सोमवार को दावोस में आयोजित 56वें विश्व आर्थिक मंच में असम ने पहली बार भाग लिया और खुद को भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य और हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और पर्यटन निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया। दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनसे "उभरते राज्य और उभरती अर्थव्यवस्था" में निवेश करने का आग्रह किया।
मंच के दौरान एएनआई से बातचीत में सरमा ने कहा कि असम पहली बार दावोस में विश्व आर्थिक मंच में भाग ले रहा है। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि असम अब एक उभरता हुआ राज्य और उभरती अर्थव्यवस्था है। जब आप भारत में निवेश करने के बारे में सोच रहे हों, तो आप असम को एक संभावित गंतव्य के रूप में विचार कर सकते हैं। असम अब आधिकारिक तौर पर देश का सबसे तेजी से विकसित हो रहा राज्य है।
असम पहली बार दावोस विश्व आर्थिक मंच में भाग ले रहा है, जिसका उद्देश्य यह संकेत देना है कि यह भारत के भीतर एक उभरती अर्थव्यवस्था और एक व्यवहार्य निवेश गंतव्य है। आरबीआई के हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य अब देश में सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने आंकड़े जारी किए हैं, और यह स्पष्ट रूप से स्थापित है कि असम तेजी से विकास कर रहा है, और हम इस मामले में शीर्ष पर हैं। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से लोग भारत में निवेश करना चाहेंगे। कल ही, आईएमएफ ने भारत के विकास अनुमान को 7 प्रतिशत से ऊपर संशोधित किया है। भारत के भीतर, मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि लोग विभिन्न राज्यों, विभिन्न क्षेत्रों की ओर रुख करें और उन क्षेत्रों की क्षमता का भी दोहन करें। मुझे लगता है कि असम निवेश के लिए एक अच्छा मंच प्रदान कर सकता है।
आईएमएफ ने भारत के विकास अनुमान को 7 प्रतिशत से ऊपर संशोधित किया है। भारत के भीतर, अब समय आ गया है कि निवेशक पारंपरिक केंद्रों से परे देखें और असम जैसे विविध क्षेत्रों का पता लगाएं। पिछले वर्ष के एडवांटेज 2 शिखर सम्मेलन में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। इसमें से लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है - भूमि आवंटित की जा चुकी है और परियोजनाएं चल रही हैं। सौर ऊर्जा संयंत्र और पाम स्टोरेज परियोजना सहित नए प्रस्ताव सामने आ रहे हैं।
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बांग्लादेश में कुछ बड़ा होने वाला है। जिसकी भनक भारत को लगते ही ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हो चुका है। जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा के रख दी है। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस अब भारत के खिलाफ कौन सी साजिश रच रहे हैं जिसकी पोल खुलते ही भारत ने अपनी तैयारियों को पूरा कर लिया है। बांग्लादेश में चुनाव होने में बस कुछ ही दिनों का वक्त बचा है। जिस चुनाव को टालने के लिए यूनुस ने बांग्लादेश को आग में झोंका। हर पैतरे अपनाए। कट्टरपंथियों की फौज को भारत के खिलाफ खड़ा कर दिया ताकि वह बांग्लादेश की कुर्सी में बैठे हुए चीन पाकिस्तान से अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखें और यह चुनाव ना हो पर सब कुछ धरा का धरा रह गया और अब चुनाव की सुगबुगाहट के बीच में भारत ने वो एक्शन लिया है। बांग्लादेश में जिसने यूनुस को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने बांग्लादेश को नॉन फैमिली यानी परिवार के साथ ना भेजे जाने वाले राजनयिक तैनाती स्थल के रूप में दर्ज करने का फैसला ले लिया है। इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश में तैनात किए जाने वाले भारतीय राजनयिक और अधिकारी अब अपने पति या फिर पत्नी या फिर अपने बच्चों के साथ या फिर अपने परिवार के साथ उन्हें बांग्लादेश नहीं ले जा सकेंगे। अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने नॉन फैमिली की यह श्रेणी सिर्फ कुछ ही देशों पर लागू की थी जिसमें इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान शामिल है। इस ताजा फैसले के बाद बांग्लादेश को भी इसी सूची में शामिल कर लिया गया है।
जानकारी के मुताबिक यह फैसला 1 जनवरी से लागू हो गया है।
बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया कि उनके पति या फिर पत्नी और बच्चों को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें इसके लिए अतिरिक्त 7 दिन का समय भी दिया गया था। जिसके परिणाम स्वरूप पिछले गुरुवार यानी कि 15 जनवरी तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को बेहद कम समय के नोटिस पर भारत लौटना पड़ा है। हालांकि बता दें कि भारत के विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस फैसले को लेकर कोई भी सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। भारत के इस फैसले से बांग्लादेश में कैसे भूचाल ला दिया है और कैसे एक तीर से कई निशाने भेद कर दिए गए हैं। पहला यूनुस की साजिश को पूरी तरीके से फ्लॉप कर दिया गया है क्योंकि चुनाव से पहले कट्टरपंथी वामपंथी ब्रिगेड पूरी तरीके से बांग्लादेश में एक्टिव है।
बांग्लादेश में चुनाव ना हो और चुनाव में अड़चन आए इसके लिए यूनुस हिंदुओं और भारतीय राजनीतिकों को टारगेट करवा सकता था। ऐसे में भारत ने पहले ही खतरे की आहट को परख लिया और यूनुस की साजिश को पूरी तरह से धराशाई करने के लिए यह फैसला लिया। दूसरा एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि भारत का यह कदम बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा की स्थिति और खराब होने की आशंकाओं के कारण उठाया गया है।
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