उत्तराखंड के किसानों के लिए खुशखबरी! 1 अक्टूबर से शुरू होगी धान-मंडुवा की खरीद, सरकार ने बढ़ाया रेट
उत्तराखंड में किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. राज्य सरकार ने खरीफ क्रय सत्र 2026-27 के तहत धान और मंडुवा की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू करने का ऐलान कर दिया है. खरीद प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी है, जिससे किसानों में उत्साह का माहौल है.
खरीद प्रक्रिया कब से कब तक चलेगी?
राज्य में धान और मंडुवा की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी. इस दौरान किसान अपनी उपज तय क्रय केंद्रों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत बेच सकेंगे.
इस बार धान और मंडुवा का क्या रेट तय हुआ है?
केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद अब सामान्य धान की खरीद 2,441 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी, जबकि ग्रेड-ए धान के लिए किसानों को 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा. यह पिछले सीजन के मुकाबले किसानों के लिए राहत भरी बढ़ोतरी मानी जा रही है. मंडुवा का समर्थन मूल्य भी इस साल पहले से ऊंचा तय किया गया है, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों को उनकी परंपरागत फसल का बेहतर दाम मिल सके.
सरकार ने खरीद का क्या लक्ष्य तय किया है?
सरकार ने इस सीजन में 7 लाख मीट्रिक टन धान और 12 हजार मीट्रिक टन मंडुवा की खरीद का लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य राज्य में बढ़ती पैदावार और किसानों की उपज को समय पर बाजार तक पहुंचाने की सरकार की मंशा को दर्शाता है.
खरीद शुरू होने से पहले सरकार किन तैयारियों पर जोर दे रही है?
खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों को सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खरीद शुरू होने से पहले सभी क्रय केंद्रों और मंडियों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध करा दी जाएं. प्रशासन का कहना है कि खरीद के दौरान किसी भी किसान को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए, इसीलिए प्रशासन को पहले से ही पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं.
जिला स्तर पर तैयारियां कैसी चल रही हैं?
हरिद्वार जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों में प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. यहां किसानों की सुविधा के लिए कुल 48 धान क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे, जबकि आठ अतिरिक्त केंद्र प्रस्तावित हैं. यानी जरूरत पड़ने पर कुल केंद्रों की संख्या 56 तक पहुंच सकती है। खरीद के दौरान नमी सहित गुणवत्ता से जुड़े मानकों का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
किसानों का पंजीकरण कैसे होगा?
धान बेचने के इच्छुक किसानों को स्मार्ट पीडीएस एप और किसान पोर्टल के माध्यम से पहले से पंजीकरण कराना होगा. इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए भारत खरीद एप के जरिए किसानों का बायोमीट्रिक पंजीकरण भी किया जाएगा. जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बन सकेगी.
बैठक में राइस मिलर्स ने क्या सुझाव दिए?
खरीद तैयारियों को लेकर हुई बैठक में राइस मिलर्स और अन्य प्रतिनिधियों ने भी खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई अहम सुझाव रखे. सरकार की तरफ से इन सुझावों पर जल्द फैसला लेने का भरोसा दिलाया गया है, जिससे प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सके.
मिलर्स को भुगतान अब कितने समय में मिलेगा?
इस बार सरकार ने मिलर्स को भुगतान की प्रक्रिया में भी बड़ी तेजी लाने का फैसला किया है. पहले मिलर्स को भुगतान 72 घंटे के भीतर किया जाता था, लेकिन अब इसे घटाकर 48 घंटे कर दिया गया है. खास बात यह है कि यह पूरा भुगतान सीधे संबंधित बैंक खातों में ही किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया में देरी की गुंजाइश कम होगी.
UP News: सरकारी स्कूल आधुनिक हुए, कंपोजिट विद्यालयों का विस्तार, संख्या 2400 के पार पहुंची
सरकारी स्कूलों को लेकर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में सराहानीय काम हुआ है. विद्यालयों को आधुनिक शिक्षण के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है. वर्ष 2017-18 में महज 225 कंपोजिट विद्यालयों से शुरू हुई यह व्यवस्था वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,605 विद्यालयों तक पहुंच चुकी है. अब इन विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा 8 तक एक ही परिसर में निःशुल्क शिक्षा के साथ आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल पुस्तकालय और खेलकूद जैसी सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है. विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ते हुए बच्चों के शैक्षिक और समग्र विकास के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं.
कंपोजिट विद्यालयों की संख्या में बढ़ोतरी
यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2017-18 में जहां मात्र 225 कंपोजिट विद्यालय थे, वहीं वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 24,605 हो गई. इस प्रकार इस अवधि में कंपोजिट विद्यालयों की संख्या में 24,380 की वृद्धि दर्ज की गई है. योगी सरकार की पहल के अंतर्गत कंपोजिट विद्यालयों में विद्यार्थियों को बालवाटिका से कक्षा आठ तक एक ही परिसर में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. इससे बच्चों को एक ही विद्यालय में आगे की कक्षाओं की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल रहा है. साथ ही प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की शैक्षिक व्यवस्थाओं को एकीकृत कर संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है.
शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर
कंपोजिट विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास और खेल सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है. इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा, छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर है.
खेल सुविधाओं का विस्तार
बता दें कि कंपोजिट विद्यालयों के विकास का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक ही परिसर में निरंतर शिक्षा, बेहतर शैक्षिक संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार में सरकारी विद्यालयों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. कंपोजिट विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ बच्चों के शैक्षिक एवं समग्र विकास पर जोर है.
12 तक एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से 150 मॉडल कंपोजिट विद्यालयों को विकसित किया जा रहा है. करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाले इन विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा 12 तक एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा होगी.
स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल पुस्तकालय, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, वाई-फाई, मिनी स्टेडियम, बड़े खेल मैदान, शिक्षकों के आवास और सीसीटीवी जैसी सुविधाओं से युक्त ये विद्यालय बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएंगे. हमारा प्रयास है कि इन विद्यालयों को विद्यार्थियों के शैक्षिक, तकनीकी, शारीरिक और समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए.
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