Bihar Cabinet: गांधी जयंती पर रिहा होंगे पात्र कैदी, विशेष सजा माफी को मिली मंजूरी
बिहार मंत्रिमंडल ने बुधवार को पात्र सजायाफ्ता कैदियों को एकमुश्त विशेष सजा माफी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके तहत चयनित कैदियों को गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर को रिहा किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि विधि विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, बिहार जेल मैनुअल, 2012 के नियम 430 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत चिन्हित श्रेणियों के पात्र दोषी कैदियों को निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर विशेष सजा माफी का लाभ दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2026) के अवसर पर कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सजा को पूर्ण या आंशिक रूप से माफ कर सकेगी। अब संबंधित प्राधिकार पात्र कैदियों की अंतिम सूची तैयार करेंगे। मंत्रिमंडल ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर पटना में माता सीता महिला विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी दी।
इसके लिए बिहार विशेष विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की धारा 3(1) के तहत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य व्ययों के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार, बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती पर विश्वविद्यालय की स्थापना तथा उसके लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
मंत्रिमंडल ने पुलिस आधुनिकीकरण सहायता योजना (एएसयूएमपी) के तहत 24.50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 50 ड्रोन खरीदने की मंजूरी दी। इनका उपयोग भीड़ नियंत्रण, नक्सल विरोधी अभियान तथा आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जाएगा। चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास ऋण योजना को भी स्वीकृति दी।
योजना के तहत पशुपालकों को बैंक ऋण पर 100 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा और उन्हें केवल मूलधन चुकाना होगा। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों की अवधि के लिए 160 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी केस: चार्जशीट के बाद दो आरोपियों की जमानत पर सुनवाई टली
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में बाकी बचे दो आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई बुधवार को टाल दी गई। यह सुनवाई अब बृहस्पतिवार को होगी। कथित चढ़ावा चोरी मामले में बाकी बचे दो आरोपियों - सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई होनी थी।
वकील कुल शेखर सिंह ने बताया कि यह सुनवाई भ्रष्टाचार-रोधी अदालत के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के सामने होनी थी लेकिन पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद स्थानीय बार एसोसिएशन ने आपत्ति जताई जिसकी वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अब बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।’’ उन्होंने कहा कि आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और अदालत ने उसका संज्ञान भी ले लिया है लेकिन बचाव पक्ष को अभी तक उस दस्तावेज की प्रति नहीं मिली है। सिंह ने कहा, ‘‘जब हमें आरोप पत्र की प्रति मिल जाएगी तब हमारी ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई या जवाब के बारे में फैसला किया जाएगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय बार एसोसिएशन को मिली जानकारी के मुताबिक आरोप पत्र में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नाम शामिल नहीं थे और उन पर कोई आरोप भी नहीं लगाया गया था।
इस मामले में जब सुनवाई शुरू हुई थी तो स्थानीय बार एसोसिएशन ने पुलिस को एक अर्जी देकर मांग की थी कि ट्रस्ट के अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया जाए। अदालत ने सोमवार को तीन आरोपियों - अविनाश शुक्ला, मनीष कुमार यादव और रमाशंकर मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और मंगलवार को अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडे की अर्जी भी नामंजूर कर दी थी। सिंह ने बताया कि इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है।
इस मामले में गिरफ्तार किये गये कर्मचारियों में से ज्यादातर वे लोग हैं जिन्हें मंदिर में नकद दान की गिनती के लिए तैनात किया गया था। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिये गत 13 जून को राज्य सरकार द्वारा बनाई गई विशेष अन्वेषण टीम (एसआईटी) की शुरुआती रिपोर्ट के बाद 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक जांचकर्ताओं ने इस मामले में अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं।
एसआईटी ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि वह 25 सितंबर तक आरोप पत्र दाखिल कर देगी।
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