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Explainer: चीन की असली ताकत तेल नहीं, ‘चुंबक’! 60 साल में कैसे बदली तस्वीर? समझें ट्रंप और जिनपिंग का खेल

XI Jinping US Visit 2026: दुनिया की सियासत में ताकत का संतुलन सिर्फ सेना और परमाणु हथियारों से तय नहीं होता. आज तकनीक, सप्लाई चेन और जरूरी खनिज भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं. अमेरिका और चीन के बीच हालिया घटनाक्रम इसी बदलती तस्वीर की तरफ इशारा करता है.

24 सितंबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन की मेजबानी की. इससे एक दिन पहले ट्रंप ने शी जिनपिंग का ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर स्वागत किया था. व्हाइट हाउस ने इसे एक दशक से ज्यादा समय बाद शी की अमेरिका यात्रा बताया.

यह तस्वीर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका-चीन के रिश्ते लंबे समय से व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और टैरिफ को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं. लेकिन इस समय दोनों देशों को कई ऐसे मुद्दों पर बातचीत भी करनी पड़ रही है, जहां एक-दूसरे पर निर्भरता बनी हुई है. इनमें सबसे अहम नाम रेयर अर्थ मैग्नेट का है.

आखिर ये रेयर अर्थ मैग्नेट है क्या?

नाम सुनकर लग सकता है कि यह कोई बहुत खास तरह का साधारण चुंबक है. लेकिन ऐसा नहीं है. रेयर अर्थ मैग्नेट बेहद शक्तिशाली स्थायी चुंबक होते हैं, जिनमें नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे तत्वों का इस्तेमाल होता है.

इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, औद्योगिक मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्र में किया जाता है. यानी जिस दुनिया में इलेक्ट्रिक कारें, रोबोट, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक हथियार तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां इन मैग्नेट की अहमियत भी बढ़ रही है और यहीं से चीन की ताकत शुरू होती है.

चीन के पास 94 फीसदी वाला फायदा क्या है?

यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा. यह आंकड़ा पूरी दुनिया के रेयर-अर्थ खनन का नहीं है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के मुताबिक 2024 में चीन ने दुनिया के मैग्नेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले रेयर-अर्थ तत्वों के खनन का करीब 60 फीसदी हिस्सा किया. लेकिन रिफाइनिंग में उसकी हिस्सेदारी करीब 91 फीसदी थी. वहीं, स्थायी रेयर-अर्थ मैग्नेट के निर्माण में चीन की हिस्सेदारी करीब 94 फीसदी थी.

यानी चीन की असली ताकत सिर्फ जमीन से खनिज निकालने में नहीं है. उसकी सबसे बड़ी बढ़त इस बात में है कि वह इन खनिजों को साफ करता है, अलग-अलग तत्वों में बदलता है, धातु और मिश्रधातु तैयार करता है और फिर उनसे तैयार मैग्नेट बनाता है. यही पूरी सप्लाई चेन चीन को रणनीतिक ताकत देती है.

अमेरिका के पास भी रेयर अर्थ हैं, फिर चिंता क्यों?

अमेरिका के पास भी रेयर-अर्थ संसाधन हैं. समस्या यह है कि किसी खदान में खनिज होना और उससे बड़े पैमाने पर तैयार मैग्नेट बनाना दो अलग चीजें हैं. रेयर-अर्थ सप्लाई चेन में कई चरण होते हैं—खनन, अयस्क की प्रोसेसिंग, अलग-अलग तत्वों को अलग करना, रिफाइनिंग, धातु बनाना, मिश्रधातु तैयार करना और आखिर में मैग्नेट का निर्माण.

चीन ने दशकों में इन सभी चरणों में अपनी क्षमता विकसित की है. इसके कारण वहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ और लागत भी कम हुई. इसके मुकाबले अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब अपनी सप्लाई चेन को चीन से अलग करने या उसमें विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन नई खदान, रिफाइनिंग प्लांट और मैग्नेट फैक्ट्री तैयार करने में समय लगता है. यही वजह है कि चीन की बढ़त को तुरंत खत्म करना आसान नहीं है.

चीन ने 60 साल पहले क्या समझ लिया था?

चीन की मौजूदा स्थिति अचानक नहीं बनी. इसके पीछे कई दशकों की औद्योगिक नीति और निवेश है. इनर मंगोलिया के बाओतौ क्षेत्र में बड़े रेयर-अर्थ भंडार की खोज ने चीन को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण आधार दिया. इसके बाद चीन ने खनन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण पर भी जोर दिया.

समय के साथ चीन ने इस सेक्टर में बड़ी उत्पादन क्षमता तैयार की. उसने ऐसी सप्लाई चेन बनाई जिसमें कच्चे खनिज से लेकर तैयार मैग्नेट तक कई महत्वपूर्ण चरण देश के भीतर मौजूद हैं. यही वह रणनीति है जिसका फायदा अब इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी के दौर में दिखाई दे रहा है.

ट्रंप के दौर में रेयर अर्थ इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया?

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के दौरान रेयर-अर्थ सप्लाई का महत्व खुलकर सामने आया. अप्रैल 2025 में चीन ने कुछ भारी रेयर-अर्थ तत्वों और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया. इसका असर ऑटोमोबाइल समेत कई उद्योगों पर पड़ा. IEA के मुताबिक उस दौरान अमेरिका, यूरोप और दूसरे क्षेत्रों के कई वाहन निर्माताओं को स्थायी मैग्नेट हासिल करने में मुश्किल हुई और कुछ कंपनियों को उत्पादन की गति कम करनी पड़ी या अस्थायी रूप से उत्पादन रोकना पड़ा.

भारत का ऑटो उद्योग भी इस संकट से अछूता नहीं रहा था. 2025 में भारतीय वाहन कंपनियों ने चीन से मैग्नेट की सप्लाई में देरी को लेकर चिंता जताई थी. यानी यह सिर्फ अमेरिका और चीन का मामला नहीं है. चीन की सप्लाई में बड़ी रुकावट दुनिया की कई इंडस्ट्री को प्रभावित कर सकती है.

इलेक्ट्रिक कार से लेकर मिसाइल तक, कहां काम आता है?

रेयर-अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल बहुत से ऐसे उत्पादों में होता है जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में देखते हैं.

कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं:

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर
  • विंड टर्बाइन
  • औद्योगिक मोटर
  • रोबोटिक्स
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
  • डेटा सेंटर
  • एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक
  • कुछ आधुनिक हथियार प्रणालियां

यानी यह कहना ज्यादा सही होगा कि रेयर-अर्थ मैग्नेट आधुनिक अर्थव्यवस्था और तकनीकी उद्योग की कई महत्वपूर्ण मशीनों में इस्तेमाल होने वाला रणनीतिक घटक है.

क्या चीन चाहे तो पूरी दुनिया को रोक सकता है?

यह कहना कि चीन कुछ हफ्तों में पूरी दुनिया की ऑटोमोबाइल या टेक इंडस्ट्री को पूरी तरह बंद कर सकता है, बहुत सीधी और अतिरंजित बात होगी.

लेकिन चीन की सप्लाई में बड़ा व्यवधान पैदा होने पर गंभीर असर पड़ सकता है. 2025 के निर्यात नियंत्रणों ने इसका उदाहरण दिया था. IEA के अनुसार, कई कंपनियों को मैग्नेट की कमी से जूझना पड़ा और चीन के बाहर बने मैग्नेट पर कीमतों का प्रीमियम भी बढ़ा.  यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप और दूसरे देश वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

तो क्या ट्रंप का बदला हुआ अंदाज सिर्फ चीन की वजह से है?

यहां भी तस्वीर को सिर्फ एक कारण से समझना ठीक नहीं होगा. अमेरिका और चीन के रिश्तों में व्यापार, टैरिफ, AI, सेमीकंडक्टर, ताइवान, सुरक्षा और रेयर-अर्थ जैसे कई मुद्दे शामिल हैं. सितंबर 2026 में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और चीनी उप प्रधानमंत्री हे लाइफेंग की बातचीत में भी AI, व्यापार और रेयर-अर्थ सप्लाई प्रमुख मुद्दों में शामिल थे. ([Reuters][5])

रॉयटर्स ने सितंबर 2026 में रिपोर्ट किया कि चीन की रेयर-अर्थ क्षेत्र में मजबूत स्थिति अमेरिका की चीन पर दबाव डालने की क्षमता को प्रभावित कर रही है और ट्रंप प्रशासन शी जिनपिंग के साथ शिखर वार्ता से पहले ज्यादा सावधानी बरत रहा है. यह एक विश्लेषणात्मक आकलन है, न कि यह प्रमाण कि ट्रंप का हर कदम सिर्फ रेयर-अर्थ के दबाव में लिया गया है. ([Reuters][6])

असली कहानी 'चुंबक' से कहीं बड़ी है

कहानी सिर्फ इस बात की नहीं है कि चीन के पास ज्यादा रेयर-अर्थ मैग्नेट हैं. असली कहानी यह है कि आधुनिक दुनिया में ताकत की परिभाषा बदल रही है. पहले तेल को रणनीतिक ताकत का बड़ा आधार माना जाता था. अब इसके साथ सेमीकंडक्टर, AI, डेटा सेंटर, बैटरी, महत्वपूर्ण खनिज और मैग्नेट जैसी चीजें भी जुड़ गई हैं. 

जिस देश के पास इनकी सप्लाई चेन पर ज्यादा नियंत्रण होगा, उसके पास दूसरे देशों पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने का एक अतिरिक्त साधन होगा. चीन ने रेयर-अर्थ क्षेत्र में यही बढ़त बनाई है. लेकिन अमेरिका भी इसे बदलने की कोशिश कर रहा है. सवाल यह नहीं है कि चीन के पास हमेशा यह बढ़त रहेगी या नहीं. सवाल यह है कि बाकी दुनिया कितनी तेजी से वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार कर पाती है.

इसलिए ट्रंप का शी जिनपिंग का स्वागत करना सिर्फ एक राजकीय समारोह की तस्वीर नहीं है. इसके पीछे अमेरिका-चीन की पूरी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा दिखाई देती है, जहां अब ताकत सिर्फ मिसाइलों और डॉलर से नहीं, बल्कि उन छोटे-छोटे खनिजों और मैग्नेट से भी तय होती है, जिनके बिना आधुनिक दुनिया की बड़ी मशीनें चलना मुश्किल हो सकता है.

यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी की देखरेख में शी जिनपिंग के लिए बना डिनर, जानें व्हाइट हाउस में उन्हें खाने के लिए क्या-क्या मिला

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