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Hair & Care: बालों की समस्या से हैं परेशान तो अपनाएं ये टिप्स, बदलते मौसम में भी बाल नहीं होंगे रफ-ड्राय

Hair & Care: सर्दी के मौसम ने दस्तक दे दी है। सर्दी का मौसम आते ही कई तरह की स्किन रिलेटेड समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे स्किन ड्राई हो जाना, बालों में रूखापन आना या हेयर फालिंग। खासतौर पर बालों के झड़ने की समस्या इस मौसम में बहुत बढ़ जाती है। वास्तव में बालों के झड़ने की सबसे बड़ी वजह तापमान और आर्द्रता में बदलाव होना होता है। इससे बचाव के लिए बदलते मौसम में अपने बालों में हॉट ऑयल मसाज करें। इससे बालों को पोषण मिलता है, जिससे हेयर फॉल कम होता है और बाल बेजान, ड्राय नहीं होते हैं।

ऐसे बनाएं हॉट ऑयल
सबसे पहले एक नॉनस्टिक पैन में थोड़ा पानी डालकर गर्म होने के लिए गैस पर रख दें। फिर अपने बालों की लेंथ और डेंसिटी के हिसाब से कोई भी तेल (अपनी पसंद का) को कांच की कटोरी में निकालें। इसके बाद अब इस कटोरी को पैन में गर्म हो रहे पानी में रख दें। कटोरी को 1 मिनट तक गर्म पानी में डाले रखें। उसके बाद इस गर्म तेल को अपने सिर पर अप्लाई करें।

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ऐसे करें मसाज
ज्यादातर महिलाएं बालों को धोने से पहले उनमें ऑयलिंग करती हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। आपको बता दें, हॉट ऑयल मसाज का असर साफ बालों पर ज्यादा होता है। मसाज करने के लिए सबसे पहले आप फिंगर टिप्स पर गुनगुना तेल लेकर बालों और स्कैल्प पर लगाएं। इसके बाद हल्के हाथों से स्कैल्प की मसाज करें। मसाज करने के बाद पूरे बालों को शावर कैप या फिर टॉवेल से कवर करें और आधे घंटे बाद शैंपू से वॉश करने के बाद लास्ट में कंडीशनर जरूर अप्लाई करें। अगर आपका हेयर फॉल बहुत ज्यादा हो रहा है तो हॉट ऑयल मसाज लेने के बाद बालों को गर्म टॉवेल से स्टीम करें। 

हॉट ऑयल मसाज के फायदे
हेयर ग्रोथ होगी फास्ट

कई महिलाओं की हेयर ग्रोथ बहुत हल्की होती है या कहें बहुत कम होती है। वास्तव में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके हेयर फॉलिकल हेल्दी नहीं होते हैं, जिस कारण हेयर ग्रोथ बहुत कम होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आप सिर पर हॉट ऑयल मसाज कर सकती हैं। इसे आप वीक में दो बार कर सकती हैं।

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बाल नहीं होंगे रफ-ड्राय
सर्दी के मौसम में अकसर पॉल्यूशन बहुत बढ़ जाता है, जिस वजह से वातावरण में धूल-गंदगी भी बढ़ती जाती है। इस कारण बाल काफी रफ और ड्राई हो जाते हैं। ऐसे में बालों पर हॉट ऑयल मसाज करना फायदेमंद है। इसे करने से बालों में नमी बनी रहेगी और इससे बाल ड्राई भी नहीं होंगे।

बाल बने रहेंगे ब्लैक
हॉट ऑयल मसाज करने से बालों के ऊपर एक प्रोटेक्टिव लेयर बन जाती है, जिससे बाल सफेद होने से बचे रहते हैं। इसके अलावा हॉट ऑयल मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, आप स्ट्रेस फ्री फील करती हैं, इससे भी बालों में ब्लैकनेस बनी रहती है।

डैंड्रफ होगा कम
इस सीजन में अनेक महिलाएं डेंड्रफ की समस्या से परेशान रहती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पॉल्यूशन, धूल और गंदगी है। ऐसे में अपने बालों को डेंड्रफ से दूर रखने के लिए भी हॉट ऑयल मसाज फायदेमंद है। इससे बालों को पोषण मिलेगा और स्कैल्प में नमी बनी रहती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी हेयर एक्सपर्ट तर्नुम खान से बातचीत पर आधारित है। haribhoomi.com इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।

हेयर केयर: निकिता चौहान 

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World Diabetes Day: क्या है लाडा डायबिटीज?, यंगस्टर्स पर डाल रहा प्रभाव; ऐसे पहचानें लक्षण

World Diabetes Day: डायबिटीज का एक प्रकार, लाडा डायबिटीज 20-35 साल के अनेक युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। लाडा डायबिटीज, टाइप-1 और टाइप-2 प्रकार के डायबिटीज के बीच की स्टेज है, जो वयस्कों में बहुत धीरे-धीरे विकसित होती है। इसे टाइप 1.5 डायबिटीज और वैज्ञानिक भाषा में  ‘लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट्स’ यानी लाडा कहा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में डायबिटीज के मरीजों में 90 प्रतिशत टाइप 2 डायबिटीज के हैं। 5-10 प्रतिशत मरीज टाइप 1 के होते हैं। एपिडेमियोलॉजिकल स्टडीज के हिसाब से वयस्क लोगों में होने वाली डायबिटीज के 2-12 प्रतिशत मामले लाडा डायबिटीज के होते हैं।

क्या है लाडा डायबिटीज
लाडा, टाइप-1 डायबिटीज की तरह होता है। टाइप-1 में शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। शरीर की एंटीबॉडीज पैंक्रिएज ग्लैंड्स के बीटा सेल्स को खत्म करना शुरू कर देती है। इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और पीड़ित व्यक्ति में डायबिटीज के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। लेकिन लाडा में पैंक्रिएज के बीटा सेल्स  तकरीबन 20 प्रतिशत बचे रहते हैं और वो इंसुलिन का स्राव करते रहते हैं। जिससे लाडा मरीज को टाइप-1 की तरह शुरू में इंसुलिन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। बढ़े हुए ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए उन्हें ड्रग्स दी जाती हैं। पैंक्रिएज के बचे हए बीटा सेल्स और इंसुलिन के स्राव की प्र्रक्रिया धीरे-धीरे कम होती जाती है। डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए ली जाने वाली दवाइयों का असर कम होता जाता है। इसे ओरल एंटीडायबिटिक ड्रग (ओएडी) फैल्योर कहा जाता है। तब लाडा ग्रस्त मरीज को इंसुलिन शॉट्स की जरूरत पड़ती है, जो  जिंदगी भर चलते हैं।

क्या है नुकसान
ब्लड में ग्लूकोज का उच्च स्तर, शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। कंट्रोल ना होने पर हार्ट अटैक, नजर का धुंधलापन, नसों को नुकसान, गंभीर इंफेक्शन और किडनी फैल्योर जैसी समस्या हो सकती हैं। आईसीएमआर के आंकड़ों के हिसाब से डायबिटीज के 16.3 प्रतिशत मरीजों को हाइपरटेंशन, 44 प्रतिशत मरीजों को हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा रहता है।

कैसे पहचानें
चूंकि लाडा के लक्षण डायबिटीज के दूसरे प्रकारों के समान होते हैं। इसलिए मरीज में लाडा डायबिटीज की पहचान लक्षणों के आधार पर कर पाना काफी कठिन होता है।  बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, वजन कम होना, चिड़चिड़ापन, पेशाब या शरीर में इंफेक्शन होना, जो लंबे समय तक ठीक नहीं हो पाता। डायबिटीज से पीड़ित लोग, जो दुबले-पतले हैं और शारीरिक रूप से सक्रिय हैं। लेकिन उनका वजन बिना प्रयास के कम हो रहा हो। अगर उन्हें दी जाने वाली दवाइयों का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है और इंसुलिन की जरूरत पड़ रही है। ये लक्षण लाडा के हो सकते हैं।

डायग्नोसिस
ओरल एंटीडायबिटिक ड्रग (ओएडी) फैल्योर यानी डायबिटीज कंट्रोल की दवाइयां बेअसर होने, साथ ही परहेज और नियमित एक्सरसाइज करने के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं हो रही है तो मरीज को लाडा डायबिटीज के टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए। लाडा जांच के लिए एंटीबॉडी टेस्ट- एंटी गैड, एंटी इंसुलिन और सी-वेपटाइड एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं। मरीज के वजन और मेडिसिन के लिए बॉडी-रिस्पांस को देख कर लाडा डायबिटीज का पता लगाया जाता है। स्थिति के हिसाब से उपचार किया जाता है।

क्या है उपचार
मरीज की स्थिति के हिसाब से इलाज किया जाता है।  ब्लड शुगर कंट्रोल करने और नॉर्मल जिंदगी जीने के लिए दिन में इंसुलिन शॉट्स के 2-4 डोज़ भी लेने पड़ते हैं। ऐसा ना करने पर उसके शरीर में कीटोंस बन जाते हैं, ऐसिटोसिस की स्थिति आ जाती है जिससे उसे बेहोशी आने लगती है, जिंदगी को खतरा भी हो सकता है।  

बरतें सावधानी

  • इसे नियंत्रित रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है।
  • हर 3 घंटे में थोड़ी मात्रा में कुछ ना कुछ जरूर खाएं, जिससे एनर्जी लेवल मेंटेन रहे। ज्यादा लंबा गैप आने पर शरीर में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है और कमजोरी महसूस होने लगती है।
  • डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन शॉट्स लेते रहें, ताकि शुगर कंट्रोल में रहे और जान को खतरा ना हो।
  • कोई अन्य बीमारी होने की स्थिति में मरीज को 20 प्रतिशत ज्यादा इंसुलिन लेने की जरूरत होती है क्योंकि बीमारी में शुगर लेवल बढ़ जाता है।
  • किसी कारणवश उल्टियां हो रही हों, तब भी इंसुलिन की डोज जरूर लेनी चाहिए। खाना ना खा पाएं तो मरीज को जूस या पानी में ग्लूकोज़ मिलाकर ले सकते हैं।

 यह जानकारी डॉ. अशोक झिंगन चेयरमैन-दिल्ली डायबिटीज रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली से बातचीत पर आधारित है।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ, डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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एथलेटिक्स और स्क्वॉश में भारत की बल्ले-बल्ले, एक ही दिन में जीते 7 मेडल, बॉक्सिंग में 3 पदक पक्के

India at Asian Games Day 9 Roundup: भारत ने रविवार को एशियाई खेलों में 7 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया. एथलेटिक्स में पारुल चौधरी ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में कांस्य पदक जीता, जबकि एनसी सोजन और सर्वेश कुशारे ने रजत पदक हासिल किए. तेजास्विन शंकर और हरिता भद्रा ने भी कांस्य पदक अपने नाम किए. स्क्वाश में अनाहत सिंह और अभय सिंह ने ऐतिहासिक रजत पदक जीते. बॉक्सिंग में तीन पदक पक्के हुए, हालांकि बैडमिंटन में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई. Sun, 27 Sep 2026 22:57:32 +0530

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