Responsive Scrollable Menu

RBI के संभावित दखल से Forex Market में लौटी मजबूती, 19 पैसे चढ़ा Rupee

वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा में सुधार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप के बीच शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे की बढ़त के साथ 95.80 (अस्थायी) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि स्थानीय आयातकों की ओर से डॉलर की मांग, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने रुपये की बढ़त को सीमित किया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.92 पर खुला।

इसे भी पढ़ें: कच्चे तेल में तेजी और मजबूत US Dollar के बीच रुपया 95.96 के स्तर पर फिसला

कारोबार के दौरान रुपया फिसलकर 95.94 के निचले स्तर तक आ गया, लेकिन बाद में इसने वापसी की और पिछले बंद भाव के मुकाबले 19 पैसे की बढ़त दर्ज करते हुए 95.80 (अस्थायी) पर बंद हुआ। रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 26 पैसे टूटकर 95.99 पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित चरणबद्ध समझौते को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीद तथा वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार से रुपये में बढ़त का रुख बने रहने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और कमजोर डॉलर निचले स्तरों पर रुपये को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, किसी भी नए तनाव से ऊंचे स्तरों पर रुपये पर दबाव आ सकता है। चौधरी के अनुसार हाजिर बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.60 से 96.10 के दायरे में रह सकता है।

इसे भी पढ़ें: US Dollar के मुकाबले Rupee 11 पैसे गिरकर 95.84 के स्तर पर पहुंचा

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत फिसलकर 101.10 पर था। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 105.45 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। कारोबारियों ने कहा कि रुपये के कमजोर होकर 96 के करीब जाने पर रिजर्व बैंक हस्तक्षेप कर सकता है।शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 5,027.36 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

Continue reading on the app

IBC के जरिए अटकी रियल एस्टेट परियोजनाओं के 1.4 लाख Home Buyers को मिली राहत

भारत की दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता (आईबीसी) व्यवस्था ने अटकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं में फंसे 1.4 लाख से अधिक घर खरीदारों को राहत दी है। विश्लेषकों और उद्योग जगत के अधिकारियों के अनुसार आईबीसी के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपर आगे आकर संकटग्रस्त परियोजनाओं को फिर से विकसित कर रहे हैं। अदाणी रियल्टी और लोढ़ा सहित कई बड़ी कंपनियों ने दिवाला समाधान प्रक्रियाओं के जरिये संकटग्रस्त परियोजनाओं का अधिग्रहण किया है या उनका जिम्मा अपने हाथ में लिया है।

इससे वर्षों से रुकी पड़ी परियोजनाओं को नई पूंजी और समय पर पूरा करने की क्षमता मिली है। हालांकि, इस क्षेत्र में चुनौतियां भी काफी हैं। उन्होंने बताया कि आईबीसी के तहत स्वीकार किए गए 553 रियल एस्टेट दिवाला मामलों से लगभग 2.5 लाख घर खरीदार जुड़े हैं, जिनमें केवल 17 प्रतिशत का ही सफलतापूर्वक समाधान हो पाया है।

इसे भी पढ़ें: Ashiana Housing नए प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन खरीदने पर 1000 करोड़ रुपये करेगी निवेश

विभिन्न न्यायिक मंचों पर कार्यवाही जारी रहने के कारण 221 मामलों में अभी भी 1.1 लाख घर खरीदार समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार दिवाला ढांचे के तहत सुलझाई गई परियोजनाएं लगभग 84,000 करोड़ रुपये की हैं, जबकि अन्य 65,000 करोड़ रुपये का निवेश अनसुलझी परियोजनाओं में फंसा हुआ है। वर्ष 2018 में आईबीसी के तहत घर खरीदारों को वित्तीय लेनदार के रूप में मान्यता दी गई थी, जिससे रुकी हुई आवास परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए दिवाला रूपरेखा एक बेहद महत्वपूर्ण जरिया बन गयी।

इसे भी पढ़ें: Delhi: डेटिंग ऐप के जरिए 2.15 लाख रुपये की वसूली करने वाले गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार

विश्लेषकों का कहना है कि इसके बावजूद काम की रफ्तार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहां लंबी कानूनी मुकदमेबाजी और बार-बार अपीलों के कारण अक्सर परियोजनाओं के पूरा होने में देरी होती है। सीबीआरई इंडिया में भूमि एवं पूंजी बाजार के प्रबंध निदेशक निखिल भाटिया ने कहा, आईबीसी के तहत रियल एस्टेट मामलों का समाधान अधिकांश अन्य क्षेत्रों की तुलना में धीमा है और ऐसा ढांचागत कारणों से है। ये परियोजनाएं लंबी अवधि की होती हैं जिनमें घर खरीदारों, ऋणदाताओं और भूमि साझेदारों के कई स्तरों पर दावे होते हैं।

नाइट फ्रैंक के इंटरनेशनल पार्टनर और वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक गुलाम जिया ने कहा, आईबीसी के तहत संकटग्रस्त संपत्तियों का बढ़ता दायरा आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपरों को अधिग्रहण के जरिए विस्तार का अवसर दे रहा है। कुल कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) मामलों में 22 प्रतिशत हिस्सेदारी रियल एस्टेट की है, जो इसे दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनाती है। उन्होंने कहा कि अदाणी, रिलायंस, जेएसडब्ल्यू और प्रेस्टीज जैसे बड़े डेवलपर संकटग्रस्त परियोजनाओं के अधिग्रहण के लिए आगे आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा फंसे हुए घर खरीदारों को मिल रहा है।

Continue reading on the app

  Sports

Hardik Pandya: हार्दिक पंड्या की वापसी फिर टली! अब इस इंजरी ने बढ़ाई टेंशन, ऑस्ट्रेलिया ए सीरीज से बाहर होने का खतरा

Hardik Pandya Return Delayed: हार्दिक पंड्या ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ होने वाली सीरीज से बाहर हो सकते हैं. पंड्या की दाहिनी पिंडली में दोबारा उठे दर्द ने वापसी की योजना पर पानी फेर दिया है. Fri, 25 Sep 2026 23:23:06 +0530

  Videos
See all

27 सितंबर को बैंक खुले या बंद? 28 सितंबर से हड़ताल, जानें क्या है मामला#atm #bankstrike #aajtak #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-25T18:32:28+00:00

Viral Video: खेत मे नजा घुसा ट्रैलर #viral #shorts #trending #ATShorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-25T18:30:57+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers