दोस्ती की मिठास बढ़ा देंगे ये 8 संदेश, फ्रेंडशिप डे पर अपनों को भेजें दिल छू लेने वाली शुभकामनाएं
दोस्त हमारी जिंदगी का वह हिस्सा होते हैं, जो हर खुशी में सबसे पहले मुस्कुराते हैं और हर मुश्किल में बिना बुलाए साथ खड़े हो जाते हैं। कई बार हम अपने दिल की बात शब्दों में नहीं कह पाते, लेकिन फ्रेंडशिप डे ऐसा खास मौका होता है जब हम अपने दोस्तों को बता सकते हैं कि वे हमारी जिंदगी में कितने जरूरी हैं। एक छोटा-सा मैसेज भी दोस्त के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है।
हर साल अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों को गिफ्ट, फ्रेंडशिप बैंड और प्यारे संदेश भेजकर अपनी दोस्ती का जश्न मनाते हैं। अगर आप भी इस खास मौके पर अपने दोस्त को कुछ अलग और दिल से कहना चाहते हैं, तो यहां दिए गए 8 आसान और खूबसूरत फ्रेंडशिप डे विश आपके काम आएंगे।
फ्रेंडशिप डे क्यों होता है इतना खास?
दोस्ती ऐसा रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं। परिवार हमें जन्म से मिलता है, लेकिन दोस्त हमारी पसंद होते हैं। यही दोस्त स्कूल की शरारतों से लेकर कॉलेज की यादों और जिंदगी के कठिन समय तक हर कदम पर साथ रहते हैं। इसलिए फ्रेंडशिप डे सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि उन रिश्तों का जश्न है जो भरोसे, प्यार और साथ से बने होते हैं।
दोस्तों को भेजें ये 8 दिल छू लेने वाले फ्रेंडशिप डे विश
1. दोस्ती वो नहीं जो हर दिन साथ रहे,
दोस्ती वो है जो हर मुश्किल में याद आए।
आप जैसे दोस्त जिंदगी की सबसे खूबसूरत दौलत हैं।
हैप्पी फ्रेंडशिप डे।
2. रिश्ते तो बहुत बनते हैं,
लेकिन सच्ची दोस्ती बहुत कम मिलती है।
आप जैसा दोस्त मिलना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी है।
फ्रेंडशिप डे की ढेर सारी शुभकामनाएं।
3. जब दुनिया साथ छोड़ देती है,
तब सच्चा दोस्त हाथ पकड़ लेता है।
आपका साथ हमेशा यूं ही बना रहे।
हैप्पी फ्रेंडशिप डे मेरे दोस्त।
4. हंसी में साथ, गम में सहारा,
यही है दोस्ती का सबसे प्यारा नजारा।
हमारी दोस्ती हमेशा ऐसे ही बनी रहे।
फ्रेंडशिप डे मुबारक।
5. कुछ रिश्ते खून से नहीं,
दिल से जुड़ते हैं।
आप मेरी जिंदगी का वही सबसे खास रिश्ता हैं।
हैप्पी फ्रेंडशिप डे।
6. भगवान हर किसी को
एक सच्चा दोस्त जरूर दे।
मुझे तो यह खुशी पहले ही मिल चुकी है,
क्योंकि मेरे पास आप जैसे दोस्त हैं।
फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं।
7. जिंदगी के हर सफर में
अगर दोस्त साथ हो,
तो मुश्किल रास्ते भी आसान लगते हैं।
हमारी दोस्ती हमेशा यूं ही मुस्कुराती रहे।
हैप्पी फ्रेंडशिप डे।
8. दोस्ती का रिश्ता सबसे अनमोल होता है,
जिसमें न कोई लालच होता है,
न कोई शर्त होती है।
बस दिल से निभाया गया साथ होता है।
फ्रेंडशिप डे की हार्दिक शुभकामनाएं।
लहर-लहर:समाज में रहने की पहली शर्त ईमानदारी, सड़क पर सही चलना भी इसकी मिसाल
दुनिया में दो तरह के जानवर हैं- एक जो अकेले रहते हैं जैसे तेंदुआ है, जगुआर है। दूसरे कुछ जानवर हैं, जो समूह में रहते हैं। वो अकेले नहीं रह सकते; उनको समूह में ही रहना है। इंसान भी वैसा जानवर है, जिसे समूह में ही रहना है। अब इतने लोग साथ में रहेंगे कैसे? तो ये बात माननी पड़ेगी हमको कि हम एक-दूसरे को धोखा नहीं देंगे, हम एक-दूसरे को ऐसी बात नहीं कहेंगे, जो सच्ची नहीं है। हम एक-दूसरे से वादा करेंगे तो निभाएंगे। अगर वो कोई हमारा भला करेगा तो उसका धन्यवाद भी करेंगे और हो सका तो हम भी उसका कुछ भला करेंगे। ईमानदारी क्या है? आप जब सड़क पर कार चलाते हैं तो हिंदुस्तान में यह कानून है कि आप लेफ्ट में ड्राइव करेंगे। कार को लेफ्ट में ड्राइव करना ईमानदारी है। कानून है कि सिग्नल लाल होगा तो आपको रुकना है तो सिग्नल लाल पर रुकना ईमानदारी है। अब अगर आपने यह ईमानदारी नहीं की तो आपकी गाड़ी को चोट लग जाएगी या आप किसी और को चोट लगा देंगे या ट्रैफिक जाम हो जाएगा। आज समाज में ये जो ट्रैफिक जाम दिखते हैं ये बेईमानी की वजह से हैं और हर आदमी को उससे नुकसान होता है। तो ईमानदारी आराम से जीने की, शांति और सुकून से जीने की पहली शर्त है। मैं उर्दू में लिखता हूं। स्क्रिप्ट में संवाद उर्दू लिपि में लिखे जाते थे, जबकि बाकी विवरण अंग्रेजी में होता था, जिसे हम बोलकर लिखवाते थे। मुझे और सलीम साहब को टाइप करना नहीं आता था। एक सरदार जी हमारे लिए टाइप कर देते थे, लेकिन यूनिट के लोगों जैसे रमेश सिप्पी साहब और अन्य सदस्यों को स्क्रिप्ट हिंदी में चाहिए होती थी। रमेश सिप्पी साहब के एक सहायक थे खालिद साहब। मैंने उन्हें यह जिम्मेदारी दे दी थी कि उर्दू लिपि में लिखे संवादों को देवनागरी में लिखकर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर तक पहुंचा दें। खालिद साहब बहुत शरीफ, शांत और संकोची व्यक्ति थे। समय बीतने पर वे बूढ़े होकर रिटायर हो गए। उन्हें सिप्पी फिल्म्स से वेतन मिलना भी बंद हो गया था। इसलिए मैं उन्हें हर महीने कुछ पैसे भेजने लगा। बाद में उनकी मृत्यु का पता चला। मुझे मालूम था कि उनकी पत्नी और बच्चे हैं, इसलिए मैं वही रकम उनकी पत्नी को भेजने लगा। उनका बेटा हर महीने पैसे लेने आता और अपनी मां को दे देता था। इस बात की पुष्टि हमारे शुभचिंतक हारून साहब से होती रहती थी, जो उस परिवार के संपर्क में थे। तो एक दिन वह बेटा आया जो 30 साल से ऊपर का ही रहा होगा। उसने कहा, साहब, अगले महीने से पैसे भेजना बंद कर दीजिए। मेरी वालिदा का इंतकाल हो गया है। अब आपका पैसा लेना गलत होगा। अच्छा, वह बेटा न बहुत अमीर था, न किसी बड़ी नौकरी या बड़े बिजनेस में था। उसकी ईमानदारी देखकर मुझे खुशी भी हुई, हैरत भी और इत्मीनान भी हुआ। मैं उस आदमी से बहुत ही मुतास्सिर हुआ। तो ऐसा नहीं है कि दुनिया में शराफत नहीं है, नेकी और ईमानदारी नहीं बची है। इंसानों के सुरक्षित रहने के लिए ईमानदारी एक जरूरत है। और सबसे पहली जो ईमानदारी आपको दिखाई देती है वो मां में दिखाई देती है। बच्चे की तरफ मां के जो भी कर्तव्य हैं वो निभाती है। कोई मां पागल होगी तो बात अलग है, वरना वो बच्चे से बेईमानी नहीं करती है। समाज में जब आप पैदा होते हैं, तो सबसे पहला इंसान जिससे आपका परिचय होता है और जिसके कारण आप इस दुनिया में आते हैं, वह आपकी मां है। और वह मां आपके प्रति ईमानदार है। यानी आपको अपनी मां से पहला सबक ईमानदारी का ही मिलता है। अब आपने बाद में बेईमानी के सबक कहां से सीखे, यह आपको खुद सोचना चाहिए। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
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