राजस्थानी स्वाद की पहचान है काचरी, खट्टे-तीखे का ऐसा स्वाद बार-बार करेगा खाने का मन
राजस्थान की पारंपरिक रसोई में कम सामग्री से बनने वाली कई ऐसी देसी रेसिपीज हैं, जिनका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है. काचरी की खट्टी-तीखी सब्जी भी इन्हीं में से एक है. सूखी काचरी को कुछ घंटे भिगोकर सरसों के तेल, राई, जीरा, हींग और देसी मसालों के साथ पकाया जाता है. अंत में अमचूर या काचरी का खट्टा स्वाद को और बढ़ा देता है. सरसों के तेल की खुशबू और मसालों का चटपटा स्वाद इसे खास बनाता है. गरमा-गरम काचरी की सब्जी को बाजरे, मक्के या गेहूं की रोटी के साथ परोसा जा सकता है. यह राजस्थानी देसी खाने का बेहतरीन स्वाद है.
350KM का कर्नाटक-केरल के बीच बिछेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर, फटाक पहुंचेंगे बेंगलुरु से मलप्पुरम
Bengaluru Malappuram Economic Corridor: बेंगलुरु और मलप्पुरम के बीच करीब 350 किलोमीटर का इकोनॉमिक कॉरिडोर कर्नाटक और केरल की कनेक्टिविटी बदल सकता है. भारतमाला परियोजना से जुड़े EC-32 का मकसद सिर्फ सफर आसान करना नहीं है. इसके जरिए माल ढुलाई को तेज करने और दोनों राज्यों के बीच कारोबार बढ़ाने पर जोर है. बेंगलुरु के औद्योगिक सामान और केरल के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सकता है. लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कमी आने की उम्मीद है. रास्ते में आने वाले शहरों को रोजगार और कारोबार के नए मौके मिल सकते हैं. पर्यटन को भी बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिलने की संभावना है.
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