MBBS दाखिले के लिए फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र मामला, देहरादून में SIT ने एक और आरोपी को पकड़ा
दिनांक -13/09/2026 को थाना रायपुर तथा थाना क्लेमेंटाउन पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा अपनी सरकार पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने हेतु ऑनलाइन आवेदन किये जाने तथा जांच के दौरान उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेज फर्जी पाये जाने के सम्बन्ध में प्राप्त तहरीरों के आधार पर थाना रायपुर पर मु0अ0सं0: 380/26 धारा 318(4) 338/336(2)/340(2) बीएनएस तथा थाना क्लेमेंटाउन पर मु0अ0सं0: 86/26 धारा: 318(4) 338/340(2)/61(2) बीएनएस के तहत अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किये गये. थाना रायपुर पर पंजीकृत अभियोग में विवेचना के दौरान धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई विवेचना प्रचलित है.
प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत सम्पूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं गहन परीक्षण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा श्रीमती जया बलोनी, पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण -1 के नेतृत्व में एस०आई०टी० का गठन किया गया.
एसआईटी टीम द्वारा प्रकरण में संलिप्त अभियुक्तों के विरूद्ध साक्ष्य संकलन की कार्यवाही करते हुए प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे मे लिया गया. एसआईटी जांच के दौरान उक्त सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये, जिस पर एसआईटी द्वारा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया, जिनके अवलोकन से उक्त अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई. *उक्त प्रकरण में पुलिस द्वारा पूर्व में दिनांक: 21-09-26 को प्रकरण में शामिल 02 अभियुक्तों 01: रूपेश पण्डित तथा 02: अरविन्द कुमार को गिरफ्तार किया गया था तथा अभियुक्त रूपेश की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिये गये 08 लाख रू0 बरामद किये गये थे.*
प्राप्त जानकारी व विवेचना के दौरान प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा प्रकरण में संलिप्त एक और *अभियुक्त धीरज श्रीवास्तव को मय वाहन संख्या: एम0पी0-04-वाई-0655 (कार टाटा नेक्सॉन) के गिरफ्तार किया गया. अभियुक्त के वाहन की तलाशी के दौरान वाहन से 558100/- रू0 बरामद हुए. उक्त धनराशि के सम्बन्ध में जानकारी करने पर अभियुक्त धीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा बताया गया कि बरामद धनराशि उसे रूपेश पंडित द्वारा फ्रीडम फाइटर कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी गई थी.
पूछताछ का विवरण
अभियुक्त से पूछताछ में पुलिस टीम को जानकारी प्राप्त हुई कि अभियुक्त धीरज श्रीवास्तव, भोपाल में 46 सी सेक्टर इंद्रपुरी थाना पिपलानी में एमबीबीएस वे (MBBS WAY) के नाम से आफिस संचालित करता है, जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था. तथा अभियुक्त रूपेश पण्डित से उसकी मुलाकात दो साल पहले श्रीमती मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हिटाणु, उत्तरकाशी में हुई थी तथा उसके बाद से ही दोनो अभियुक्त लगातार एक दूसरे के सम्पर्क में थे.
अभियुक्त अरविंद द्वारा अपनी पुत्री व अपने दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिये रूपेश से सम्पर्क करने पर रूपेश द्वारा इस सम्बन्ध में अपने साथी धीरज कुमार श्रीवास्तव से बात की थी, जिसके द्वारा उसे अपने एक अन्य साथी से लो मेरिट वाले बच्चों का एमबीबीएस में एडमिशन के बारे जानकारी की गई तो उसके द्वारा उन्हें उत्तराखण्ड में फ्रीडम फाइटर के कोटे में एडमिशन होने की बात बताई गई तथा उन्हें एडमिशन की प्रक्रिया के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए अपने एक परिचित, जिसकी तहसील व कचहरी में अच्छी सेटिंग है, से मिलने हेतु बताया गया.
जिसके बाद अभियुक्त धीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा रूपेश पण्डित व अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर तीनो अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे, जिसके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग-अलग मेडीकल कालेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया था. एसआईटी द्वारा प्रकरण से जुडे सभी पहलुओं की गहनता से विवेचना की जा रही है, उक्त प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी.
विवरण गिरफ्तार अभियुक्त
धीरज कुमार श्रीवास्तव पुत्र श्री दिवाकर कुमार श्रीवास्तव निवासी हाउस नंबर 61, खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, जिला भोपाल, मध्य प्रदेश, उम्र- 37 वर्ष.
बरामदगी
1- 5,58,100/- रू0 नगद *(अभियुक्त धीरज से बरामद)*
2- 08 लाख रू0 नगद *(अभियुक्त रूपेश की निशानदेही पर बरामद)*
पुलिस टीम
1- व0उ0नि0 भरत सिंह रावत
2- अ0उ0नि0 सुशील बलोनी
3- हे0का0 सोबन सिंह राणा
4- कां0 किशन पाल
कोलकाता: एसएसकेएम अस्पताल में नकली ओपीडी टिकट बेचने के आरोप में तीन गिरफ्तार
कोलकाता, 24 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोलकाता के सरकारी अस्पताल एसएसकेएम में नकली ओपीडी टिकट बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। गुरुवार को पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि दक्षिण कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में मरीजों और उनके परिवारों को कथित तौर पर नकली वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) टिकट बेचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान असद अली, मोहम्मद शाहिद और वहीद अहमद के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये तीनों एक ऐसे रैकेट का हिस्सा थे जो अस्पताल के ओपीडी टिकट काउंटर पर लगने वाली लंबी लाइनों का फायदा उठाते थे और मरीजों के परिजनों/रिश्तेदारों को ज्यादा कीमत पर नकली टिकट बेचते थे।
कोलकाता पुलिस के इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि जांच करने वाले इस नकली टिकट रैकेट के काम करने के तरीके, यह कितने समय से चल रहा था और क्या इसमें और भी लोग शामिल थे, इन सब बातों की जांच कर रहे हैं। अधिकारी सरकारी अस्पतालों में बड़ी गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार और दलाली की गतिविधियों के आरोपों की भी जांच कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा, हम एसएसकेएम की इस घटना में गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि वे नकली ओपीडी टिकट कैसे बनाते थे। पुलिस ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी टिकट जारी करने में गड़बड़ी की शिकायतें कुछ समय से मिल रही थीं। अस्पताल प्रशासन का आरोप था कि लोगों का एक समूह असली टिकट जैसे दिखने वाले नकली टिकट बनाता था और उन्हें मरीजों के परिवारों को बेचता था।
शिकायत मिलने के बाद भवानीपुर पुलिस स्टेशन ने जांच शुरू की। नकली टिकट के काम की जांच के अलावा, जांच करने वालों ने यह भी देखा कि आरोपी अस्पताल परिसर के बाहर संभावित खरीदारों की पहचान कैसे करते थे और उनसे कैसे संपर्क करते थे। आरोप है कि संदिग्ध लोग मरीजों के रिश्तेदारों को जल्दी ओपीडी टिकट दिलाने और लंबी लाइनों से राहत दिलाने का लालच देकर तय फीस से ज्यादा पैसे वसूलते थे।
जांच करने वालों ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अस्पताल परिसर और आस-पास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। कई कैमरों के फुटेज के विश्लेषण से आरोपियों की पहचान करने में पुलिस को मदद मिली। आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
--आईएएनएस
एसडी/डीएससी
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