गुजरात: नागरिकों के पर्यावरण योगदान को मापने के लिए एआई ऐप लॉन्च
गांधीनगर, 24 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने एआई आधारित एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए नागरिक पर्यावरण से जुड़ी अपनी गतिविधियों को दर्ज कर सकेंगे। योग्य गतिविधियों का सत्यापन होने के बाद उन्हें ग्रीन पॉइंट्स मिलेंगे, जो उनके कुल ग्रीन सिटीजन स्कोर में जुड़ेंगे।
एआई ग्रीन सिटीजन स्कोर ऐप को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत गुजरात इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड (जीआईएल) ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य पौधारोपण और कचरा प्रबंधन से लेकर जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल परिवहन तक की गतिविधियों में नागरिकों की भागीदारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक कई तरह की पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं और ऐप पर अपने योगदान को ट्रैक कर सकते हैं।
मोढवाडिया ने कहा, इस प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक पौधारोपण, कचरे को अलग करना और रीसाइक्लिंग, प्लास्टिक इकट्ठा करना, जल संरक्षण, पैदल चलना, साइकिल चलाना, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, कारपूलिंग और समुदाय आधारित पर्यावरण गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। योग्य गतिविधियों पर नागरिकों को ग्रीन पॉइंट्स मिल सकते हैं, जिससे वे अपनी पर्यावरण गतिविधियों और कुल ग्रीन स्कोर को ट्रैक कर सकेंगे।
यह ऐप गतिविधियों को दर्ज करने और उनका सत्यापन करने के लिए डिजिटल और एआई तकनीक का इस्तेमाल करता है।
विभाग के अनुसार, यूजर ऐप के जरिए योग्य गतिविधियों की जानकारी जमा कर सकते हैं। इसके बाद विभाग उनका सत्यापन करता है और फिर ग्रीन पॉइंट्स दिए जाते हैं।
जहां जरूरी होगा, वहां गतिविधियों के सत्यापन के लिए फोटो और लोकेशन की जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
मोढवाडिया ने कहा, प्लेटफॉर्म गतिविधियों के सत्यापन में मदद के लिए एआई आधारित फीचर्स का इस्तेमाल करता है। जहां जरूरी हो, वहां फोटो और लोकेशन की जानकारी का उपयोग किया जाता है। एआई ग्रीन असिस्टेंट पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों, अभियानों और ग्रीन पॉइंट्स के बारे में भी जानकारी देता है।
ऐप में पौधारोपण, कचरे को अलग करने, रीसाइक्लिंग और साफ-सफाई से जुड़ी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की सुविधा है। नागरिक जल संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ी अपनी गतिविधियों की जानकारी भी इसमें दर्ज कर सकते हैं।
ग्रीन मोबिलिटी के तहत यह प्लेटफॉर्म पैदल चलने, साइकिल चलाने, सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल और कारपूलिंग जैसी गतिविधियों को भी मान्यता देता है। यूजर इसके जरिए पर्यावरण से जुड़े अभियानों को खोजकर उनमें शामिल भी हो सकते हैं।
ऐप में एक्टिविटी हिस्ट्री की सुविधा भी है। इसके जरिए यूजर अपनी जमा की गई गतिविधियां, उनके सत्यापन की स्थिति और अर्जित किए गए पॉइंट्स देख सकते हैं।
लीडरबोर्ड के जरिए नागरिक प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रगति देख सकते हैं। वहीं, ऐप में मौजूद एआई असिस्टेंट पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों और ऐप की सेवाओं के बारे में मार्गदर्शन देता है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी भारती ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों में लोगों की भागीदारी को आसानी से मापने और ट्रैक करने योग्य बनाना है।
भारती ने कहा, इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण के लिए लोगों की भागीदारी को आसान, मापने योग्य और रोचक बनाना है। साथ ही नागरिकों और समुदायों को अपने रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म प्रत्येक व्यक्ति के पर्यावरण योगदान का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करता है। इसमें किसी गतिविधि को करने और उसे ऐप पर जमा करने से लेकर उसके सत्यापन, ग्रीन पॉइंट्स दिए जाने और नागरिक के ग्रीन स्कोर को अपडेट करने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
एक अधिकारी ने इस ऐप को डिजिटल ग्रीन डायरी और पॉइंट्स सिस्टम के रूप में बताया। यह पर्यावरण से जुड़ी सत्यापित गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है और नागरिकों को स्वच्छ तथा अधिक टिकाऊ गुजरात बनाने के प्रयासों में अपनी भागीदारी पर नजर रखने की सुविधा देता है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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कावेरी जल विवाद-तमिलनाडु की पानी की कमी वाली मांग पर कर्नाटक से जवाब तलब
कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की उस मांग पर कर्नाटक से जवाब मांगा है, जिसमें पिछले समय के दौरान पानी की हुई कथित कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है. कोर्ट ने कर्नाटक को एक हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी.
पानी पूरी मात्रा में नहीं मिला
यह मामला सिंचाई वर्ष के दौरान तमिलनाडु को कावेरी नदी से मिलने वाले पानी में कथित कमी से जुड़ा है. तमिलनाडु का कहना है कि उसके हिस्से का पानी पूरी मात्रा में नहीं मिला है. राज्य ने अपनी अर्जी में करीब 16 टीएमसी पानी की कमी का दावा किया है और इस कमी को पूरा करने के लिए पानी छोड़ने की मांग की है. सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य को जिस अनुपात में पानी मिलना चाहिए था, उस हिसाब से कमी पूरी नहीं की गई है.
कोई अलग आदेश नहीं दिया गया
तमिलनाडु की ओर से यह भी कहा गया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण यानी सीडब्ल्यूएमए के सामने पानी की कमी का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन कमी को पूरा करने के लिए कोई अलग आदेश नहीं दिया गया. वैद्यनाथन ने अदालत के सामने दावा किया कि तमिलनाडु के हिसाब से कमी करीब 20 टीएमसी है, जबकि कर्नाटक की गणना में यह करीब 16 टीएमसी बताई जा रही है.
राज्य खुद सूखे जैसे हालात से गुजर रहा
दूसरी तरफ कर्नाटक ने तमिलनाडु की मांग का विरोध किया. कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि राज्य खुद सूखे जैसी स्थिति से गुजर रहा है. इसके बावजूद कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तय मात्रा के मुताबिक पानी छोड़ने की कोशिश की है. कर्नाटक का कहना है कि पानी छोड़ने के मामले में उसने प्राधिकरण के निर्देशों का पालन किया है.
मानसून से फायदा मिलने की उम्मीद
कर्नाटक की ओर से यह भी दलील दी गई कि जल प्रबंधन प्राधिकरण विशेषज्ञ संस्था है और वह जलाशयों में पानी की उपलब्धता, पानी आने की स्थिति और बारिश से जुड़े हालात को ध्यान में रखकर फैसला ले रही है. कर्नाटक ने यह भी कहा कि मानसून अब कमजोर पड़ रहा है और राज्य में आगे बारिश की संभावना कम है. वहीं, उसके मुताबिक तमिलनाडु को उत्तर-पूर्वी मानसून से फायदा मिलने की उम्मीद है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात साफ की कि पानी की कमी को लेकर तमिलनाडु ने अपनी शिकायत उठाई है तो उस पर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण को फैसला करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि कमी के मुद्दे पर प्राधिकरण को अपना रुख स्पष्ट करना होगा.
6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश
इससे पहले भी तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उस समय राज्य ने कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के मुताबिक पानी छोड़ने का आदेश लागू कराने की मांग की थी. प्राधिकरण ने कर्नाटक को 9 सितंबर से 23 सितंबर के बीच रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था. तमिलनाडु ने इसके साथ ही पहले की अवधि में हुई कथित कमी को भी पूरा करने की मांग उठाई थी.
अब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को तमिलनाडु की नई अर्जी पर एक हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. इसके बाद मामले की सुनवाई अक्टूबर में होगी. फिलहाल अदालत ने पानी की कथित कमी को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है. विवाद का अगला चरण कर्नाटक के जवाब और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका पर निर्भर करेगा.
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