Kshitij Tyagi ने UN में Pakistan को घेरा, PoK खाली करने और आर्थिक संकट सुधारने को कहा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई और इस्लामाबाद से कहा कि वह अपनी ऊर्जा ऐसे कामों में लगाने के बजाय जैसे कि दूसरे इलाकों पर कब्ज़ा करने की चाहत या सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देना। अपनी उस कर्ज़ में डूबी अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगाए जो बेलआउट (आर्थिक मदद) के सहारे चल रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए, भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान की ध्यान भटकाने वाली चालों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दुश्मनी भरा रवैया उसकी लड़खड़ाती आर्थिक व्यवस्था को बचाने में कोई मदद नहीं करेगा। क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान की प्राथमिकताएं बुनियादी तौर पर गलत हैं। उन्होंने टिप्पणी की, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह दूसरों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने या आतंकवाद फैलाने के बजाय विकास पर ध्यान दे, क्योंकि न तो ये हरकतें और न ही परिषद में किए गए उसके ड्रामे उन कर्ज़ों को चुकाने में मदद करेंगे जिन पर उसकी अर्थव्यवस्था टिकी है।
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क्षितिज त्यागी ने इस्लामाबाद के गंभीर घरेलू पाखंड को भी उजागर किया। उन्होंने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में नागरिकों के दमन और गंभीर मानवीय संकट का ज़िक्र किया, जहां बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का जवाब जानलेवा सरकारी हिंसा और भोजन, ईंधन व दवा जैसी ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई रोकने से दिया गया। इस्लामाबाद के शासन में मौजूद बड़ी कमियों की ओर इशारा करते हुए क्षितिज त्यागी ने कहा कि पिछले शुक्रवार को इस परिषद को बताया गया था कि जून के बाद से पाकिस्तान के कब्ज़े वाले इलाके में कितने ही नागरिक मारे गए, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ़्तार किया गया और भोजन व दवाइयों को रोका गया। जब ये बातें बताई गईं, तो पाकिस्तान का जवाब सिर्फ़ 'पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर' था। अगर इस कमरे में कोई प्रतिनिधिमंडल ऐसा है जो इस परिषद की जांच के हर ज़रूरी पैमाने पर खरा उतरता है, तो वह पाकिस्तान ही है।
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जम्मू-कश्मीर पर नई दिल्ली के मज़बूत रुख को दोहराते हुए, भारत ने कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश देश का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है। साथ ही, भारत ने इस्लामाबाद से मांग की कि वह अवैध रूप से कब्ज़े में लिए गए सभी इलाकों को तुरंत खाली करे। त्यागी ने आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि कैसे पाकिस्तान के प्रॉक्सी नेटवर्क ने मुसलमानों समेत सभी धर्मों के बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाया है, जबकि बाद में वही देश पाखंडपूर्ण तरीके से अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करता है। इस दोहरे मापदंड को उजागर करते हुए क्षितिज त्यागी ने कहा उन्हीं आतंकवादियों ने बाद में हर धर्म के कश्मीरियों की हत्या की, जिनमें से कई मुसलमान थे। जिस देश ने उन्हें बढ़ावा दिया, वही अब इस काउंसिल से जांच की मांग कर रहा है। काउंसिल इस विडंबना को ज़रूर समझेगी।" इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान द्वारा बांटे गए एक पत्र को सख्ती से खारिज कर दिया। यह पत्र सिंधु जल संधि पर 'कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' के फैसले से संबंधित था। जायसवाल ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं को गलत तरीके से पेश करने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की। पाकिस्तान के लगातार झूठ को उजागर करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, " 'स्थायी अदालत' या तथाकथित 'स्थायी मध्यस्थता अदालत' के बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि पाकिस्तान की आदत है कि वह अपने बुरे प्रोपेगैंडा को आगे बढ़ाने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है।
दिल से दिल मिलने का कोई तो कारण होगा, बिना कारण कोई बात नहीं होती...PM मोदी के स्वागत के लिए इतना बेचैन क्यों दिख रहा कनाडा?
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा का दौरा कर सकते हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पुष्टि की कि मोदी दिसंबर में G20 शिखर सम्मेलन के आसपास कनाडा का दौरा करेंगे। यह शिखर सम्मेलन दिसंबर के मध्य में मियामी में आयोजित होने वाला है। कार्नी नेसंयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र से इतर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कही। कार्नी ने कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर हमारी बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है। हमारा रिश्ता कई स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें लोगों के बीच संबंध, सुरक्षा और व्यापार शामिल हैं।
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मार्च में शुरू हुई थी ट्रेड डील पर बात
भारत-कनाडा ने मार्च में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू की थी। तब कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 2026 के अंत तक व्यापार समझौता पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। कार्नी की मार्च में भारत यात्रा अहम थी। यह 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय भारत यात्रा थी। दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने के साथ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 9 अरब डॉलर के 2024-25 के स्तर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी रखा है।
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इस ट्रेड डील का क्या मतलब हो सकता है
उम्मीद है कि इस समझौते में सामान और सेवाओं का व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के दूसरे क्षेत्र शामिल होंगे। कनाडा अमेरिका से आगे बढ़कर अपना एक्सपोर्ट बढ़ाना चाहता है और उसने भारत को एक अहम मार्केट के तौर पर चुना है, क्योंकि वह अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाना चाहता है। कनाडा सरकार के अनुसार, 2025 में कनाडा और भारत के बीच सामान और सेवाओं का आपसी व्यापार $30.4 बिलियन का था। इस कुल व्यापार में सामान का व्यापार $13.6 बिलियन का था। 2025 में कनाडा ने भारत को $3.9 बिलियन का सामान एक्सपोर्ट किया, जबकि भारत से इम्पोर्ट $9.7 बिलियन का था। कनाडा का लक्ष्य 2030 तक भारत के साथ सालाना दोतरफा व्यापार को दोगुना करके $70 बिलियन तक पहुंचाना है। भारत ने भी कनाडा को एनर्जी, ज़रूरी मिनरल्स और इन्वेस्टमेंट के एक अहम स्रोत के तौर पर पहचाना है। मार्च में कार्नी की भारत यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने एनर्जी, ज़रूरी मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टैलेंट और डिफेंस से जुड़े कई इनिशिएटिव पर साइन किए या उनकी घोषणा की। सस्केचेवान की कंपनी कैमेको और भारत के डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी के बीच $2.6 बिलियन के लंबे समय के यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट की भी घोषणा की गई।
राजनयिक संबंध भी बेहतर हो रहे
ब्रिटिश कोलंबिया में कनाडाई सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद 2023 में भारत-कनाडा संबंधों में आई भारी गिरावट के बाद, ये व्यापार वार्ता दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम बदलाव का संकेत है। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों का हाथ हो सकता है। भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इस राजनयिक विवाद का असर व्यापार और आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ा। तब से, कार्नी की सरकार ने नई दिल्ली के साथ संबंधों को फिर से बेहतर बनाने और आर्थिक रिश्तों को बढ़ाने की कोशिश की है। कार्नी ने मार्च में भारत का दौरा किया, जो 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। मोदी और कार्नी जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फिर से मिले और ऊर्जा व सप्लाई चेन समेत आपसी आर्थिक सहयोग में हुई प्रगति पर चर्चा की। दोनों नेता रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर काम जारी रखने के साथ-साथ कानून प्रवर्तन और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत बनाए रखने पर भी सहमत हुए।
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