दिल्ली में गैंगवार की साजिश नाकाम, गोगी-दीपक बॉक्सर गैंग का कथित शूटर मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस के नॉर्थ जिले की ऑपरेशंस सेल ने संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए Gogi-Deepak Boxer Gang के कथित शूटर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान 31 वर्षीय मोहित उर्फ KD, निवासी सोनीपत, हरियाणा के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक आरोपी दिल्ली में एक गंभीर आपराधिक वारदात को अंजाम देने के इरादे से आया था.
नॉर्थ जिले की DCP निहारिका भट्ट के मुताबिक, पुलिस टीम को आरोपी के वजीराबाद इलाके में पहुंचने की सूचना मिली थी. सूचना के आधार पर STF और एंटी-नारकोटिक्स सेल की संयुक्त टीम ने 23 और 24 सितंबर की दरम्यानी रात वजीराबाद इलाके में इंटरसेप्शन लगाया.
DCP निहारिका भट्ट ने बताया कि करीब 1:40 बजे आरोपी मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया. पुलिस टीम ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी. आरोपी ने दो राउंड फायर किए, जिसके जवाब में पुलिस टीम ने तीन राउंड फायर किए. इस दौरान आरोपी की एक गोली पुलिसकर्मी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, लेकिन जैकेट की वजह से पुलिसकर्मी सुरक्षित रहा. इसके बाद आरोपी को काबू कर गिरफ्तार कर लिया गया.
हत्या की साजिश के लिए दिल्ली आया था आरोपी
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि मोहित का कथित तौर पर Gogi-Deepak Boxer Gang से संबंध है और वह गैंग के लिए शूटर के तौर पर काम करता था. पुलिस का दावा है कि मोहित कथित तौर पर Tillu Tajpuriya Gang से जुड़े एक व्यक्ति की हत्या करने के इरादे से दिल्ली आया था. उसे वजीराबाद इलाके में एक अन्य व्यक्ति से मिलना था, जो कथित तौर पर टारगेट के ठिकाने और उसकी दिनचर्या के बारे में जानकारी रखता था. जांच के मुताबिक, दोनों कथित तौर पर टारगेट के पास जाने की योजना बना रहे थे. पुलिस के अनुसार टारगेट के सुबह की सैर के लिए बाहर निकलने के दौरान वारदात को अंजाम देने की योजना थी.
दो पिस्टल, चार कारतूस और चोरी की बाइक बरामद
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है. पुलिस के मुताबिक मोटरसाइकिल इंद्रपुरी थाने में दर्ज चोरी के मामले से जुड़ी है. मोहित उर्फ KD के खिलाफ हरियाणा के गन्नौर थाने में वर्ष 2023 में दो आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है. इनमें गैर इरादतन हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और आगजनी से नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं शामिल हैं.
वजीराबाद थाने में मामला दर्ज
बरामद हथियार और कारतूसों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. मामले में FIR नंबर 444/2026, धारा 221/132/109(1) BNS और 25/27 Arms Act के तहत थाना वजीराबाद में केस दर्ज किया गया है. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले की आगे की जांच जारी है. DCP निहारिका भट्ट के मुताबिक, पुलिस अब आरोपी के गैंग कनेक्शन, उसके साथियों और दिल्ली में प्रस्तावित वारदात से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
'48 घंटे में इस्तीफा दें सीईसी ज्ञानेश कुमार', CJP ने खोला मोर्चा; दी देशव्यापी आंदोलन की कड़ी चेतावनी
CJP Allegations on CEC: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा तूफान खड़ा हो गया है. हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस महीनों के भीतर चुनाव आयोग की कई आंतरिक प्रक्रियाओं और एसआईआर व्यवस्था पर दो चुनाव आयुक्तों ने करीब चौदह बार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. इस खुलासे के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों के सीधे निशाने पर आ चुके हैं. इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने गुरुवार को एक बेहद तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सीईसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पार्टी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए अड़तालीस घंटे का अल्टीमेटम दिया है और अपनी तीन प्रमुख मांगें सामने रखी हैं.
CEC की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार और इस्तीफे का अल्टीमेटम
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रवक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला और कहा कि मौजूदा समय में निष्पक्ष चुनाव की परंपरा को बड़ा झटका लगा है. पार्टी का कहना है कि जिस तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, वह आने वाले समय के लिए बेहद चिंताजनक है. पार्टी ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि ज्ञानेश कुमार को अगले अड़तालीस घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है तो पार्टी पूरे देश में लोगों को लामबंद करके सड़कों पर उतरेगी और राजधानी दिल्ली में एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही विपक्षी दलों से भी अपील की गई है कि जब तक चुनाव प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद नहीं हो जाती, तब तक उन्हें चुनावों का बहिष्कार करने पर विचार करना चाहिए.
SIR प्रक्रिया रोकने और फाइलों को सुरक्षित रखने की मांग
पार्टी ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि पहली मांग ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की है. दूसरी मांग यह है कि आने वाले तमाम चुनावों पर फिलहाल रोक लगाई जाए और विवादित एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत बंद किया जाए. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की अपील की गई है. पार्टी का आरोप है कि अदालत को आगे आकर चुनाव आयोग से जुड़ी तमाम एसआईआर फाइलों को अपनी कस्टडी में ले लेना चाहिए. ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में कोई यह बहाना न बना सके कि जरूरी दस्तावेज किसी हादसे या आग लगने के कारण नष्ट हो गए. पार्टी का तर्क है कि अदालत की निगरानी में ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच संभव हो सकती है.
वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम गायब होने का सनसनीखेज दावा
प्रेस वार्ता के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आंकड़े सामने रखे गए. आरोप लगाया गया कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद से चुनाव परिणाम पहले से तय होने लगे हैं. पार्टी के मुताबिक महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, वहीं पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में लोग मतदान करने से वंचित रह गए. इसके अलावा राजधानी दिल्ली में भी सैंतालीस लाख वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है. पार्टी का दावा है कि अब तक कुल मिलाकर करीब तेरह करोड़ मतदाताओं के नाम चुनावी सूचियों से काटे जा चुके हैं. उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब पिछला आम चुनाव महज दो फीसदी वोटों के बारीक अंतर पर टिका था, तब इतने बड़े पैमाने पर नाम काटना किसकी जीत पक्की करने की कोशिश है.
क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने और नई पार्टियां गढ़ने के आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने आगे के आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि पिछले आम चुनाव के दौरान एक खास रणनीति के तहत काम किया गया. स्टालिन, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे क्षेत्रीय नेताओं के आधार को कमजोर करने के लिए वोटरों के नाम हटाए गए. आरोप है कि सत्ता पक्ष लगातार डमी और प्रॉक्सी पार्टियां खड़ी कर रहा है. क्षेत्रीय पार्टियों के बागी गुटों को चुनाव चिह्न और आर्थिक संसाधन सौंपकर उन्हें मुख्य दलों के खिलाफ खड़ा किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी जीत किसी सियासी लहर का नतीजा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से ज्ञानेश कुमार की मदद से मुमकिन हो पा रही है. पार्टी का कहना है कि संस्थाओं की साख बचाने के लिए इस व्यवस्था में तुरंत बुनियादी सुधार जरूरी हैं.
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