CEC अकेले फैसले नहीं ले सकते, Himanta Biswa Sarma बोले- Election Commission सामूहिक संस्था है
गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर हो रहे विवादों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि CEC की आलोचना विपक्ष की हताशा को दिखाती है, और उन्होंने विपक्ष को दिमागी नक्सली करार दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने ज़ोर देकर कहा कि चुनाव आयोग के फ़ैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और CEC अन्य चुनाव आयुक्तों की भागीदारी के बिना अकेले कोई फ़ैसला नहीं ले सकते।
इसे भी पढ़ें: Maithili Thakur बोलीं- बिहार में सुरक्षित हूं, तो भड़के लेखक Neeraj Pandey ने याद दिला दी जमीनी हकीकत!
हिमंत बिस्वा सरमा ने समझाया कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त अल्पमत में हों, तो चुनाव आयोग कोई फ़ैसला नहीं ले सकता। चुनाव आयोग के हर फ़ैसले को बहुमत से पारित या लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक सामूहिक संस्था है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाना जो एकतरफा फ़ैसले लेते हैं, उस संवैधानिक ढांचे के ख़िलाफ़ है जिसके तहत चुनाव आयोग काम करता है।
सरमा ने कहा कि इसलिए, देश भर में यह संदेश देना कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले ही फ़ैसले लिए हैं, संवैधानिक व्यवस्था के हिसाब से सही नहीं है। फ़ैसले लेने से पहले चर्चा करना अलग बात है, लेकिन चुनाव आयोग का कोई भी फ़ैसला आम सहमति या बहुमत की राय से ही लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर ध्यान केंद्रित करना एक तरह का राजनीतिक अभियान है।
इसे भी पढ़ें: Nandigram Bypoll: BJP प्रत्याशी की उम्र विवाद पर Calcutta High Court में सुनवाई
उन्होंने कहा कि इसीलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना एक राजनीतिक अभियान है। मुझे नहीं लगता कि मुख्य चुनाव आयुक्त, दूसरे चुनाव आयुक्तों से सलाह लिए बिना कोई फ़ैसला ले सकते हैं। इसलिए, मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना सिर्फ़ विपक्ष और ‘दिमागी नक्सलियों’ की हताशा को दिखाता है। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा 10 महीने की अवधि में मतदाता सूची प्रक्रियाओं और SIR से जुड़े मुद्दों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताने की खबरों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल को बड़ी राहत, ACB के कलीना लाइब्रेरी केस में NCP नेता समेत सभी आरोपियों को किया बरी
मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने, जो MPs और MLAs से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है, महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल को भ्रष्टाचार के एक मामले में बरी कर दिया है। यह मामला मुंबई यूनिवर्सिटी के कलीना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी के कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा था। यह केस एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 2015 में तब दर्ज किया था, जब भुजबल महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के मंत्री थे। कोर्ट ने गुरुवार को भुजबल और दूसरे आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं था।
कलिना लाइब्रेरी केस क्या है?
ACB ने जून 2015 में मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में यह केस दर्ज किया था। उस समय PWD मंत्री रहे भुजबल पर जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि उन्हें इस कॉन्ट्रैक्ट के बदले कथित तौर पर रिश्वत मिली थी। इसके बाद ACB ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। उस समय एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट का संबंध लाइब्रेरी प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट देने से था। आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया था। यह मामला उन भ्रष्टाचार के मामलों में से एक था जो भुजबल के कार्यकाल के दौरान पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) द्वारा संभाले गए कॉन्ट्रैक्ट्स में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच से सामने आए थे।
इसे भी पढ़ें: Maharashtra Drought: सूखा प्रबंधन पर 3 दिन में पहली अधिसूचना जारी करेगी सरकार, बोले CM Devendra Fadnavis
दूसरे आरोपी कौन थे?
यह मामला भुजबल और उस समय PWD से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। आरोपियों में गजानन सावंत (तत्कालीन सब-डिविजनल इंजीनियर), हरीश पाटिल (तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर), अनिलकुमार गायकवाड़ (तत्कालीन सुपरिटेंडिंग इंजीनियर), संजय सोलंकी (तत्कालीन अंडर-सेक्रेटरी) और MS शाह (तत्कालीन कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट सेक्रेटरी) शामिल थे। दूसरे आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही भी स्पेशल कोर्ट में लंबित थी। ताजा आदेश के साथ, इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
इसे भी पढ़ें: इधर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमला करता रह गया, उधर भाजपा ने बड़ा खेल कर दिया, जारी हो गयी BJP Pradesh Prabharis List
एक मामला जो सालों तक पेंडिंग रहा
कलीना लाइब्रेरी का मामला भुजबल की उन लंबी कानूनी लड़ाइयों का हिस्सा रहा है, जो PWD मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में दिए गए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े आरोपों की वजह से शुरू हुई थीं। ACB ने 2016 में एक डिटेल्ड चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। एजेंसी का आरोप था कि भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट, प्रोजेक्ट में शामिल डेवलपर को दिए गए फायदों से जुड़े थे। इन कथित लेन-देन और कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीके पर बाद में स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
