'अमेरिका-चीन के बीच स्वस्थ और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा हो', व्हाइट हाउस में ट्रंप से बोले राष्ट्रपति जिनपिंग
वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों देशों के रिश्तों और भविष्य की प्रतिस्पर्धा को लेकर अहम संदेश सामने आया. व्हाइट हाउस में हुई बैठक में जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को टकराव में बदलने के बजाय स्वस्थ और नियंत्रित रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ने की होड़ करनी चाहिए, न कि ऐसी कुश्ती में उतरना चाहिए जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार तय हो.
जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन नियमित और गहन बातचीत के जरिए एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है. चीनी राष्ट्रपति ने विदेश नीति, अर्थव्यवस्था, वित्तीय सहयोग, कानून-व्यवस्था और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संवाद बढ़ाने की बात कही.
‘टकराव से दोनों देशों का नुकसान’
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका दुनिया की दो बड़ी शक्तियां हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग से फायदा हो सकता है, जबकि टकराव की स्थिति में दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा. उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और स्थिर रिश्तों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे स्वस्थ और सीमित दायरे में रखा जाना चाहिए. जिनपिंग ने सैन्य स्तर पर भी संवाद और संकट की स्थिति में संचार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई, ताकि गलतफहमी संघर्ष में न बदले.
‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बचने की बात
चीनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का भी जिक्र किया. यह अवधारणा उस जोखिम को दर्शाती है जिसमें किसी उभरती शक्ति और मौजूदा प्रभावशाली शक्ति के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा तनाव और संघर्ष का कारण बन सकती है. जिनपिंग ने कहा कि इस तरह के जोखिम को टाला जा सकता है.
ट्रंप और जिनपिंग की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक प्रभाव जैसे कई मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है. दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के साथ-साथ रणनीतिक मतभेद भी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा रहे हैं. जिनपिंग के बयान से यह संकेत मिला कि बीजिंग अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उसे नियंत्रित और संवाद आधारित रखने पर जोर दे रहा है. वहीं, बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दोनों देशों के फैसलों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ता है.
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