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पति की गर्लफ्रेंड रिश्तेदार नहीं, Karnataka HC ने रद्द किया BNS के तहत दर्ज क्रूरता का केस

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि भारतीय न्याय संहिता के तहत पति की गर्लफ्रेंड पर पत्नी के साथ क्रूरता करने और उसे डराने-धमकाने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की महिला साथी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए की; उस व्यक्ति पर उसकी पत्नी ने BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता का आरोप लगाया था। BNS, 2023 की धारा 85 के तहत, किसी महिला के साथ क्रूरता करने वाले पति या उसके रिश्तेदार को सज़ा का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

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कोर्ट ने प्रेमी के ख़िलाफ़ कार्यवाही क्यों रद्द कर दी?


जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने 'देचम्मा आईएम देचम्मा कौशिक बनाम कर्नाटक राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का आधार लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि किसी शादीशुदा आदमी की गर्लफ्रेंड को उसका रिश्तेदार नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था, सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किए गए कानून के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, अगर इस मामले के तथ्यों को देखा जाए, तो आरोपी नंबर 1 (पति) की प्रेमिका को पति का रिश्तेदार नहीं कहा जा सकता।

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यह मामला क्या था?


एक शादीशुदा आदमी की महिला साथी ने कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया, जब एक ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले का संज्ञान लिया। शिकायत में BNS के तहत कई अपराधों का आरोप लगाया गया था, जिनमें पत्नी के साथ क्रूरता करना, मारपीट या आपराधिक बल का प्रयोग, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करना शामिल था। शिकायत में उस पर दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज लेने का आरोप भी लगाया गया था। बार एंड बेंच के अनुसार, याचिकाकर्ता की ओर से वकील गगनदीप ई और अजीत पीबी पेश हुए, जबकि पत्नी की ओर से वकील पीएम गोपी पेश हुए। कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गर्लफ्रेंड या ऐसी कोई भी महिला जिसके साथ पति के संबंध रहे हों, उसे "रिश्तेदार नहीं माना जा सकता"। इस वजह से BNS की धारा 85 के तहत केस का आधार कमज़ोर हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि अगर IPC की धारा 498A के तहत उस महिला (प्रेमिका) के खिलाफ केस दर्ज भी किया जाता है, तो रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से यह साबित होना चाहिए कि बुरा बर्ताव पति या किसी रिश्तेदार ने किया था और यह बर्ताव दहेज की मांग पूरी न होने से जुड़ा था। हाई कोर्ट ने कहा FIR या चार्जशीट में मौजूद सभी आरोपों और सबूतों को अगर सही भी मान लिया जाए, तो भी ऐसा कोई दावा या सबूत नहीं मिलता जिससे यह साबित हो सके कि अपीलकर्ता का प्रतिवादी नंबर 2 को दहेज की मांग पूरी न होने पर परेशान करने से कोई लेना-देना था।

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Hong Kong डायवर्ट होकर China कैसे पहुंचे F-35 के संवेदनशील पार्ट्स, जांच में जुटा Pentagon

F-35 फाइटर जेट के दो पार्ट्स, जिन्हें मरम्मत के लिए अमेरिका भेजा जा रहा था, हांगकांग पहुँच गए और अब वे चीन के कब्ज़े में हैं। इस घटना के बाद पेंटागन ने जाँच शुरू कर दी है कि ये संवेदनशील मिलिट्री पार्ट्स कैसे दूसरी जगह भेज दिए गए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के F-35 जेट के ये पार्ट्स एक कॉकपिट कैनोपी और एक वेपन्स-बे डोर मई के आखिर में जाँच और ज़रूरत पड़ने पर मरम्मत या निपटान के लिए अमेरिका भेजे जा रहे थे, तभी शिपमेंट को अचानक दूसरी जगह भेज दिया गया। इस शिपमेंट को UPS संभाल रही थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, अमेरिका जाते समय इसे दक्षिण कोरिया में रोका गया और फिर हांगकांग भेजा गया। यह साफ़ नहीं है कि शिपमेंट को दक्षिण कोरिया में क्यों रोका गया, इसे हांगकांग क्यों भेजा गया, या रास्ते में यह बदलाव गलती से हुआ या जानबूझकर।

ब्लूमबर्ग ने मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से बताया है कि चीनी सरकार ने इन पुर्ज़ों को अपने कब्ज़े में ले लिया है और इन्हें वापस नहीं किया है। इस घटना के बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ही जगहों पर जांच शुरू हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि दुनिया के सबसे एडवांस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट में से एक के पार्ट्स चीन के कंट्रोल वाले इलाके में कैसे पहुँच गए।

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F-35 के पार्ट्स का क्या हुआ?


ये पार्ट्स ऑस्ट्रेलिया की सेना के F-35 एयरक्राफ्ट के थे और इस्तेमाल के लायक न रहने के कारण इन्हें अमेरिका भेजा जा रहा था। बताया जा रहा है कि इन्हें जांच और संभवतः मरम्मत या निपटान (disposal) के लिए भेजा जा रहा था। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस शिपमेंट में एयरक्राफ्ट का कॉकपिट कैनोपी और वेपन-बे का दरवाज़ा शामिल था। ये दोनों पार्ट्स F-35 बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने सप्लाई किए थे और इन पर रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल की कोटिंग की गई थी। F-35 की स्टील्थ क्षमताएं कई तरह की टेक्नोलॉजी के कॉम्बिनेशन पर निर्भर करती हैं, जिनमें एयरक्राफ्ट के रडार सिग्नेचर को कम करने के लिए खास मटीरियल का इस्तेमाल शामिल है। इसलिए, इन पार्ट्स पर रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल होने की वजह से यह सवाल उठने लगे हैं कि इन पार्ट्स से किस तरह की जानकारी मिल सकती है। हालांकि, ऐसा कोई संकेत नहीं है कि इन पार्ट्स में कोई क्लासिफाइड इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम या बहुत संवेदनशील उपकरण शामिल हैं, और ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने इस शिपमेंट की संवेदनशीलता को कम करके आंका है।

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  Sports

आंसुओं से मेडल तक का सफर...पिता को खोया, पेट पालने को कैब चलाई, अब एशियन गेम्स में रचा इतिहास

Salman Khan Struggle Story: पिता के निधन के बाद परिवार संभालने के लिए कभी दिल्ली-एनसीआर में उबर कैब चलाने वाले सलमान खान ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है. 2018 में भारतीय सेना में शामिल होकर रोइंग शुरू करने वाले सलमान ने सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुष डबल स्कल्स में भारत को कांस्य पदक दिलाया. संघर्ष, समर्पण और पिता के सपने को पूरा करने की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों तो राह की हर रुकावट पार की जा सकती है. Thu, 24 Sep 2026 23:21:21 +0530

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