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Alkem Laboratories Share Price: CFO के इस्तीफे के बाद शेयर टूटा, 2% से ज्यादा गिरा

Alkem Laboratories Share Price: कंपनी ने 24 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि अग्रवाल ने नए प्रोफेशनल अवसरों को तलाशने के लिए 30 जुलाई, 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वे 30 सितंबर, 2026 से एल्केम लैबोरेटरीज में सीनियर मैनेजमेंट पद पर नहीं रहेंगे।

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सूर्यास्त के बाद मंदिर में प्रवेश बंद! बिहार के 400 साल पुराने रहस्यमयी मंदिर से प्रेरित है सिद्धार्थ-तमन्ना की The Vvaan

एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की आगामी फ़िल्म 'द व्वान: फ़ोर्स ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट' (The Vvaan: Force of the Forest) ने बिहार के एक कम जाने-पहचाने लेकिन बेहद रहस्यमयी मंदिर की ओर देश भर के लोगों का ध्यान खींचा है। यह फ़िल्म बिहार के बिहटा के पास स्थित 'माँ वन देवी मंदिर' से जुड़ी पौराणिक लोक-कथाओं, मान्यताओं और परंपराओं से प्रेरित है। यह मंदिर एक पवित्र जंगल, रहस्य और सूर्यास्त के बाद उस इलाके में जाने पर लगी पुरानी पाबंदी से जुड़ी कहानियों के लिए जाना जाता है।

फ़िल्म बनाने वालों ने कहानी तैयार करते समय मंदिर के अपने दौरे के बारे में भी बात की है। लेखक अरुणाभ कुमार और डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा ने मंदिर का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पुजारियों, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से वन देवी से जुड़ी कहानियों के बारे में बात की।

लेकिन इस मंदिर की कहानी क्या है और इसने 'द व्वान' को कैसे प्रेरित किया? यहाँ वह सब कुछ है जो आपको जानना चाहिए।

माँ वन देवी मंदिर कहाँ है?
माँ वन देवी मंदिर पटना ज़िले में बिहटा के पास, पटना से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। ज़्यादातर मशहूर मंदिरों के उलट, इस मंदिर में देवी की कोई बड़ी मूर्ति नहीं है। वन देवी की पूजा एक पवित्र 'पिंड' के रूप में की जाती है, जो पूजा का मुख्य केंद्र है।

मंदिर के चारों ओर ग्रामीण इलाका है, जिसके बारे में माना जाता है कि कभी यहाँ घना जंगल हुआ करता था। अपनी एकांत जगह और स्थानीय लोक-कथाओं की वजह से यह उन लोगों के लिए एक लोकप्रिय जगह बन गया है जो बिहार की धार्मिक परंपराओं और लोक-कथाओं में रुचि रखते हैं।

वन देवी मंदिर कितना पुराना है?
माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 350 से 400 साल पुराना है। कुछ जानकारियों के अनुसार, जिनमें फ़िल्म बनाने वालों द्वारा बताई गई बातें भी शामिल हैं, इसकी शुरुआत 16वीं सदी में हुई थी।

हालाँकि, मंदिर की सही उम्र का पता लगाने के लिए कोई पक्का पुरातात्विक रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए, 16वीं सदी में इसकी शुरुआत की बात मंदिर के मौखिक इतिहास और स्थानीय परंपरा का हिस्सा है।

सालों के दौरान मंदिर में बदलाव हुए हैं, जबकि देवी से जुड़ी कहानियाँ पीढ़ियों से आगे बढ़ती रही हैं।

वन देवी के पीछे की कहानी क्या है?
स्थानीय लोक-कथाओं के अनुसार, वन देवी की कहानी राघोपुर के विद्यानंद मिश्र नाम के एक भक्त से जुड़ी है। कहा जाता है कि मिश्रा विंध्याचल में माँ विंध्यवासिनी के बहुत बड़े भक्त थे। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, उनके लिए विंध्याचल की यात्रा करना मुश्किल होता गया।

मान्यता है कि देवी ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और कहा कि वे अपने गाँव में उनके पवित्र 'पिंड' का एक हिस्सा ले आएँ।

देवी के आदेश का पालन करते हुए, माना जाता है कि मिश्रा उस पवित्र पिंड को वापस लाए और उसे अपने घर के पास जंगल में स्थापित किया। उस समय, वह जगह कोई भव्य मंदिर नहीं थी। कहा जाता है कि पिंड को एक साधारण सी झोपड़ी में रखा गया था।

चूँकि यह मंदिर जंगल के बीचों-बीच स्थित था, इसलिए स्थानीय लोग देवी को 'वन देवी' के नाम से जानने लगे, जिसका अर्थ है 'जंगल की देवी'।

यह कहानी मंदिर का विंध्याचल की माँ विंध्यवासिनी से संबंध भी बताती है, हालाँकि यह स्थानीय धार्मिक परंपरा और लोककथाओं का ही हिस्सा है।

झोपड़ी से मंदिर तक का सफ़र
धीरे-धीरे इस मंदिर का विकास हुआ। इसके आधुनिक इतिहास का एक अहम हिस्सा संत भगवान दास त्यागी से जुड़ा है। कहा जाता है कि वे 1958 में एक यज्ञ के लिए अमहारा आए थे। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि उन्होंने ही पवित्र पिंड के चारों ओर बने ढाँचे को एक औपचारिक मंदिर का रूप देने में मदद की थी।

इसके कई दशकों बाद और विकास हुआ। 12 फरवरी, 1997 को स्थानीय भक्तों ने मंदिर में निर्माण और विकास का एक और चरण शुरू किया। इन बदलावों के बावजूद, एक खास बात वैसी ही रही: देवी की पूजा पारंपरिक मूर्ति के बजाय 'पिंड' के रूप में ही की जाती है।

सूरज डूबने के बाद मंदिर में किसी को जाने की इजाज़त क्यों नहीं है?
वन देवी से जुड़ी सबसे दिलचस्प परंपराओं में से एक है सूरज डूबने के बाद जंगल और मंदिर में प्रवेश पर रोक। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, लोगों को पारंपरिक रूप से अंधेरा होने के बाद जंगल में न जाने की चेतावनी दी जाती थी। पीढ़ियों के साथ, यह रोक मंदिर से जुड़ी कहानी का एक अहम हिस्सा बन गई। शाम को मंदिर बंद होने के बाद पुजारी चले जाते हैं और माना जाता है कि परिसर के अंदर कोई नहीं रहता।

स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि तब माँ वन देवी खुद मंदिर में मौजूद रहती हैं और रात में परिसर में घूमती हैं। इसी वजह से मंदिर की रहस्यमयी छवि बनी है।

हालाँकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अंधेरा होने के बाद वहाँ कोई अलौकिक गतिविधि होती है। इस पाबंदी को एक लंबे समय से चली आ रही स्थानीय परंपरा के तौर पर बेहतर समझा जा सकता है, जो मंदिर से जुड़ी लोक-कथाओं और धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ी है।

मंदिर ने 'द व्वान' (The Vvaan) को कैसे प्रेरित किया?
वन देवी से जुड़ी लोक-कथाएँ ही 'द व्वान: फ़ोर्स ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट' (The Vvaan: Force of the Forest) की शुरुआत का कारण बनीं।

लेखक अरुणाभ कुमार ने मंदिर जाने और उससे जुड़ी कहानियों पर रिसर्च करने के बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि मंदिर से जुड़ी लोक-कथाओं को समझने के लिए उन्होंने स्थानीय लोगों, पुजारियों और ग्रामीणों से बातचीत की।

ANI को दिए एक इंटरव्यू में कुमार ने बताया कि उन्हें एक ऐसे जंगल की कहानी ने आकर्षित किया जहाँ सूर्यास्त के बाद लोगों का जाना मना था। बाद में उन्होंने यह कहानी डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा के साथ साझा की।

आखिरकार, दोनों यह आइडिया प्रोड्यूसर एकता कपूर के पास ले गए, जिन्हें कुमार के अनुसार लगा कि इस कहानी में बड़े पर्दे की फिल्म बनने की क्षमता है।

इसलिए, फिल्म निर्माताओं का दौरा केवल मंदिर के बाहरी स्वरूप को देखने तक सीमित नहीं था। वे मंदिर से जुड़ी मौखिक परंपराओं, मान्यताओं और अलौकिक लोककथाओं में रुचि रखते थे।

'द व्वान' (The Vvaan) इसी लोककथाओं की दुनिया से प्रेरणा लेती है और इसे एक सिनेमाई कहानी में बदलती है। हालाँकि, इस फिल्म को मंदिर या उससे जुड़ी किंवदंतियों के ऐतिहासिक वृत्तांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आगंतुकों के लिए, वन देवी मंदिर बिहार के धार्मिक परिदृश्य के एक कम ज्ञात पहलू की झलक प्रस्तुत करता है, जहाँ एक पवित्र पिंड, जंगल की एक पुरानी परंपरा और स्थानीय कहानियों की पीढ़ियाँ मिलकर मंदिर की पहचान को आकार देती हैं।

'द व्वान' 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।
 

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  Sports

Shubman Gill के लिए Rohit Sharma और Virat Kohli बेहद अहम Gautam Gambhir ने की तारीफ

भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चल रही चर्चा के बीच मुख्य कोच गौतम गंभीर का बयान काफी अहम माना जा रहा है। वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले गंभीर ने दोनों अनुभवी खिलाड़ियों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारतीय कप्तान शुभमन गिल के लिए रोहित और विराट जैसे खिलाड़ियों का साथ मिलना बड़ी बात है।

बता दें कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला रविवार को केरल के तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा। रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों भारतीय टीम का हिस्सा हैं और उनके अंतिम एकादश में खेलने की उम्मीद है। शुभमन गिल वनडे टीम की कप्तानी कर रहे हैं।

गंभीर ने जियोस्टार से बातचीत में गिल की कप्तानी पर बात करते हुए कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि उनके पास रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मैदान के अंदर और बाहर उनकी मदद कर सकते हैं। गंभीर ने खास तौर पर युवा कप्तान के लिए अनुभव के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि कम उम्र में कप्तानी करते समय खिलाड़ी कई बार भावनाओं में बह सकता है, ऐसे में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी काफी मदद करती है।

गंभीर ने गिल की कप्तानी की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल ने अब तक शांत रहने, निस्वार्थ तरीके से टीम के लिए काम करने और जरूरत के समय आक्रामक रवैया अपनाने जैसी खूबियां दिखाई हैं। उन्होंने यह भी माना कि गिल के लिए हाल के वनडे मुकाबले आसान नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में परिणाम उनके पक्ष में बदलेंगे।

गौरतलब है कि गंभीर की इस टिप्पणी को रोहित और विराट के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, गंभीर ने यह नहीं कहा है कि दोनों खिलाड़ी 2027 विश्व कप तक टीम का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने रोहित के भविष्य को लेकर अलग से पूछे जाने पर यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला हमेशा टीम के हित को ध्यान में रखकर होगा। इसलिए दोनों खिलाड़ियों के विश्व कप भविष्य को लेकर अभी किसी आधिकारिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

दूसरी ओर, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर भी बीसीसीआई में बदलाव की स्थिति बनी हुई है। बीसीसीआई की हालिया बैठक में पदाधिकारियों को पुरुष सेलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष के भविष्य पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया था। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अगरकर कार्यकाल बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं, जबकि रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर चयन समिति और बोर्ड के बीच मतभेद की भी खबरें सामने आई हैं। हालांकि बीसीसीआई ने अगरकर के जाने की वजह के तौर पर ऐसी किसी असहमति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, 2027 वनडे विश्व कप अब भारतीय टीम की तैयारियों का बड़ा लक्ष्य है। विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है। ऐसे में रोहित और विराट का अनुभव टीम के लिए कितना उपयोगी रहेगा, यह आने वाले मुकाबलों में उनके प्रदर्शन और टीम की जरूरतों के साथ तय होगा। फिलहाल दोनों खिलाड़ी वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए उपलब्ध हैं और उनके प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी। 

Thu, 24 Sep 2026 18:24:00 +0530

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