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इटली में बुर्का और नकाब पर बैन लगेगा:अभी दुनिया के 24 देशों में रोक; स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी कम होगी

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को कहा कि इस संबंध में कैबिनेट जल्द प्रस्ताव पर फैसला लेगी। मेलोनी ने कहा कि स्कूलों में चेहरा ढका नहीं होना चाहिए और किसी पर परंपरा के नाम पर चेहरा ढकने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित रखने की भी योजना है। प्रस्तावित नियमों के तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता को इटैलियन भाषा सीखनी होगी, जिनके बच्चों को स्कूल में घुलने-मिलने और इटली की शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने में दिक्कत हो रही है। बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने वाला इटली पहला देश नहीं होगा। फ्रांस और चीन समेत दुनिया के करीब 24 देशों में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लागू हैं। इटली में 50 साल से चेहरा ढकने पर प्रतिबंध इटली में चेहरा ढकने को लेकर 1975 से कानून है। इसके तहत सार्वजनिक जगहों पर इस तरह चेहरा ढकना मना है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान न हो सके। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है। 2008 के एक कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या सांस्कृतिक वजह से चेहरा ढकता है, तो सिर्फ इसी वजह से उसे कानून तोड़ने वाला नहीं माना जाएगा। मामले की परिस्थितियों को भी देखा जाएगा। अब मेलोनी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर अलग से रोक लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद में भेजा जाएगा। इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी मिलना जरूरी होगा। इटली में मेलोनी से भी ज्यादा दक्षिणपंथी नेता की एंट्री इटली में अगले साल 2027 में आम चुनाव होने हैं। इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से आने वाले लोगों का मुद्दा वहां पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) को अब नेशनल फ्यूचर (FN) से चुनौती मिल रही है। यह पार्टी मेलोनी की पार्टी से भी ज्यादा सख्त इमिग्रेशन नीति की मांग करती है। FN ने इसी साल जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की मांग की थी। यानी जिस मुद्दे पर अब मेलोनी सरकार कानून लाने जा रही है, उस पर उनसे भी ज्यादा सख्त रुख रखने वाली पार्टी पहले ही दबाव बना रही थी। यूरोपीय अदालत ने बुर्का पर बैन को सही ठहराया यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स फ्रांस और बेल्जियम में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का-नकाब पर रोक को सही ठहरा चुका है। फ्रांस में 2014 और बेल्जियम में 2017 के फैसले में अदालत ने कहा था कि लोगों के बीच मेलजोल बनाए रखना ऐसी रोक का आधार हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इसका विरोध किया है। इटली के स्कूलों में 9.3 लाख विदेशी छात्र रिसर्च इंस्टीट्यूट फोंडाजियोने ISMU के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख ऐसे छात्र पढ़ते हैं, जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। यानी स्कूलों में पढ़ने वाले हर 100 छात्रों में करीब 12 विदेशी नागरिकता वाले हैं। इन बच्चों की संख्या के बावजूद, इटली में विदेशी नाबालिगों की कुल आबादी पिछले 10 साल में करीब 4.5% कम हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में विदेशी नागरिकता वाले बच्चों की कुल संख्या में कमी आई है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी:सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड, लगातार 1413 दिन से सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर पढ़ें…

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रूसी संसदीय चुनाव में पुतिन समर्थक पार्टी जीती:यूक्रेन जंग के बाद पहला चुनाव; जानिए रूसी राष्ट्रपति के लिए बहुमत क्यों जरूरी

रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक यूनाइटेड रशिया पार्टी ने जीत हासिल कर ली है। शुरुआती नतीजों में पार्टी ने 57.5% वोट के साथ अजेय बढ़त बना ली है। चुनाव के आधिकारिक नतीजे अभी आने बाकी हैं। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। पुतिन ने चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन से जोड़कर पेश किया था। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटें जीती थीं। स्टेट ड्यूमा रूस की संसद का निचला सदन है। इसमें कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी को मिले वोट के आधार पर और 225 सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में सीधे चुनाव से तय होती हैं। स्टेट ड्यूमा को आसान भाषा में जानिए सवाल 1: स्टेट ड्यूमा क्या है? जवाब: स्टेट ड्यूमा रूस की संसद का निचला सदन है। इसमें 450 सांसद होते हैं। इसे आसान भाषा में भारत की लोकसभा जैसा समझ सकते हैं। सवाल 2: इसका सबसे बड़ा काम क्या है? जवाब: स्टेट ड्यूमा में देश के कानून बनाए जाते हैं और पुराने कानूनों में बदलाव किया जाता है। सांसद किसी कानून पर चर्चा करते हैं और फिर वोटिंग होती है। सवाल 3: क्या ड्यूमा सरकार से सवाल कर सकता है? जवाब: हां। सांसद सरकार और मंत्रियों से उनके काम और नीतियों पर सवाल पूछ सकते हैं। सरकार को ड्यूमा के सामने जवाब देना होता है। सवाल 4: क्या ड्यूमा का बजट में भी रोल है? जवाब: हां। सरकार का बजट ड्यूमा में पेश किया जाता है। सांसद इस पर चर्चा करते हैं और इसे मंजूरी देने के लिए वोट करते हैं। सवाल 5: पुतिन के लिए ड्यूमा क्यों अहम है? जवाब: राष्ट्रपति पुतिन की सरकार को कई कानूनों और नीतियों के लिए संसद की जरूरत होती है। ड्यूमा में पुतिन समर्थक दलों का बहुमत होने से सरकार के लिए अपने प्रस्ताव पास कराना आसान हो जाता है। यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली पार्टी चुनाव से बाहर रूस की युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको को इस बार पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं को अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। रूस में इस चुनाव में 56.66% लोगों ने वोट डाला। मॉस्को में मतदान रिकॉर्ड स्तर पर रहा। पुतिन ने सैनिकों के नाम पर वोट मांगा चुनाव से पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लोगों से यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन में वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों का वोट सैनिकों के समर्थन को दिखाएगा। पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदस्य नहीं राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के सदस्य नहीं हैं। हालांकि, वे 2008 से 2012 तक पार्टी के चेयरमैन रह चुके हैं। उस समय भी वे पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं थे। यूनाइटेड रशिया के नियमों के मुताबिक, पार्टी का चेयरमैन होना जरूरी नहीं कि उसकी सदस्यता से जुड़ा हो। इसलिए पुतिन पार्टी के सदस्य बने बिना भी इसके चेयरमैन रहे। 2012 में पुतिन ने पार्टी चेयरमैन का पद छोड़ दिया। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव को पार्टी का चेयरमैन बनाया गया। पुतिन ने खुद सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने यूनाइटेड रशिया की सदस्यता क्यों नहीं ली। इसलिए इसके पीछे किसी खास राजनीतिक रणनीति को वजह बताना सही नहीं होगा। चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को पर यूक्रेन का ड्रोन हमला रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन रविवार को यूक्रेन ने मॉस्को और आसपास के इलाकों में 1,600 से ज्यादा ड्रोन भेजे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, इनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हुई। इनमें एक 44 साल की महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, हमले में राजधानी की एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा है। रिफाइनरी में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। एक ड्रोन 21 मंजिला अपार्टमेंट से टकरा गया, जिससे इमारत में आग लग गई। इसके बाद करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें 70 बच्चे भी शामिल थे मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी में लगी आग से उठता धुआं। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले में रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… मेलोनी बोलीं- इटली में बुर्का और नकाब पर बैन लगाएंगे:अभी दुनिया के 24 देशों में रोक; कहा- स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित होगी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को कहा कि कैबिनेट जल्द इस पर फैसला लेगी। इसके अलावा उन्होंने बताया कि स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित रखी जाएगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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Women’s UPL 2026: देहरादून वॉरियर्स बनी उत्तराखंड प्रीमियर लीग की चैंपियन, फाइनल में मसूरी क्वींस को दी मात

Women's UPL 2026: विमेंस उत्तराखंड प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल मैच देहरादून वॉरियर्स और मसूरी क्वींस की टीमें के बीच खेला गया. इस मैच में देहरादून वॉरियर्स ने 15 रनों से बाजी मारी. Fri, 25 Sep 2026 00:03:09 +0530

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