वज्रदंती: मसूड़ों की सूजन, दर्द या बदबू? हर समस्या की छुट्टी कर देगा ये छोटा सा फूल
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। वज्रदंती एक छोटा-सा दिखने वाला, लेकिन बहुत असरदार औषधीय फूल है, जिसे आयुर्वेद में दांतों और मसूड़ों का सच्चा दोस्त माना गया है। गांव-देहात से लेकर आयुर्वेदिक दवाओं तक, वज्रदंती का इस्तेमाल सालों से होता आ रहा है।
अगर आपको मसूड़ों की सूजन, दांतों में दर्द, खून आना या मुंह से बदबू जैसी समस्याएं परेशान कर रही हैं तो यह फूल आपकी बड़ी मदद कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी साइड इफेक्ट के धीरे-धीरे समस्या की जड़ पर काम करता है।
वज्रदंती में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो मसूड़ों में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। अक्सर मसूड़ों की सूजन और दर्द की वजह गंदगी और कीटाणु होते हैं, जो दांतों के बीच जमा हो जाते हैं। वज्रदंती इन कीटाणुओं को साफ करने का काम करता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है। यही वजह है कि कई आयुर्वेदिक टूथपेस्ट और दंत मंजन में वज्रदंती का इस्तेमाल किया जाता है।
मुंह से बदबू आना ओरल हेल्थ की एक आम समस्या है, जो कई बार शर्मिंदगी का कारण भी बन जाती है। वज्रदंती इस परेशानी में भी काफी कारगर है। यह मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करता है और सांसों को ताजगी देता है। अगर रोज सुबह वज्रदंती युक्त दंत मंजन या टूथपेस्ट से दांत साफ किए जाएं तो बदबू की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। पुराने समय में लोग वज्रदंती के पत्तों या फूल को सुखाकर उसका चूर्ण बनाते थे और उसी से दांत साफ करते थे।
दांतों के दर्द में भी वज्रदंती राहत पहुंचाता है। अगर दांतों में हल्का-फुल्का दर्द या झनझनाहट रहती है, तो वज्रदंती सूजन को कम करके आराम देता है। इसके नियमित इस्तेमाल से दांतों की पकड़ मजबूत होती है और मसूड़ों से खून आना भी धीरे-धीरे बंद हो जाता है। यही कारण है कि बुजुर्ग लोग आज भी वज्रदंती को दांतों की समस्याओं के लिए भरोसेमंद उपाय मानते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/डीकेपी
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Explainer: दिनाकर की AMMK फिर थामा NDA का दामन, जानें क्या हैं इसके मायने
Explainer: तमिलनाडु में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है. अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने एक बार फिर अपनी पार्टी को NDA में शामिल करने का ऐलान कर दिया है. बुधवार को चेन्नई में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के तमिलनाडु चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद दिनाकरन ने यह घोषणा की. इस कदम को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले NDA को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
AMMK और NDA का पुराना रिश्ता
AMMK की स्थापना टीटीवी दिनाकरन ने 2018 में AIADMK से अलग होकर की थी. दिनाकरन पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के भतीजे हैं और दक्षिण तमिलनाडु में मुक्कुलथोर यानी थेवर समुदाय में उनका खासा प्रभाव माना जाता है. 2021 के विधानसभा चुनाव में AMMK ने AIADMK को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया था, क्योंकि कई सीटों पर उसके वोट कट गए थे. उस समय इसका सीधा फायदा DMK को मिला था.
सितंबर 2025 में AMMK ने NDA से दूरी बना ली थी, लेकिन अब चुनाव से ठीक पहले उसकी वापसी ने तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
दिनाकरन का बयान और सियासी संकेत
पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद दिनाकरन ने कहा कि पुरानी असहमतियों को पार्टी और राज्य के बड़े हितों के आड़े नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की भलाई के लिए सभी आंतरिक मतभेदों को सुलझाया जाना जरूरी है. दिनाकरन ने 'अम्मा के कैडर' को एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य जयललिता के शासन मॉडल को फिर से स्थापित करना और बेहतर प्रशासन देना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान AIADMK नेतृत्व और दिनाकरन के बीच रिश्तों में नरमी का संकेत देता है.
तमिलनाडु की राजनीति पर संभावित असर
AMMK का NDA में शामिल होना सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन के लिए चिंता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है. AMMK का मुख्य जनाधार दक्षिण तमिलनाडु में थेवर समुदाय है, जहां पिछले चुनाव में AIADMK को नुकसान उठाना पड़ा था. अब यह वोट बैंक NDA के पक्ष में जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, AMMK के जुड़ने से NDA का कुल वोट शेयर 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है.
विपक्ष की एकजुटता बनाम सत्तारूढ़ गठबंधन
तमिलनाडु में इस बार मुकाबला केवल दो ध्रुवों तक सीमित नहीं रहने वाला. माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में NDA, DMK-कांग्रेस गठबंधन और अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा. AMMK के NDA में आने से विपक्ष पहले से ज्यादा संगठित नजर आ रहा है. PMK पहले ही NDA का हिस्सा है, और अगर ओ. पन्नीरसेल्वम या DMDK जैसे दल भी गठबंधन में लौटते हैं, तो NDA की स्थिति और मजबूत हो सकती है.
मुख्यमंत्री स्टालिन के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
टीटीवी दिनाकरन की वापसी को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और DMK के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. 2021 के चुनाव में AMMK ने AIADMK के वोट काटकर DMK की जीत आसान की थी. इस बार अगर वही वोट NDA के खाते में जाते हैं, तो सत्ता विरोधी लहर को दिशा मिल सकती है. खासकर दक्षिण तमिलनाडु में DMK की राह कठिन हो सकती है.
2026 का चुनाव क्यों होगा खास?
दिनाकरन के NDA में लौटने से 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और दिलचस्प हो गया है. जहां एक ओर NDA पुरानी दुश्मनियां भुलाकर एकजुट होने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर DMK सत्ता बचाने की चुनौती का सामना कर रही है. ऐसे में आने वाले महीनों में गठबंधन राजनीति, जातीय समीकरण और नेतृत्व की भूमिका चुनावी नतीजों को तय करने में अहम होगी. कुल मिलाकर, AMMK की NDA में वापसी तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है.
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