चांदी ₹2,346 गिरकर ₹2.35 लाख किलो पर आई:सोने के दाम आज ₹671 कम हुए, 10 ग्राम 1.53 लाख का हुआ
सोने-चांदी के दाम में आज यानी 21 सितंबर को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 671 रुपए घटकर 1.53 लाख रुपए पर आ गया है। एक किलो चांदी की कीमत 2,346 रुपए कम होकर 2.35 लाख रुपए पर आ गई है। इस साल सोना ₹20 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 20 हजार रुपए महंगा हो चुका है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.53 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.35 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। दिसंबर तक सोना 1.70 लाख और चांदी 3 लाख रुपए तक पहुंच सकती है कोटक सिक्युरिटीज के सीनियर वीपी एंड कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी कहते हैं कि सोने को आम निवेशकों के साथ ही दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों जैसे आरबीआई का भी सपोर्ट हासिल है, जो लगातार सोना खरीद रहे हैं। आगे मुश्किल हालात में भी सोने में तेजी बनी रहेगी। यदि हालात सुधरे तो चांदी में भी उछाल दिख सकता है। अभी जो भावी हालात नजर आ रहे हैं, उसके मुताबिक दिसंबर तक सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। चांदी की कीमत भी 3 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
प्याज 3 महीने में 82% महंगी, ₹30 से ₹54 किलो:महाराष्ट्र-कर्नाटक से प्याज की सप्लाई में कमी आई; कीमतें जल्द कम होने के आसार
जून-सितंबर के दौरान देश में प्याज की कीमतें तेजी से उछलीं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा भाव 29.50 रुपए प्रति किलो था। 17 सितंबर को यह बढ़कर 53.78 रुपए प्रति किलो हो गया। यानी करीब साढ़े तीन महीने में ही प्याज की कीमतों में 82.3% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। थोक बाजारों में तेजी और भी ज्यादा रही। 1 जून को थोक बाजार में प्याज का औसत भाव 22.60 रुपए किलो था। 10 सितंबर को यह 46.20 रु. हो गया, फिर 17 सितंबर को 45.68 रु. दर्ज किया गया। जून के मुकाबले प्याज के थोक भाव करीब दोगुने हो गए हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की फसल खराब होने और आवक घटने से कीमतें बढ़ी हैं। कर्नाटक से भी सप्लाई कम हुई है। नई खरीफ फसल की आवक में देरी से भी बाजार में प्याज की कमी बनी हुई है। हालांकि, जल्द ही कीमतें कम होने की उम्मीद है। प्याज के दाम घटाने के सरकारी कदम और असर बफर स्टॉक से राहत: सरकार सस्ते में खरीदा प्याज जमा रखती है और दाम बढ़ते ही इसे ₹35 किलो जैसी सस्ती दरों पर बाजार में उतार देती है ताकि आम जनता को राहत मिले। एक्सपोर्ट पर रोक-टोक: देश में किल्लत होने पर सरकार प्याज के निर्यात पर टैक्स या रोक लगाती है, जिससे देश के अंदर प्याज की कमी न हो। आम आदमी पर असर: सरकारी प्याज से कुछ हद तक जेब पर बोझ कम होता है, लेकिन खुदरा बाजार में दाम ज्यादा होने और नीतियों के बार-बार बदलने से पूरी राहत नहीं मिल पाती। साल के इस समय क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम? हर साल अगस्त से सितंबर के दौरान प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण होते हैं: त्योहारी सीजन में मांग का बढ़ना: रक्षाबंधन, गणेश उत्सव और आगामी त्योहारों के कारण खपत बढ़ती है। मौसम और लॉजिस्टिक्स: बारिश की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित होती है और मंडियों तक माल देरी से पहुंचता है। फसल का चक्र: पुरानी फसल का स्टॉक खत्म होने लगता है और नई खरीफ फसल आने में थोड़ा समय होता है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मंडी में प्याज 9 दिन में 9% सस्ती हुई:सरकार ₹35 किलो बेच रही, रिटेल मार्केट में ₹53.92 किलो पहुंची देशभर की मंडियों में पिछले 9 दिन में प्याज की थोक कीमतें 9% तक गिर गई हैं। इससे आने वाले दिनों में रिटेल मार्केट में भी ये सस्ती हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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