मंगला गौरी व्रत 2026: इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। जहां सावन के सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं, वहीं मंगलवार के दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं अविवाहित कन्याओं को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाह में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है।
सावन 2026 में कब-कब पड़ेंगे मंगला गौरी व्रत?
- पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार)
मंगला गौरी व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
4 अगस्त 2026 को पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
- अन्य शुभ पूजा समय: सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक
इस दौरान माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल को साफ करें।
- माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
- माता गौरी को सिंदूर, चूड़ियां, चुनरी, कुमकुम, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगल कामना करें।
सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों खास है यह व्रत?
मंगला गौरी व्रत को विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में प्रेम और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं कई अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण उन्हें अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की देवी माना जाता है। सावन के मंगलवार को उनकी पूजा करने की परंपरा इसी आस्था से जुड़ी हुई है। श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता, पारिवारिक सुख और वैवाहिक सौहार्द बढ़ने की मान्यता है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त में अंतर संभव है। अपने क्षेत्र के पंचांग या विद्वान से पुष्टि अवश्य करें।
Kamika Ekadashi 2026: कामिका एकादशी 2026 कब है?, जानें व्रत का सही दिन और महत्व
Kamika Ekadashi 2026: सावन का महीना भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है। इसी महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का सनातन धर्म में खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कामिका एकादशी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को रात 1:59 बजे होगी और इसका समापन 9 अगस्त 2026 को सुबह 11:04 बजे होगा।
चूंकि हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है, इसलिए कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 (रविवार) को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ समय
श्रद्धालु सूर्योदय के बाद स्नान करके भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कर सकते हैं। पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करना, घी का दीपक जलाना और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
कामिका एकादशी की पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ और पीले वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान की साफ-सफाई करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पीले पुष्प, फल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर विष्णु मंत्रों का जाप करें।
- एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।
व्रत का पारण कब होगा?
कामिका एकादशी का व्रत 10 अगस्त 2026 को द्वादशी तिथि में पारण के साथ पूरा किया जाएगा। पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।
कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से पाप कर्मों का क्षय होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित विवरण पर आधारित है। अलग-अलग पंचांगों में समय और मुहूर्त में मामूली अंतर संभव है।
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