Air Raid Alert in mecca: इतिहास में पहली बार मक्का में बजा एयर-रेड सायरन; हूती विद्रोहियों का हमला और रेड अलर्ट पर सऊदी अरब
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच संघर्ष की लपटें अब इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल तक पहुंच गई हैं। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर लगातार दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच पवित्र शहर मक्का में अचानक एयर-रेड सायरन गूंज उठे।
सऊदी अरब के आधुनिक इतिहास में यह पहला मौका है जब नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से मक्का शहर में औपचारिक रूप से हवाई हमले का अलर्ट जारी कर नागरिकों और अकीदतमंदों को सुरक्षित स्थलों पर रहने की हिदायत दी गई।
सऊदी एयर डिफेंस ने हवा में नष्ट किया हूती ड्रोन
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन और एयर डिफेंस सिस्टम ने तत्परता दिखाते हुए मक्का के हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हूती विद्रोहियों के एक आत्मघाती ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर हवा में ही मार गिराया। इस कार्रवाई के तुरंत बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मक्का शहर पर मंडरा रहा प्रत्यक्ष खतरा टल गया है।
इसके साथ ही प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें, घबराएं नहीं और घटना से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों या अनधिकृत वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से बचें।
हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला और तेल सुविधाओं में नुकसान
यमन में भड़के इस ताजा संघर्ष के दौरान हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के दक्षिणी और पश्चिमी प्रांतों को लक्षित करते हुए अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त हमला बोला है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल कर सऊदी अरब के खमीस मुशैत में स्थित 'किंग खालिद एयरबेस' और कई महत्वपूर्ण तेल बुनियादी ढांचों पर बमबारी करने का दावा किया है। इन हमलों के कारण कुछ तेल सुविधाओं में आग लगने की खबरें हैं और कई लोग घायल हुए हैं, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में सैन्य अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
मदीना हवाई अड्डे पर उड़ानें निलंबित और लाल सागर में गतिरोध
मक्का और आसपास के प्रमुख शहरों में मंडराते हवाई खतरे को देखते हुए सऊदी उड्डयन प्राधिकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। मदीना शहर के 'प्रिंसेस मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे' (MED) की ओर जाने वाली सभी व्यावसायिक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और हमलों की नई धमकियों के बाद रियाद और यमन सीमा पर भारी सैन्य जमावड़ा हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
US Tariff on India: ट्रंप भारत पर लगा सकते हैं 100% टैरिफ, अगर ये बिल पास हुआ तो हो जाएगी बड़ी मुश्किल
US Tariff on India: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने मंगलवार को उस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला 2026 का अधिनियम नाम के इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए हुए प्रक्रियात्मक मतदान में प्रस्ताव 214-211 के अंतर से पास हुआ। अब बिल पर हाउस में अंतिम मतदान होना है।
भारत और चीन पर क्यों नजर?
प्रस्तावित कानून का निशाना सिर्फ रूस नहीं है। इसमें उन देशों पर भी आर्थिक दबाव डालने का प्रावधान है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं।
भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। ऐसे में कानून लागू होने की स्थिति में दोनों देशों के अमेरिकी बाजार में जाने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि भारत पर सीधे 100% टैरिफ लागू हो गया है। प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात करता है; इसका इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किया जाएगा, यह आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।
हाउस में 214-211 से आगे बढ़ा बिल
हाउस में बिल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव पर 214 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 211 ने विरोध किया। इस मतदान ने डेमोक्रेटिक नेतृत्व को भी आश्चर्यचकित किया, क्योंकि दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ मतदान किया। बिल को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच मुख्य विवाद राष्ट्रपति को मिलने वाली अतिरिक्त टैरिफ शक्तियों को लेकर है।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि विधेयक राष्ट्रपति को पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों के बिना व्यापक टैरिफ अधिकार दे सकता है।
सीनेट पहले ही कर चुका है पास
यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से पहले ही 86-11 के वोट से पारित हो चुका है। सीनेट में पारित संस्करण रूस के नेताओं, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई का प्रावधान रखता है।
कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का कहना है कि रूसी कच्चे तेल से होने वाली कमाई यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध को आर्थिक मदद देती है।
‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई
बिल में उन जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिनका इस्तेमाल रूस से तेल की डिलीवरी के दौरान मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए किए जाने का आरोप है।
इस तरह प्रस्तावित कानून रूस के ऊर्जा कारोबार के साथ-साथ उससे जुड़े वित्तीय और समुद्री नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ाने की कोशिश करता है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूस से ऊर्जा खरीद पर प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई है। यदि कानून लागू होता है और ट्रंप प्रशासन भारत को उन देशों की श्रेणी में रखता है जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाना है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है।
हालांकि, अंतिम प्रभाव कई बातों पर निर्भर करेगा कानून का अंतिम स्वरूप क्या रहता है, राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं और किन देशों को टैरिफ के दायरे में रखा जाता है।
इसलिए फिलहाल इसे भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ लागू होने की खबर के बजाय संभावित टैरिफ अधिकार देने वाले विधेयक के रूप में समझना ज्यादा सही है।
हाउस की अंतिम मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा बिल
हाउस में अंतिम मंजूरी मिलने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। हाउस का मौजूदा सत्र जल्द अवकाश पर जाने वाला है, इसलिए इस विधेयक को लेकर अमेरिकी संसद में आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
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