Odisha में भारी बारिश का कहर, नबरंगपुर में Red Alert और दो मंत्री ग्राउंड पर तैनात
ओडिशा के कुछ हिस्सों में बृहस्पतिवार को भारी बारिश हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भारी बारिश की वजह से दक्षिण ओडिशा में बाढ़ और भूस्खलन की आशंका के मद्देजर राज्य सरकार ने हालात से निपटने के लिए किये गये प्रबंधों का जायजा लेने के लिए दो वरिष्ठ मंत्रियों को क्षेत्र में भेजा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी दी है कि बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। विभाग ने अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। आईएमडी के सूत्रों के अनुसार राज्य में बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे में औसतन 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
कोरापुट जिले के सेमिलीगुड़ा में सबसे अधिक 193.9 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विभाग ने नबरंगपुर जिले के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है और वहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग ने छह अन्य जिलों बरगढ़, नुआपाड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, कोरापुट और मलकानगिरि में अगले 24 घंटे के दौरान 12 से 20 सेंटीमीटर भारी बारिश होने की आशंका के मद्देनजर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।
विभाग ने बालासोर, संबलपुर, झारसुगुड़ा, क्योंझर, मयूरभंज, सुबर्णपुर, बौध, कंधमाल और रायगढ़ जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इन जिलों में सात से 11 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि स्थिति के मद्देनजर पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री रवींद्र नारायण नाइक को कोरापुट और मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक को गजपति जिले में निगरानी के लिए भेजा गया हैं।
पुजारी ने बताया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संवेदनशील क्षेत्रों के विधायकों से भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करने को कहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और विभिन्न स्थानों पर कर्मियों तथा मशीनों को तैनात किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई जनहानि नहीं हो। मौसम विभाग ने कहा कि तटीय इलाकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है और मछुआरों से शुक्रवार सुबह तक समुद्र में न जाने की अपील की गई है।
Voter List और SIR विवाद पर घिरे CEC Gyanesh Kumar, TMC MP Mahua Moitra ने दर्ज कराई शिकायत
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने चुनाव सूची (इलेक्टोरल रोल) के प्रबंधन से जुड़े मामले में उन पर कथित आपराधिक आचरण का आरोप लगाया। मोइत्रा ने कहा कि मैं आज भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन आई हूं, जिन्होंने आपराधिक आचरण किया है।
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मोइत्रा ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची बनाए रखने की स्थापित प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया और चुनाव सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए। उनके ये आरोप चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सामने आए हैं। TMC सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त को "चोर" बताते हुए X पर लिखा कि ज्ञानेश 'चोर' कुमार एक मनमाना काम करने वाले अधिकारी हैं, जिन्होंने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना काम किया। असली वोटरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा नहीं है। उन्हें कोई छूट नहीं मिल सकती। उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। बस इतनी सी बात है।
भारत के चुनाव आयोग के साथ चल रहे विवाद के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, इस राष्ट्रीय दबाव समूह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मुख्य मांग की। CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने चेतावनी दी है कि अगर कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो ग्रुप विरोध प्रदर्शन करेगा। इसके साथ ही, ग्रुप ने चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को रोकने और आने वाले सभी चुनावों पर रोक लगाने की भी मांग की है।
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अभिजीत दिपके ने कहा कि कल चुनाव आयोग के बारे में आई एक रिपोर्ट से साबित होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। वह देश के सबसे बड़े राष्ट्र-विरोधी हैं और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए... वह भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं... जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं। क्या यही लोकतंत्र है?... कुल मिलाकर, 13 करोड़ से ज़्यादा वोट हटा दिए गए हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी (NDA) के बीच का अंतर सिर्फ़ 2% था। 13 करोड़ वोट हटाना, कुल वोटों का लगभग 13% से 14% हिस्सा हटाने के बराबर है। क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर उस 2% के अंतर को बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं ताकि वे कभी सत्ता से न हटें? ऐसा क्यों किया जा रहा है? इतने सारे वोट हटाने की क्या ज़रूरत थी?
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