन्या (Virgo)
आज अपने रिश्ते को थोड़ा वक्त और तवज्जो देने की आवश्यकता है। जीवनसाथी किसी बात को लेकर आपसे असहमत हो सकता है, इसलिए संवाद बनाए रखें और एक-दूसरे की भावना का आदर करें।
तुला (Libra)
आज का दिन रोमांस से भरपूर रहेगा। पार्टनर के साथ तालमेल बहुत बेहतरीन रहेगा, जिससे आप खुद को खुशमिजाज़ महसूस करेंगे। जो लोग विवाह के बंधन में बंधने का सोच रहे हैं, उन्हें परिजनों की स्वीकृति मिल सकती है।
वृश्चिक (Scorpio)
आज साथी के साथ किसी पुरानी बात को लेकर तनाव हो सकता है। बीती बातों को दोहराने से बचें और आज के पल का आनंद लें। समझदारी से काम लेंगे तो दिन शांतिपूर्ण बितेगा।
धनु (Sagittarius)
आज आपका पार्टनर आपकी भावनाओं की कद्र करेगा और आपका पूरा साथ देगा। रिश्ते में नयापन और ताज़गी लाने के लिए आप मिलकर कुछ नया प्लान कर सकते हैं।
मकर (Capricorn)
कामकाज की व्यस्तता के कारण आप साथी को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़े निराश हो सकते हैं। एक छोटा-सा संदेश या कॉल भी उनका मूड बना सकता है।
कुंभ (Aquarius)
आज का दिन आनंददायक रहेगा। पार्टनर के साथ किसी यात्रा या बाहर भोजन का कार्यक्रम बन सकता है। अविवाहितों को किसी पुराने मित्र में रुचि महसूस हो सकती है।
मीन (Pisces)
आज एक-दूसरे पर भरोसा और गहरा होगा। आपस में अपने विचार साझा करने से रिश्ते में परिपक्वता आएगी। दिन की समाप्ति किसी सुखद अनुभव के साथ होगी।
Vamana Jayanti 2026: 23 सितंबर को रखा जाएगा वामन द्वादशी व्रत, यह है पूजन मुहूर्त
हिंदू धर्म में वामन जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। वामन जयंती भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर श्रवण नक्षत्र के अभिजीत मुहूर्त में भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था।
इसी कारण से वामन जयंती मनाई जाती है। इसके साथ ही, इसे वामन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। भक्त इस दिन विधि-विधान से भगवान से विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं। इस व्रत के रखने से श्री विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं। आइए आपको बताते हैं वामन जयंती की तारीख, मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथा।
वामन जयंती 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का आरंभ 22 सितंबर, मंगलवार के दिन रात में 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 23 सितंबर, बुधवार को रात 10 बजकर 51 मिनट पर द्वादशी तिथि समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, वामन जयंती का व्रत 23 सितंबर को रखा जाएगा।
वामन जयंती पूजा विधि
- व्रत रखने वाले इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद ही साफ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद नित्यकर्म करने के बाद पूजा घर में एक लड़की की चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं।
- इसके बाद चौकी पर भगवान श्रीवामन की प्रतिमा स्थापित करें। अब चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें।
- भगवान वामन का पंचोपचार विधि और षोडशोपचार से पूजन करें। अब 52 पेड़े और 52 दक्षिणा अर्पित करके पूजा करें।
- भोग लगाने के बाद ब्राह्मण को दही-चावल, चीनी और दक्षिणा दान करके व्रत का पारण करें।
श्रीहरि के वामन अवतार की कथा
एक समय की बात है जब असुरराज दैत्य बलि ने देवलोक को हड़प लिया था। तब भगवान विष्णु ने इंद्र को देवलोक में दोबारा अधिकार दिलवाने के लिए यह अवतार लिया था। बलि विरोचन के पुत्र और प्रह्लाद के पौत्र थे। जिन्हें दयालु असुर राजा के रूप में जाना जाता था। ऐसी भी कहते हैं कि अपनी तपस्या और ताकत से बलि ने त्रिलोक पर आधिपत्य प्राप्त किया था। श्रीहरि वामन अवतार, एक बौने ब्राह्मण के वेश में बलि के पास पहुंचे। वहां बलि से भगवान वामन ने अपने रहने के लिए तीन कदम बराबर भूमि मांगी। उनके हाथ में एक लकड़ी का छाता था। गुरु शुक्राचार्य के चेताने के बाद भी बलि ने श्रीवामन को यह वचन दे दिया।
ऐसा कहते ही श्रीवामन ने अपना आकार इतना अधिक बढ़ा लिया कि पहले ही कदम में पूरा भूलोक नाप लिया। फिर, दूसरे कदम में देवलोक नापा। इसके बाद, ब्रह्मा ने अपने कमंडल के जल से भगवान वामन के पांव धोए थे और इसी जल से गंगा उत्पन्न हुई थीं। इसके बाद, तीसरे कदम आगे बढ़ाने के लिए कोई भूमि नहीं बची। ऐसी स्थिति में बलि ने अपना वचन पूर्ण करने के लिए वामन देव को तीसरा कदम आगे बढ़ाने के लिए अपना सिर आगे प्रस्तुत कर दिया। बलि की इस वचनबद्धता को देखकर श्रीवामन अत्यंत प्रसन्न हुए। चूंकि बलि के दादा प्रह्लाद विष्णुजी के परम भक्त थे। ऐसे में वामन देव ने बलि को पाताल लोक देने का निश्चय किया। फिर, अपना तीसरा कदम बलि के सिर में रखा। इसके फलस्वरूप बलि पाताल लोक पहुंच गए।
मान्यता है कि बलि के सिर पर अपना पैर रखकर श्रीवामन ने उन्हें अमरत्व प्रदान किया था। साथ ही, राजा को महाबलि की उपाधि भी दी क्योंकि, उन्होंने अपनी धर्मपरायणता और वचनबद्धता के चलते अपने आपको महात्मा साबित किया था। श्रीहरि ने बलि को आध्यात्मिक आकाश जाने की अनुमति दी जहां उनका अपने सद्गुणी दादा प्रहलाद और अन्य दैवीय आत्माओं से मिलना हुआ था।
व्रत रखने वाले साधक को इस कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए।
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