कितने बजे से शुरू होगा टीम इंडिया का अगला मैच, सुबह और शाम में न हों कंफ्यूज, यहां जान लें पूरी डिटेल्स
Team India Next Match Timing : भारतीय क्रिकेट टीम का अलगा मैच कितने बजे से शुरू होगा, इसके बारे में हर इंडियन क्रिकेट फैन जानना चाहता है. टीम इंडिया लगातार दो दिन अलग-अलग समय पर मुकाबले खेलने वाली है. ऐसे में ये दोनों मैच अलग-अलग समय पर होने वाले हैं. टीम इंडिया एक मैच दोपहर से लेकर रात तक खेलेगी तो वहीं, दूसरा मैच सुबह से खेला जाएगा. इसको लेकर फैंस कंफ्यूज हो रहे हैं कि, कौन सा मैच कितने बजे से खेला जाएगा. तो आज हम आपको टीम इंडिया के मैच की टाइमिंग के बारे में बताने वाले हैं. तो आइए जानते हैं कि भारत का अलगा मैच कितने बजे से शुरू होगा.
दरअसल, इन दिनों वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम भारत के दौरे पर आई हुई है. टीम इंडिया के साथ वेस्टइंडीज पहले 3 वनडे मैच और फिर 5 टी20 मैच खेलेगी. वहीं इंडियन मेंस टी20 क्रिकेट टीम इन दिनों जापाना में है, जहां वो एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल के लिए खेलने की तैयारी कर रही है.
— BCCI (@BCCI) September 25, 2026
भारत और वेस्टइंजडीज की सीरीज रविवार से शुरू हो रही है. तो वहीं एशियन गेम्स में अपना पहला मैच टीम इंडिया सोमवार को खेलेगी. वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में कप्तानी शुभमन गिल करते हुए नजर आएंगे तो वहीं, एशियन गेम्स में टीम इंडिया की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है. आइए जानते हैं कि, टीम इंडिया के ये दोनों मैच कितने बजे से शुरू होंगे.
Target defended ????????#TeamIndia seal a nail-biter with a 2-run victory over Japan ????
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Scorecard ▶️ https://t.co/0YhYTwc8HS#TeamIndiaInJapan | #JPNvIND pic.twitter.com/icPNwzOb5s
कितने बजे शुरू होगा टीम इंडिया का अगला मैच
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पहला वनडे मैच 27 सितंबर यानी रविवार को खेला जाने वाला है. इन दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैच की शुरू होने का समय दोपहर 2 बजे है. इस मुकाबले का टॉस 1:30 बजे होगा. यह मुकाबले 50-50 ओवर का है, ऐसे में देर रात लगभग 10 बजे तक खत्म होगा.
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Your favourite duo, ROKO, return as #TeamIndia take on #WestIndies in the ODI series!
Watch them in action #INDvWI 1st ODI ???? SUN, 27th SEP, 1 PM pic.twitter.com/jpCmk134Hc
सुबह होगा टीम इंडिया का ये वाला मैच
टीम इंडिया का सुबह मैच एशियन गेम्स 2026 में होने वाला है. भारतीय क्रिकेट टीम एशियन गेम्स 2026 में अपना क्वार्टर फाइनल मैच सुबह 10 बजे से खेलने वाली है. ये मुकाबला लोकल समय के अनुसार दोपहर 1 बजे से होगा वहीं, इस मुकाबले का प्रसारण भारत में सुबह 10 बजे से शुरू हो जाएगा. टीम इंडिया एशियन गेम्स के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में किससे भिड़ने वाली है. ये अभी तक तय नहीं हुआ है.
Touchdown Tokyo ????
— BCCI (@BCCI) September 21, 2026
All smiles as #TeamIndia has arrived for their historic one-off T20I against Japan and the #AsianGames 2026 campaign ???? pic.twitter.com/GfoJBVVknY
वेस्टइंडीज वनडे सीरीज के लिए भारत का स्क्वाड
शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (उपकप्तान), ध्रुव जुरेल, नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, मोहम्मद सिराज, औकिब नबी, यशस्वी जायसवाल, नमन धीर.
एशियन गेम्स 2026 के लिए टीम इंडिया का स्क्वाड
श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, विपराज निगम, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी, यश ठाकुर.
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उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन से बढ़ी किसानों की कमाई, 80% सब्सिडी से युवाओं को मिला स्वरोजगार का मौका
Uttarakhand Beekeeping: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मधुमक्खी पालन किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया बन रहा है. सरकार की ओर से मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए मधुमक्खी के बक्से और मौनवंश खरीदने पर 80% तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके साथ किसानों और ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इससे राज्य में 10 हजार से ज्यादा किसान और ग्रामीण युवा अब तक सीधे लाभान्वित होने का दावा किया गया है.
पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन और रोजगार के सीमित साधनों के बीच मधुमक्खी पालन किसानों के लिए कम लागत में अतिरिक्त आय का विकल्प बन रहा है. मधुमक्खियों से शहद उत्पादन के साथ फसलों में परागण भी बढ़ता है, जिससे कृषि उत्पादन में मदद मिल सकती है. यही वजह है कि सरकार मौनपालन को खेती और स्वरोजगार दोनों से जोड़कर आगे बढ़ा रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य किसानों को खेती के साथ स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है. उनका कहना है कि मौनपालन के लिए दी जा रही सब्सिडी से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पहाड़ी क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है.
इन योजनाओं के जरिए मिल रही मदद
उत्तराखंड में मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, स्टेट हॉर्टीकल्चर मिशन और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इन योजनाओं के जरिए किसानों को मधुमक्खी के बक्से, मौनवंश और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
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राज्य के कई पर्वतीय जिलों में इसका असर देखने को मिल रहा है. नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी गढ़वाल और चमोली में किसान मधुमक्खी पालन को कारोबार के तौर पर अपना रहे हैं. नैनीताल का ज्याउली क्षेत्र भी मौनपालन के लिए प्रमुख इलाकों में शामिल है.
पहाड़ी शहद की बढ़ रही मांग
उत्तराखंड में तैयार होने वाले शहद की खासियत यहां की प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी है. मधुमक्खियां बुरांश, सरसों, लीची और अलग-अलग जंगली फूलों से पराग इकट्ठा करती हैं. हिमालयी क्षेत्रों में मिलने वाली वनस्पतियों के कारण यहां के शहद को अलग पहचान मिलती है.
राज्य में तैयार शहद की बिक्री हाउस ऑफ हिमालयाज, उत्तराखंड स्टेट ऑर्गेनिक बोर्ड और खादी ग्रामोद्योग के जरिए अलग-अलग बाजारों में की जा रही है. इसके अलावा कुछ बड़ी कंपनियां भी स्थानीय किसानों से शहद खरीद रही हैं. इससे किसानों को अपने उत्पाद के लिए बाजार उपलब्ध होने में मदद मिल रही है.
10 बक्सों से शुरू किया काम, अब 50 से ज्यादा
नैनीताल के मौनपालक रमेश जोशी का कहना है कि उन्हें उद्यान विभाग से 80% सब्सिडी पर मधुमक्खी के बक्से मिले थे. उन्होंने शुरुआत 10 बक्सों से की थी. अब उनके पास 50 से ज्यादा बक्से हैं. उनके मुताबिक, मधुमक्खी पालन से उन्हें हर साल करीब 2 से 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है.
महिला समूहों को भी मिला फायदा
पिथौरागढ़ की महिला समूह से जुड़ी सुनीता देवी के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्र में रोजगार के सीमित विकल्पों के बीच उन्होंने सरकारी योजना के तहत मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली. इसके बाद गांव में ही शहद उत्पादन का काम शुरू किया. उनका कहना है कि अब तैयार शहद सरकारी आउटलेट्स के जरिए बेचा जा रहा है, जिससे परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिली है.
इस तरह मधुमक्खी पालन उत्तराखंड के किसानों के लिए सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है. यह खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी, ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और महिला समूहों के लिए स्थानीय स्तर पर काम का विकल्प भी बन रहा है. सरकार की सब्सिडी, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की कोशिशों के जरिए राज्य में इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
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