CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: Lucknow में Congress कार्यकर्ताओं और पुलिस में झड़प
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने यहां विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विधानसभा की ओर मार्च करने से रोके जाने पर पुलिस से उनकी झड़प हो गई। शुक्रवार को भारी बारिश के बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस ने अवरोधक लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता अवरोधकों पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई। इसके बाद पुलिस ने राय, मिश्रा और प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर विरोध प्रदर्शन स्थल इको गार्डन ले गई। इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट में कहा, लोकतंत्र की हत्या करने वाले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
ज्ञानेश ने देशद्रोह का काम किया है, उन्हें चुनाव आयुक्त की कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदेश कांग्रेस ने एक अन्य पोस्ट में कहा, जिन्हें लगता है हिरासत में लेकर आवाज दबा देंगे, वो गलतफहमी में हैं।
यह आत्मविश्वास सत्ता के दमन पर सच की जीत का शंखनाद है। प्रदर्शनकारियों ने बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा, महिला कार्यकर्ता वोट चोर, गद्दी छोड़ लिखे पोस्टर लिए हुए थीं। राय ने भाजपा और चुनाव आयोग पर साजिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, हक की यह लड़ाई न रुकी है, न रुकेगी! लोकतंत्र पर हमला और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा। गौतम ने भी कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की चुनावी गड़बड़ी देश हित के ख़िलाफ़ है। मिश्रा ने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में भी वोट की चोरी के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा, राहुल जी सबूतों के साथ यह मुद्दा उठाते रहे हैं।
आज वह मुद्दा लोगों के सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति या पार्टी का नहीं, बल्कि संविधान और देश के लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा का है।
CEC Gyanesh Kumar को हटाने की मांग पर Guwahati में Congress नेता Gaurav Gogoi हिरासत में
(फोटो के साथ) गुवाहाटी, 25 सितंबर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड से आगे जाने की कोशिश करने पर कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख गौरव गोगोई और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। गोगोई के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने अपने मुख्यालय राजीव भवन से एक मार्च निकाला और उसकी योजना सीईसी का पुतला फूकने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ने की थी।
पुलिस ने राजीव भवन के पास बैरिकेड लगाए थे, जिन्हें गोगोई समेत प्रदर्शनकारी नेताओं ने पार करने की कोशिश की। उसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में गोगोई ने कहा कि पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए एक ‘लोकतांत्रिक कदम’ उठाया था और ‘भारतीय लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ अपनी चिंता प्रकट करने’ के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय जाने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने ‘हमें रोक लिया और हिरासत में ले लिया।’ उन्होंने कहा, ‘‘ यदि वे (भाजपा) सोचते हैं कि हमें हिरासत में लेकर हमारा मुंह बंद करा सकते हैं तो उन्हें गलतफहमी हैं।
ऐसा लगता है कि भाजपा डर गयी है।’’ गोगोई ने कहा,‘‘कांग्रेस भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष करती रहेगी। हम भाजपा को हटायेंगे और देश को बचायेंगे।’’ हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेताओं को बस से चौथी असम पुलिस बटालियन ले जाया गया। इस दौरान उन्हें भाजपा और सीईसी के खिलाफ नारे लगाते हुए सुना गया।
वे ‘भाजपा वापस जाओ’ और ‘ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार करो’ जैसे नारे लगा रहे थे। कांग्रेस प्रवक्ता बेदव्रत बोरा ने आरोप लगाया कि नेताओं को ‘बलपूर्वक गिरफ्तार’ कर लिया गया। उन्होंने दावा किया गया कि ‘यह लोकतंत्र के लिए एक और खतरा है।’ उन्होंने कहा, ‘‘कुमार का पुतला जलाने के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई, वह न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि हर मोर्चे पर मौजूदा सरकार के बुरी तरह नाकाम रहने का पक्का सबूत भी है।’’ गोगोई के अलावा, हिरासत में लिए गए लोगों में कांगेस सचिव मनोज चौहान, सेवा दल के अध्यक्ष दीप बयान और प्रदेश कांग्रेस महासचिव उदित भानु दास एवं कई अन्य लोग शामिल हैं।
बुधवार को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्तों-- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों - जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाना और चुनावी मतदाता सूची का डेटा शामिल है - पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए थे। कांग्रेस ने कहा कि इन खुलासों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पार्टी की वे चिंताएं पूरी तरह सही साबित होती हैं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सत्ताधारी भाजपा को ‘अनुचित फायदा’ पहुंचाने के लिए चुनावी मशीनरी पर ‘कब्ज़ा किया जा रहा है और उसमें हेर-फेर की जा रही है।
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