Angel One के Dinesh Thakkar ने Mumbai के Juhu में 711 करोड़ में खरीदी सात मंजिला इमारत
मुंबई में महंगे घरों की खरीद का सिलसिला लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब एंजेल वन के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक दिनेश ठक्कर का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है। उन्होंने मुंबई के जुहू इलाके में एक पूरी सात मंजिला आवासीय इमारत खरीदने के लिए करीब 711 करोड़ रुपये का समझौता किया है। एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने इसे देश में एक ही आवासीय इकाई की सबसे बड़ी खरीद बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ठक्कर ने जुहू तारा रोड स्थित एम्बेसी टेरेजा परियोजना की पूरी सात मंजिला इमारत खरीदने पर सहमति जताई है। इस इमारत में करीब 63,000 वर्ग फुट का रेरा के अनुसार कालीन क्षेत्र है। सौदे की कुल कीमत करीब 711 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें पंजीकरण शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर भी शामिल हैं। इस हिसाब से संपत्ति की कीमत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट बैठती है।
दिनेश ठक्कर एंजेल वन लिमिटेड के संस्थापक हैं और कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं। एंजेल वन शेयर कारोबार और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी के माध्यम से लोग शेयरों और अन्य निवेश साधनों में ऑनलाइन कारोबार और निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा सलाह, मार्जिन सुविधा, स्वचालित कारोबार और खरीद-बिक्री के बेहतर विकल्प जैसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
ठक्कर ने इस महंगी संपत्ति को खरीदने की वजह भी बताई है। उनके अनुसार, नया घर तलाशते समय जुहू की जगह, निजीपन, खुला स्थान और समुद्र का शानदार नजारा उनके लिए खास मायने रखता था। उन्होंने कहा कि जुहू मुंबई के उन इलाकों में है, जिसकी अपनी अलग पहचान है। वह ऐसा घर चाहते थे, जो उनके परिवार के लिए आरामदायक और लंबे समय तक रहने के लिए खास जगह बन सके।
गौरतलब है कि एम्बेसी डेवलपमेंट्स ने इस सौदे के लिए ठक्कर के साथ समझौता किया है। एम्बेसी टेरेजा करीब दो एकड़ में फैली परियोजना है, जिसमें कुल पांच इमारतें हैं। परियोजना को विकास प्रबंधन मॉडल के तहत तैयार किया जा रहा है। पूरी परियोजना से एम्बेसी को करीब 3,000 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद बताई गई है।
एम्बेसी समूह के अध्यक्ष जितेंद्र विरवानी ने ठक्कर की खरीद को मुंबई में कंपनी की पहचान और काम पर भरोसे के रूप में बताया है। उनके मुताबिक, शहर में परियोजना शुरू होने के करीब 18 महीने के भीतर इतने बड़े सौदे का होना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है।
जुहू में संपत्ति की कीमत पहले से ही काफी ऊंची है। मौजूदा बाजार आंकड़ों के अनुसार, इलाके में घरों की कीमत करीब 70,000 रुपये से लेकर 1.3 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती है। कीमत में परियोजना की स्थिति, समुद्र का नजारा, जगह और सुविधाओं जैसे कई पहलुओं का असर पड़ता है। ऐसे में ठक्कर का करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट का सौदा इस इलाके की ऊंची कीमतों के दायरे में आता है।
यह खरीद ऐसे समय हुई है जब मुंबई में महंगे घरों की मांग मजबूत बनी हुई है। इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी और सीआरई मैट्रिक्स के आंकड़ों के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में मुंबई में 10 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री 12 प्रतिशत बढ़कर 18,512 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इस दौरान ऐसे 957 घर बिके, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 761 थी।
इंडिया सोथबीज इंटरनेशनल रियल्टी के कार्यकारी निदेशक सुदर्शन शर्मा के अनुसार, 711 करोड़ रुपये का यह सौदा मुंबई की नई अति-महंगी आवासीय परियोजनाओं में देखी जा रही कीमतों के अनुरूप है। खासकर समुद्र के सामने स्थित बड़े घरों, कम घनत्व वाली परियोजनाओं और बेहतर सुविधाओं वाली संपत्तियों की कीमत काफी ऊंची बनी हुई है।
बता दें कि म्बेसी टेरेजा की तुलना शहर की कुछ अन्य समुद्र के सामने स्थित महंगी परियोजनाओं से भी की जा रही है। मुंबई में संपत्ति बाजार के जानकारों के मुताबिक, ऐसे इलाकों में सीमित जमीन, समुद्र का नजारा और निजीपन जैसी खूबियां संपत्तियों की कीमत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
दिनेश ठक्कर की यह खरीद वित्तीय क्षेत्र में बढ़ती संपत्ति और मुंबई के महंगे आवासीय बाजार के बीच के रिश्ते को भी दिखाती है। एम्बेसी समूह की रियल एस्टेट के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी मौजूदगी है। समूह का संबंध एम्बेसी ऑफिस पार्क्स आरईआईटी और वीवर्क इंडिया से भी रहा है। मुंबई महानगर क्षेत्र के अलावा समूह दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई और इंदौर में भी परियोजनाएं चला रहा है।
N Chandrasekaran की नियुक्ति पर बोले Sharad Pawar, Tata Trusts के अधिकारों का हो पूरा सम्मान
टाटा समूह के भीतर नेतृत्व और कंपनी के संचालन को लेकर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी है। पवार ने कहा है कि टाटा समूह की पुरानी सामाजिक सोच और संस्थागत व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स को मिले अधिकारों का कंपनी के फैसलों में सम्मान किए जाने की बात कही है।
शरद पवार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर मराठी भाषा में एक संदेश शेयर किया है। इसमें उन्होंने टाटा समूह की विरासत और उसके सामाजिक कामकाज का जिक्र किया है। पवार के मुताबिक, जमशेदजी टाटा और टाटा परिवार ने कारोबार को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के लिए काम करने की सोच को भी महत्व दिया है। उनका कहना है कि इसी वजह से टाटा ट्रस्ट्स की संस्थागत भूमिका को सुरक्षित रखना जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब टाटा सन्स के निदेशक मंडल के हालिया फैसलों को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। 17 सितंबर को हुई बैठक में निदेशक मंडल ने एन. चंद्रशेखरन को टाटा सन्स के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एक और पांच साल के लिए बनाए रखने का फैसला किया था। मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना है। बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में चार मत पड़े, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इसी बैठक में टाटा सन्स को शेयर बाजार में लिस्टिंग करने की दिशा में भी आगे बढ़ने का फैसला किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से टाटा सन्स को लिस्टिंग करने से जुड़े नियमों के कारण यह मुद्दा पहले से चर्चा में है। कंपनी के बोर्ड के फैसलों पर अंतिम प्रक्रिया और शेयरधारकों की भूमिका आगे महत्वपूर्ण रहने वाली है।
शरद पवार ने अपने संदेश में टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया है। सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट समेत संबंधित ट्रस्ट्स के पास टाटा सन्स में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा समूह की यह व्यवस्था सामान्य कारोबारी कंपनियों से अलग है, क्योंकि ट्रस्ट्स से जुड़ा धन लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और कला जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं को समर्थन देता रहा है।
इन संस्थाओं में मुंबई का टाटा मेमोरियल अस्पताल, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय प्रदर्शन कला केंद्र शामिल हैं। पवार ने कहा है कि टाटा ट्रस्ट्स की सामाजिक प्रतिबद्धता और संस्थागत भूमिका को बनाए रखना देश और महाराष्ट्र के विकास से भी जुड़ा विषय है।
गौरतलब है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने अलग रुख अपनाया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा सन्स की नियमावली के तहत अध्यक्ष की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की जरूरी सहमति होनी चाहिए। ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशकों में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन शामिल हैं। 17 सितंबर की बैठक में नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि वेणु श्रीनिवासन ने समर्थन किया था।
टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि दोनों नामित निदेशकों की अलग-अलग राय होने की स्थिति में अध्यक्ष की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा प्रस्ताव नियमों के मुताबिक मान्य नहीं माना जा सकता। ट्रस्ट्स ने इस मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ से मिली कानूनी राय का भी उल्लेख किया है।
दूसरी ओर, टाटा सन्स ने अपने बोर्ड के फैसले को बहुमत से पारित बताया है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध पर अपने पहले के फैसले पर दोबारा विचार किया और फिर उन्हें अगले पांच साल के लिए अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया।
बता दें कि टाटा समूह में ट्रस्ट्स की भूमिका लंबे समय से उसकी पहचान का अहम हिस्सा रही है। यही वजह है कि मौजूदा विवाद केवल अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के संचालन, शेयरधारकों के अधिकार और टाटा समूह की भविष्य की संरचना से भी जुड़ा हुआ है। शरद पवार ने भी अपने बयान में इसी संस्थागत व्यवस्था और सामाजिक विरासत को बनाए रखने पर जोर दिया।
फिलहाल टाटा सन्स के बोर्ड के फैसलों और टाटा ट्रस्ट्स की आपत्तियों के बीच आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। आने वाले समय में शेयरधारकों की बैठक और कंपनी के नियमों से जुड़े कदम इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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