UN में पेज़ेश्कियान का अमेरिका-इजरायल पर हमला: मारे गए बच्चों की तस्वीर लेकर बोले- हम खुद आतंक के शिकार हैं
न्यूयॉर्क। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमेरिका और इजरायल पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान पर किए गए हमलों में आम नागरिकों से जुड़ी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। पेज़ेश्कियान ने ईरान की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया और कहा कि उनका देश अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे देश से अनुमति नहीं मांगेगा।
पेज़ेश्कियान का यह भाषण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया था और परमाणु हथियारों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
पेज़ेश्कियान के भाषण के दौरान US प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट
पेज़ेश्कियान के भाषण की शुरुआत के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के एक अधिकारी सभा कक्ष से बाहर निकल गए। उपलब्ध लाइव रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान वॉकआउट किया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब पेज़ेश्कियान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों का जवाब दे रहे थे, जिनमें ईरान की नीतियों और परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठाए गए थे।
❗️‘We Are Victims of Terrorism, Not Terrorists’ – Iran’s Pezeshkian Responds to Trump’s Speech at UNGA
— RT_India (@RT_India_news) September 23, 2026
“I come from an Iran where our esteemed Supreme Leader was assassinated without any legal justification or reason.
I come from an Iran where a school was bombed. You see… https://t.co/Ydh9QvLqla pic.twitter.com/HExOfowN1N
'ईरानी लोग आतंकवाद के शिकार हुए'
पेज़ेश्कियान ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के लोग आतंकवाद का शिकार हुए हैं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि उनके हमलों में विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले का भी जिक्र किया और कहा कि युद्ध की शुरुआत में एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें बच्चों की जान गई।
पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने हमलों का जवाब दिया है, लेकिन उनके अनुसार ईरानी सेना ने आम नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया। ये दावे ईरानी राष्ट्रपति के अपने संबोधन का हिस्सा थे।
अमेरिका और इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके देश को मजबूर होकर अपनी रक्षा करनी पड़ी।
पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान पर थोपे गए हमलों में निर्दोष लोगों को नुकसान हुआ और उनका देश अपनी रक्षा के लिए कार्रवाई करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी दूसरे देश पर हमला करने या क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की नीति नहीं रखता।
'पिछले 200 वर्षों में ईरान ने किसी पर हमला नहीं किया'
पेज़ेश्कियान ने अपने भाषण में दावा किया कि पिछले 200 वर्षों में ईरान ने किसी देश पर हमला नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमता की जरूरत है, लेकिन उसका उद्देश्य दूसरे देशों को धमकाना नहीं है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश विकास के लिए ऊर्जा चाहता है और अपनी रक्षा क्षमता को किसी बाहरी अनुमति पर निर्भर नहीं रखेगा।
परमाणु हथियारों पर क्या बोले पेज़ेश्कियान?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा उनके भाषण में प्रमुख रहा। पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार वह नहीं छोड़ेगा।
उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक पर प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगा।
यह रुख ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद का एक प्रमुख हिस्सा है। अमेरिकी पक्ष ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाता रहा है। ट्रंप ने भी संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख दोहराया।
अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत के संकेत भी
दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क भी जारी है। ट्रंप ने 22 सितंबर को कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और उन्होंने समझौते की संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे।
वहीं, ईरानी अधिकारियों ने भी कहा है कि यदि अमेरिकी सैन्य दबाव कम होता है और कुछ शर्तें पूरी होती हैं तो ईरान बातचीत और तनाव कम करने के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
पेज़ेश्कियान ने UN में क्या संदेश दिया?
पेज़ेश्कियान के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े फैसले खुद लेने का अधिकार रखता है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के हमलों पर ईरान का पक्ष रखा और परमाणु हथियार बनाने के आरोपों को खारिज किया।
वहीं, अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अपनी सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के बयानों से साफ है कि परमाणु कार्यक्रम, सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं।
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