Ganesh Visarjan Muhurat 2026: गणेश विसर्जन से पहले क्या करें? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Ganesh Visarjan Muhurat 2026: गणेश उत्सव के दौरान भक्त अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव अलग-अलग परंपराओं के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पांच, सात या दस दिनों तक मनाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। यदि आपके घर में गणपति की स्थापना सात दिनों के लिए की गई है, तो 20 सितंबर 2026, रविवार को गणेश विसर्जन किया जाएगा। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा, आरती और भोग लगाकर परिवार के साथ बप्पा को विदाई देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में विसर्जन को पूजा-अनुष्ठान के समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
7वें दिन गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
20 सितंबर को गणेश विसर्जन के लिए दिन में कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इनमें से किसी उपयुक्त समय पर विसर्जन कर सकते हैं।
- प्रातःकालीन शुभ समय: सुबह 7:42 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
- अपराह्न का शुभ समय: दोपहर 1:47 बजे से 3:18 बजे तक
- सायंकालीन शुभ समय: शाम 6:21 बजे से रात 10:47 बजे तक
- रात्रि चौघड़िया: रात 2:01 बजे से 3:29 बजे तक, 21 सितंबर
- उषाकाल: सुबह 4:58 बजे से 6:27 बजे तक, 21 सितंबर
गणेश विसर्जन से पहले क्या करें?
- गणपति विसर्जन से पहले घर में स्थापित भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और गणेश जी के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें फूल, दूर्वा, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें।
- भगवान गणेश को उनकी पसंद का भोग जैसे मोदक या लड्डू अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करें। पूजा के दौरान गणपति मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है।
- आरती पूरी होने के बाद भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना करें।
गणेश विसर्जन की सरल विधि
पूजा पूरी होने के बाद गणेश जी की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन के लिए तैयार किया जाता है। परंपरा के अनुसार प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा आगे सरकाकर बप्पा की विदाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को सावधानी से उठाकर घर के मुख्य द्वार तक लाया जाता है। इस दौरान भक्त गणपति बप्पा के जयकारे लगाते हुए विसर्जन स्थल की ओर जाते हैं। "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" जैसे जयघोष के साथ भगवान गणेश को विदाई दी जाती है। यदि प्रतिमा का विसर्जन किसी तालाब, नदी या अन्य जलाशय में किया जा रहा है, तो स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए।
घर पर गणेश विसर्जन कैसे करें?
यदि घर में स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना हो तो इसके लिए एक साफ और पर्याप्त बड़े पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। पात्र में स्वच्छ पानी भरें। श्रद्धा के अनुसार इसमें गंगाजल और फूल डाले जा सकते हैं। पूजा और आरती के बाद गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक उस पात्र में रखें। विसर्जन के दौरान जल्दबाजी न करें और प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पानी में प्रवाहित होने दें। मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा का घर पर विसर्जन करना सुविधाजनक और पर्यावरण के लिहाज से भी एक विकल्प हो सकता है। विसर्जन के बाद उस पानी और मिट्टी का उपयोग पौधों में करने की परंपरा भी कई परिवारों में अपनाई जाती है।
विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
गणेश विसर्जन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। प्रतिमा को फेंकने या असावधानी से रखने के बजाय उसे धीरे-धीरे विसर्जित करें। विसर्जन स्थल पर साफ-सफाई बनाए रखें और पूजा सामग्री को जलाशयों में इस तरह न डालें जिससे पानी प्रदूषित हो। फूल, सजावटी सामग्री और अन्य पूजा अवशेषों का उचित तरीके से निपटारा करना भी जरूरी है। यदि सार्वजनिक विसर्जन स्थल निर्धारित किया गया है, तो प्रशासन द्वारा बताए गए स्थान और नियमों का ही पालन करें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
आज का पंचांग 20 सितंबर 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, सूर्योदय-सूर्यास्त
आज की तिथि क्या है?: आज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, जो शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
- वार: रविवार
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा, अगले दिन भोर लगभग 4:34 बजे तक
- योग: सौभाग्य, दोपहर 3:22 बजे तक
- करण: कौलव, शाम 5:52 बजे तक
शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 बजे से 5:27 बजे तक
- अमृत काल: रात 11:12 बजे से 21 सितंबर की रात 1:00 बजे तक
- विजय मुहूर्त: 11:55 बजे से 12:44 बजे तक
राहुकाल
- राहुकाल: शाम 4:53 बजे से 6:25 बजे तक
- यमगण्ड: दोपहर 12:19 बजे से 1:51 बजे तक
- गुलिक: दोपहर 3:22 बजे से 4:53 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: शाम 4:47 बजे से 5:36 बजे तक
सूर्योदय-सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 6:14 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:25 बजे
- चंद्रोदय: दोपहर लगभग 2:20 बजे
- चंद्रास्त: रात लगभग 12:12 बजे (21 सितंबर)
आज के व्रत
महानंदा नवमी व्रत
आज का पर्व
महानंदा नवमी- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर 20 सितंबर 2026 को यह व्रत बताया गया है।
आज का धार्मिक महत्व
महानंदा नवमी पर देवी उपासना की परंपरा बताई जाती है। इस अवसर पर माता दुर्गा के नंदा स्वरूप और मां लक्ष्मी की पूजा, मंत्र-जप, व्रत तथा दान-पुण्य किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति और आर्थिक उन्नति की कामना से पूजा करते हैं। नवमी तिथि 20 सितंबर को शाम 5:52 बजे तक है, इसलिए व्रत और पूजा की विधि स्थानीय परंपरा के अनुसार इसी तिथि को ध्यान में रखकर की जा सकती है।
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