Bihar CS Pratyaya Amrit ने DMs और SPs के साथ की बैठक, Crime Free Bihar बनाने के दिए सख्त निर्देश
पटना- राज्य में कानून-व्यवस्था, जन सुरक्षा और सुशासन को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस समीक्षा सत्र में राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs), पुलिस अधीक्षकों (SPs) की अनिवार्य भागीदारी रही। 'अपराध मुक्त समाज' के मुख्य लक्ष्य के साथ, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व को एक स्पष्ट और सख्त संदेश दिया: “प्रशासन के 'इकबाल' से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कानून हाल में कायम रहना चाहिए और जमीन पर तुरंत बदलाव दिखने चाहिए।”
बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय और रणनीतिक निर्देश:
इसे भी पढ़ें: Kosi बाढ़ प्रबंधन और Buxar Bhagalpur Expressway में तेजी लाएं, Bihar CM का निर्देश
1. अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और सख्त फील्ड मॉनिटरिंग
* मुख्य सचिव ने रेखांकित किया कि अपराधियों में कानून का डर होना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि शिथिल कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
* पुलिस अधीक्षक (SP) बल के वास्तविक लीडर के रूप में कार्य करें और अपने-अपने जिलों की कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी लें।
* सघन गश्त और फील्ड विजिट बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमंडल स्तर तक कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है।
* बैठक में निर्देश दिया गया कि खराब प्रदर्शन करने वाले या गैर-गंभीर पुलिस अधिकारियों को उनके पदों से तुरंत हटाया जाए और उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
2. त्वरित कार्रवाई और रिपोर्टिंग व्यवस्था
* सड़कों पर एक्टिव रहे पुलिस: पुलिस इकाइयों को हमेशा गतिशील और अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। अपराधियों पर नकेल कसने के लिए रणनीतिक स्थानों पर तुरंत चेकपोस्ट लगाए जाएं।
* त्वरित कार्रवाई की मिसाल: मुख्य सचिव ने हालिया घटनाओं में पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि "जमुई पुलिस ने तत्परतापूर्वक कार्य कर एक उदाहरण पेश किया है", जिसका अनुसरण अन्य जिलों को भी करना चाहिए।
* अधिकारियों द्वारा फील्ड विजिट : रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए मुख्यालय के पुलिस अधिकारियों को जिलों के साथ टैग किया जाएगा जिन्हें जिलों में जा कर फील्ड विजिट के साथ साथ वही पर रात्रि विश्राम करने का निर्देश दिया गया है ताकि जमीनी हकीकत पर पैनी नजर रखी जा सके।
3. आगामी त्योहारों को लेकर विशेष सतर्कता
* आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए सभी DMs और SPs को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा में कोई ढील न छोड़ने के आदेश दिए गए हैं।
इसे भी पढ़ें: Maithili Thakur बोलीं- बिहार में सुरक्षित हूं, तो भड़के लेखक Neeraj Pandey ने याद दिला दी जमीनी हकीकत!
4. फेक न्यूज पर त्वरित कानूनी कार्रवाई
* सामाजिक सद्भाव या शांति भंग करने के उद्देश्य से फैलाई जाने वाली भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने 'रैपिड एक्शन पॉलिसी' अपनाई है। फेक न्यूज को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उच्च स्तरीय बैठक के समापन पर, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दोहराया कि प्रत्येक जिले के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के कामकाज का मूल्यांकन उनकी त्वरित प्रतिक्रिया, जनता से मिलने वाले फीडबैक और धरातल पर दिखने वाली सुरक्षा के आधार पर लगातार किया जाएगा।
Akash Missile System Scientist Dr Ramarao | आकाश को बनाने वाले प्रह्लाद रामराव की कहानी | Matrubhoomi
दोनों तरफ तनाव बराबर बना था। 8-9 मई की दरमियानी रात सीमा पार से आए पाकिस्तानी ड्रोन्स और मिसाइलों ने भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश में लगे थे। तब आसमान में भारत का अभेद्य रक्षा कवच बनकर उभरा स्वदेशी मिसाइल सिस्टम ‘आकाश’। सेकंडों के भीतर दुश्मन के हर हवाई खतरे को भांपना और सटीक प्रहार से उन्हें हवा में ही नेस्तनाबूद कर देना, आकाश ने न केवल अपनी अचूक मारक क्षमता साबित की, बल्कि यह भी दिखा दिया कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता कितनी घातक और तैयार है। लेकिन किसी भी हथियार की ताकत सिर्फ उसकी धातु या बारूद में नहीं, बल्कि उसके पीछे काम करने वाले वैज्ञानिक दिमाग में होती है। देश की सुरक्षा का यह मजबूत स्तंभ यूं ही नहीं खड़ा हुआ। इसके मूल में वर्षों की अथक तपस्या और एक असाधारण वैज्ञानिक डॉ. प्रहलाद रामाराव की दूरदर्शिता शामिल है। कर्नाटक की माटी से निकले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस दिग्गज वैज्ञानिक ने भारत के मिसाइल कार्यक्रम को नई दिशा दी। डॉ. रामाराव के नेतृत्व और तकनीकी सूझबूझ का ही नतीजा है कि भारत ने जमीन से हवा में मार करने वाली ऐसी स्वदेशी प्रणाली विकसित की, जो आज हर आसमानी चुनौती का माकूल जवाब बन चुकी है। आकाश मिसाइल सिस्टम की यह सफलता केवल एक सैन्य अभियान की विजय नहीं है, बल्कि यह डॉ. प्रहलाद रामाराव जैसे खामोश कर्मयोगियों की वैज्ञानिक प्रतिभा और भारत की संप्रभुता की वह गूंज है, जिसने सीमा पार बैठे दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत का आकाश अब पूरी तरह अभेद्य है।
इसे भी पढ़ें: इधर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमला करता रह गया, उधर भाजपा ने बड़ा खेल कर दिया, जारी हो गयी BJP Pradesh Prabharis List
आकाश मिसाइल का सफल इंटरसेप्शन ज़िंदगी का सबसे संतोषजनक दिन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल के सफल इंटरसेप्शन के बाद, डॉ रामाराव ने इसे अपनी ज़िंदगी का सबसे संतोषजनक दिन बताया था। एक पब्लिकेशन के अनुसार, टीवी पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जिस मिसाइल को बनाने में मैंने मदद की, उसे दुश्मन के खतरों को इतनी सटीकता से नाकाम करते हुए देखना। ऐसा लगा जैसे मेरी ज़िंदगी भर की मेहनत साकार हो रही हो। उन्होंने आगे कहा कि हालिया ऑपरेशन के दौरान इस सिस्टम ने न सिर्फ़ अपनी डिज़ाइन की उम्मीदों को पूरा किया, बल्कि उनसे भी बेहतर प्रदर्शन किया। आकाश मिसाइल के साथ डॉ. रामाराव का सफ़र भारत के मिसाइल विकास प्रयासों के शुरुआती दौर में शुरू हुआ था। भारत के 'मिसाइल मैन' और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने खुद उन्हें चुना और आकाश प्रोग्राम के लिए सबसे कम उम्र का प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त किया। उस समय, भारतीय सेना को इस सिस्टम की कामयाबी को लेकर संदेह था। आकाश मिसाइल अब भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है। इसे DRDO ने डेवलप किया है और भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने बनाया है। समय के साथ इसमें सुधार करके इसका एडवांस्ड 'आकाश-NG' वर्ज़न तैयार किया गया है। नए वर्ज़न की रेंज 80 किलोमीटर तक है और यह 2,500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकता है। यह एक साथ 64 टारगेट को लॉक कर सकता है और एक ही समय में 12 मिसाइलें दाग सकता है।
1994 में रखी गई थी प्रोजेक्ट की नींव
डॉ. रामाराव के अनुसार, आकाश मिसाइल परियोजना की शुरुआत साल 1994 में हुई थी और उस समय इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट आवंटित किया गया था। किसी भी नई और अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने की राह कभी आसान नहीं होती। शुरुआती दौर में टीम को कई असफलताओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन वैज्ञानिकों ने हर नाकामी से जरूरी सबक लिया और आगे बढ़ते रहे। इस पूरे मिशन में सबसे पेचीदा और मुश्किल काम ‘राजेंद्र’ नामक मल्टी-फंक्शन इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड फेज्ड ऐरे रडार को तैयार करना था। यह जटिल रडार सिस्टम ही आकाश मिसाइल की असली आंख और दिमाग था। रक्षा वैज्ञानिकों ने इस बड़ी तकनीकी चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर दिखाया। बाद में परियोजना के दायरे और तकनीक को और अधिक उन्नत बनाने के लिए इसके बजट को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
इसे भी पढ़ें: 5 दिन बैंक बंद! कर्मचारियों के साथ ऐसा क्या हुआ? मेगा हड़ताल पर आ गए सभी, वजह जानकर आप भी चौंक जाएंगे
मिसाइल सिस्टम पर बना करियर
आकाश, भारत के मिसाइल प्रोग्राम में डॉ. रामाराव के बड़े योगदान का सिर्फ़ एक हिस्सा है। अपने करियर के दौरान, उन्होंने लगभग 10 अलग-अलग मिसाइल सिस्टम पर काम किया है, जिनमें ज़मीन से हवा में और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। उन्होंने अस्त्र और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई; ब्रह्मोस रूस के साथ मिलकर बनाया गया एक जॉइंट वेंचर है और यह भारत के सबसे सफल सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों में से एक बन गया है। आज भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना इनमें से कई सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं। इनकी सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। आर्मेनिया जैसे देशों ने आकाश सिस्टम और पिनाका रॉकेट लॉन्चर के लिए ऑर्डर दिए हैं, जो एक भरोसेमंद डिफेंस एक्सपोर्टर के तौर पर भारत के उभरने को दिखाता है। डॉ. रामाराव का मानना है कि भारतीय मिसाइलें ग्लोबल खरीदारों के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं, हमारे सिस्टम किफायती हैं, चलाने में आसान हैं और बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हैं। यही बात उन्हें ग्लोबल मार्केट में सबसे अलग बनाती है।
इसे भी पढ़ें: Sukhbir Badal ने Mann Sarkar की कल्याणकारी योजनाओं को पुरानी नीतियों की रीपैकेजिंग बताया
पद्मश्री से सम्मानित
भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से अलंकृत वैज्ञानिक डॉ. प्रहलाद रामाराव 79 वर्ष के हो चुके हैं। डीआरडीओ में दशकों तक देश की मिसाइल तकनीक को संवारने वाले इस वरिष्ठ वैज्ञानिक ने ‘आकाश’ मिसाइल की शानदार सफलता पर गर्व जताते हुए इसे अपने जीवन का सबसे यादगार और सुखद पल करार दिया। स्वदेशी ‘आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ भारत के रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह वायु रक्षा प्रणाली न केवल देश की सामरिक सीमाओं को अभेद्य बनाती है, बल्कि हर हवाई खतरे को नेस्तनाबूद कर राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को अद्वितीय मजबूती भी देती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
