World Alzheimer Day 2026: भूलने की आदत को न करें नजरअंदाज, ये हैं अल्जाइमर के 5 शुरुआती लक्षण
आज यानी 21 सितंबर 2026 को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। दरअसल, अल्जाइमर एक ऐसी प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो आपकी धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य भूलने की आदत जैसे लग सकते हैं, इसलिए लोग ज्यादातर इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
हालांकि, आपको यह समझना होगा कि हर एक भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं होती है और सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करें। विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर जाने इसके शुरुआती 5 संभावित लक्षण, किन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और जीवनशैली में किन बातों को अपनाकर मस्तिष्क की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
बार-बार चीजें भूलना
अक्सर किसी का नाम या कोई छोटी बात भूल जाना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि आप हाल में हुईं बातचीत, जरुरी जानकारी या रोज की घटनाओं को बार-बार भूल रहे हैं, तो आप इसे नजरअंदाज न करें। भूलने की समस्या को धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो इसका असर डेली लाइफ के जीवन पर पड़ने लगेगा।
रोजमर्रा के कामों में परेशानी
अल्जाइमर के लक्षणों में से एक व्यक्ति को उन कामों को करने में भी परेशानी होती है, जो कि लंबे समय तक आसानी से करता आया है। जैसे कि बिलों का भुगतान करना, खाना बनाना, दवाइयां समय पर लेना या किसी सामान्य काम के चरणों को याद रखना। यदि आपको इस तरह की दिक्कत बढ़ रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरुर लें।
सही शब्द खोजने में दिक्कत
जब हम किसी से बातचीत करते हैं, तो उस दौरान सही शब्द न आना या किसी परिचित चीज का नाम बताने में परेशानी होना। व्यक्ति अपनी बात को समझाने के लिए बार-बार दूसरे शब्दों का इस्तेमाल कर सकता है या एक ही बात को दोहरा सकता है। बातचीत के दौरान विषय समझने और उसे आगे बढ़ाने में काफी परेशान हो सकती है।
समय और जगह को लेकर भ्रम
कई बार देखा गया है कि अल्जाइमर से प्रभावित व्यक्ति को दिन, तारीख या समय को लेकर भ्रम हो सकता है। कभी-कभी वह परिचित जगह पर भी रास्ता भूल जाता है या फिर यह समझने में काफी परेशानी हो सकती है कि वह किसी पर क्यों आया है। जब ऐसा बार-बार होने लगे, तो नजरअंदाज न करें।
व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव
याददाश्त से संबंधित बदलावों के साथ व्यक्ति के व्यवहार और रुचियों में भी परिवर्तन दिखाई दे सकता है। इसलिए पहले पसंद की जाने वाली गतिविधियों से दूरी बनाने लगे, लोगों से मिलने-जुलने में रुचि कम जाए या बिना स्पष्ट कारण के अधिक चिंता होना, भ्रमित या चिड़चिड़ा होना। इस तरह के बदलाव लगातार देखने को मिलते हैं।
अल्जाइमर से बचाव के लिए क्या करें?
असल में अल्जाइमर को पूरी तरह रोकने की गारंटी देने वाला कोई एक उपाय नहीं है। लेकिन, मस्तिष्क और हृदय की हेल्थ का ध्यान रखना काफी जरुरी माना जाता है। इसलिए आप रोजाना शारीरिक एक्टिविटीज करें, पर्याप्त नींद लें, संतुलित आहार लें और सामाजिक रुप से एक्टिव रहे। इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों को नियंत्रति रखना भी जरुरी है।
धूम्रपान न करने वालों में Lung Infection का खतरा, जानिए फेफड़ों के संक्रमण की मुख्य वजहें
आजकल खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियों की समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। धूम्रपान को फेफड़ों की कई बीमारियों को मुख्य जोखिम कारक माना जाता है। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते है, उन्हें लंग इंफेक्शन नहीं हो सकता है।
आज के समय में फेफड़ों का संक्रमण किसी भी एज के व्यक्ति को हो सकता है। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकता है।
लंग इंफेक्शन की स्थिति में कुछ कॉमन लक्षण नजर आते हैं। इसलिए धूम्रपान न करने के बावजूद यदि सांस से संबंधित लक्षण लगातार बने रहें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।
लंग इंफेक्शन के मुख्य कारण
वायरल इंफेक्शन: फ्लू, COVID-19 और अन्य सांस संबंधित वायरस फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। बैक्टीरिया इंफेक्शन वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
बैक्टीरियल इंफेक्शन: कुछ बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण पैदा करते हैं, जैसे कि निमोनिया जैसी समस्या हो सकती है। इसमें तेज बुखार, लगातार खांसी और सीने में दर्द की समस्या देखने को मिलती है।
फंगल इंफेक्शन: अक्सर कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को फंगल संक्रमण का खतरा अधिक होता है। लंबे समय से चलने वाली खांसी, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी है, तो इसके यह संभावित लक्षण।
कमजोर इम्यून सिस्टम: जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें संक्रमण होने की संभावना बनीं रहती हैं। डायबिटीज, लंबे समय से चल रही कुछ बीमारियों या कुछ दवाओं के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे फेफड़ों में संक्रमण होने के चांस हो सकते हैं।
वायु प्रदूषण: काफी समय से प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर बुरा असर देखने को मिलता है। इससे सांस की तकलीफ और अन्य श्वसन समस्याओ का जोखिम बढ़ सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: यदि आपको संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूदों के जरिए फैल सकती है।
लंग इंफेक्शन के लक्षण
- खांसी
- बलगम
- बुखार
- ठंड लगना
- सांस फूलना
- सीने में दर्द
- थकान
- कमजोरी
- सांस लेने में तकलीफ
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
जब आपको ऊपर बताए गए लक्षणों का एहसास होने लगें, तो एक बार डॉक्टर को जरुर दिखाएं। इतना ही नहीं, बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में विशेष सावधानी देखने को मिलती है।
बचाव कैसे करें?
- हाथों की स्वच्छता रखें
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सावधानी बरतें
- घर और कार्यस्थल में वेंटिलेशन अच्छा रखें
- प्रदूषण और धूल के अनावश्यक संपर्क से बचें
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही टीकारकरण करवाएं।
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