नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली जमानत:कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार, कहा- दोबारा क्यों किया अरेस्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव से पहले नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत दे दी। गुरुवार को अदालत ने फैसले में कहा कि पुलिस इस मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती. कोर्ट ने मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की भी इजाजत दे दी है। प्रधान के खिलाफ पांच मामले दर्ज हैं। इन सभी मामलों में उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। उन्हें 18 सितंबर की शाम को नंदीग्राम जमीन अधिग्रहण विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई डॉक्यूटमेंट पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि कोई प्रोडक्शन वारंट सर्व किया गया था। तो इस मामले में प्रधान को दोबारा अरेस्ट क्यों किया गया? जस्टिस भट्टाचार्य ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी पुलिस थाने में दर्ज साल 2007 के केस के सिलसिले में 12 अक्टूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें चुनाव लड़ने की भी इजाजत दी। नंदीग्राम उपचुनाव की वोटिंग 6 अक्टूबर को है, प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म होगा और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। दोनों निचली अदालतों के आदेशों से प्रधान के लिए खुद प्रचार करने का मौका लगभग खत्म हो गया है। वे तभी प्रचार कर सकेंगे, जब उन्हें जमानत मिल जाएगी। अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में जीती थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी। चुनाव आयोग ने इसी सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। नंदीग्राम का पश्चिम बंगाल की राजनीति में खास स्थान रहा है। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में सुवेंदु अधिकारी ने मदद की थी। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… ममता की नई पार्टी का लोगो 'फुटबॉल खिलाड़ी' लॉन्च: इसी पर उपचुनाव लड़ेगी; इससे पहले 2 पार्टियों को मिल चुका यही सिंबल ममता बनर्जी गुट ने सोमवार को नई पार्टी 'ममता टीएमसी' का अस्थायी नया लोगो 'फुटबॉल खेलता खिलाड़ी' लॉन्च किया। TMC में टूट के बाद 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने TMC का ओरिजनल नाम और ‘दो फूल-घास’ सिंबल फ्रीज कर दिया था। इसके बाद ममता और बागी गुट अरूप रॉय को नई पहचान मिली। पढ़ें पूरी खबर…
जीतू पटवारी का ऐलान “मतदाता सूची को लेकर MP कांग्रेस करेगी आंदोलन”, 28 सितंबर को भोपाल निर्वाचन आयोग का घेराव
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने हुए कहा कि पिछले करीब दो वर्षों से राहुल गांधी लगातार देश में लोकतंत्र, मतदाता अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश में मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था को लेकर कांग्रेस निर्णायक आंदोलन करेगी।
कांग्रेस नेता ने ऐलान किया कि सोमवार 28 सितंबर को भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसके अगले दिन मंगलवार 29 सितंबर को पूरे प्रदेश में जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव होगा। इस अवसर पर मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक और संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे भी मौजूद रहे।
मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल
जीतू पटवारी ने कहा है कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि हर मतदाता के संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने मध्यप्रदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि ड्राफ्ट प्रक्रिया में दिसंबर 2025 में 42,74,160 नामों से संबंधित जानकारी/फॉर्म उपलब्ध न होने की बात सामने आई थी। फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में प्रदेश में कुल 5,39,81,065 मतदाता दर्ज हुए। रिपोर्टेड आंकड़ों के अनुसार 34,25,078 नाम हटाए गए, जबकि ड्राफ्ट सूची की तुलना में लगभग 8.49 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि दर्ज हुई।
कांग्रेस ने मांगा विधानसभा और बूथवार विवरण
कांग्रेस ने सवाल किया है कि ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच हुए इतने बड़े बदलावों का विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। हर मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका नाम सूची में है या नहीं और यदि हटाया गया है तो कारण क्या है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग, सरकार और प्रशासन से जवाब मांगती रहेगी कि
- किस मतदाता का नाम हटाया गया?
- किस आधार पर हटाया गया?
- किस अधिकारी ने सत्यापन किया?
- मतदाता को सूचना कब दी गई?
- दावे और आपत्ति का अवसर कैसे दिया गया?
- कितने नाम वापस जोड़े गए?
- कितने नाम अभी भी विवादित हैं?
- विधानसभा और बूथवार पूरा डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
छह मांगों के साथ आंदोलन का ऐलान
जीतू पटवारी ने घोषणा की कि सोमवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग की इकाई का घेराव करेंगे। कांग्रेस की प्रमुख मांगें होंगी:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफा।
- चुनाव प्रक्रिया एवं मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच।
- जांच में आपराधिक कृत्य प्रमाणित होने पर FIR दर्ज हो।
- दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई।
- हटाए गए प्रत्येक वास्तविक मतदाता को अपना पक्ष रखने और नाम पुनः जुड़वाने का अवसर।
- चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर भी सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग को सरकार या सत्तारूढ़ दल के प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून में बदलाव का भी जिक्र किया, जिसमें चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश की भूमिका हटाकर केंद्रीय गृह मंत्री को शामिल किया गया।
जीतू पटवारी ने प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांव-गांव और बूथ-बूथ जाकर मतदाता सूची की स्थिति की जांच करेगी तथा वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें, यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।
चुनाव आयोग का निर्णायक विरोध अब लोकतंत्र को नई ताकत देगा! आगामी सोमवार को हम भोपाल में आयोग का घेराव करेंगे!
????भोपाल | प्रेस कांफ्रेंस pic.twitter.com/czs7LNqPVt
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 24, 2026
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