पंजाब में ED की कार्रवाई पर AAP का हमला, हरपाल चीमा ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लगातार चल रही कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र की एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले पंजाब में केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि पंजाब ऐसे दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और लोग लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे.
दरअसल, ED ने मंगलवार से मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के दफ्तर समेत कई ठिकानों पर तलाशी और जांच की है. रिपोर्टों के मुताबिक GMADA परिसर में कार्रवाई करीब 36 घंटे तक चली और इस दौरान दस्तावेज, कंप्यूटर तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई. कम से कम तीन मंजिलों को सील किए जाने और वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की भी जानकारी सामने आई है.
GMADA कार्रवाई को लेकर क्या है मामला?
ED की कार्रवाई कथित तौर पर जमीन अधिग्रहण, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव की मंजूरी, प्राइवेट रियल एस्टेट कंपनियों को कथित वित्तीय लाभ और संपत्तियों की नीलामी से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा है. एजेंसी की कार्रवाई कई शहरों में एक साथ हुई है.
रिपोर्टों के अनुसार जांच में कुछ निजी कंपनियों और GMADA से जुड़े पुराने लेन-देन तथा वित्तीय रियायतों को भी देखा जा रहा है. ED के मुताबिक कुछ मामलों में निजी कंपनियों को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का अनुचित लाभ और सरकारी खजाने को नुकसान होने की आशंका की जांच की जा रही है. यह जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे.
हरपाल चीमा ने कार्रवाई के समय पर उठाए सवाल
AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि चुनाव नजदीक आने के साथ पंजाब में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई बढ़ना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की ओर से शासित राज्यों में चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता को राजनीतिक दबाव के तौर पर देखा जा रहा है.
चीमा ने दावा किया कि GMADA में ED की कार्रवाई से सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ और अधिकारियों को लंबे समय तक पूछताछ का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक GMADA जैसी संस्था शहरी विकास, जमीन, आवास और आधारभूत ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य देखती है, इसलिए लंबे समय तक चलने वाली जांच का असर आम लोगों और सरकारी परियोजनाओं पर पड़ सकता है.
हालांकि, ED की कार्रवाई का आधिकारिक आधार कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच बताया गया है. इसलिए जांच के आरोपों और राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग देखना जरूरी है.
बंद घर में तलाशी को लेकर भी सवाल
चीमा ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ बंद और खाली परिसरों के ताले तोड़कर तलाशी ली गई और परिवार के सदस्यों को परेशान किया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली तो ऐसी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी.
इसी बीच रिपोर्टों में सामने आया कि ED ने AAP नेता सत्येंद्र जैन के चंडीगढ़ स्थित आवास पर भी तलाशी ली. भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां कोई मौजूद नहीं था और अधिकारियों ने परिसर में प्रवेश के लिए ताला तोड़ा.
वहीं, एक अन्य कार्रवाई में पंजाब के मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार के लुधियाना स्थित आवास पर भी ED की तलाशी की खबर सामने आई है. एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही थी.
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
ED की GMADA में लंबी कार्रवाई के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया. इसके बाद हाईकोर्ट ने एक वरिष्ठ स्तर के वारंट अधिकारी को ED की तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की निगरानी के लिए नियुक्त किया. अधिकारी ने 24 सितंबर की सुबह GMADA कार्यालय पहुंचकर ED टीम से मुलाकात की और कार्रवाई की स्थिति देखी. उन्हें अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी है.
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच एजेंसी और राज्य सरकार के बीच कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आए हैं.
AAP का दावा- केंद्रीय एजेंसियों का हो रहा राजनीतिक इस्तेमाल
हरपाल चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस तरह की कार्रवाई से राजनीतिक माहौल प्रभावित होता है.
चीमा ने दावा किया कि पंजाब में युवाओं, किसानों और कारोबारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं और इसी वजह से दबाव बनाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी.
हालांकि, इन आरोपों को राजनीतिक दल का दावा समझना जरूरी है. ED की ओर से की जा रही कार्रवाई का आधिकारिक आधार कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच है. जांच के दौरान सामने आने वाली सामग्री और अदालतों में होने वाली कार्यवाही से ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी.
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