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एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट और जेप्टो पर शुरू की दंडात्मक कार्रवाई

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। देश के खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने प्रमुख ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों अमेजन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और जेप्टो के खिलाफ विभिन्न नियामकीय उल्लंघनों को लेकर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। एफएसएसएआई के अनुसार, इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर भ्रामक दावों वाले खाद्य उत्पादों के प्रचार-प्रसार और कुछ प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा रही है।

एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जानकारी देते हुए कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर नियामकीय अनुपालन की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें उत्पादों की गलत ब्रांडिंग, उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावे और कुछ प्रतिबंधित अथवा विषैले खाद्य पदार्थों की बिक्री एवं प्रदर्शन जैसे मामले शामिल हैं।

नियामक के अनुसार, हैपिलो प्रीमियम डेट बाइट्स - जेस्टी ऑरेंज से जुड़े कुछ दावे और उत्पाद संबंधी जानकारियां खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। इस मामले में अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, स्विगी इंस्टामार्ट प्राइवेट लिमिटेड, जेप्टो मार्केटप्लेस प्राइवेट लिमिटेड और बिगबास्केट की इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन विवरण में दी गई जानकारी उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि खरीदारी करते समय किसी प्रकार का भ्रम न हो।

एफएसएसएआई ने मिल्की मिस्ट के कुछ उत्पादों से जुड़े दावों और सूचनाओं को भी नियामकीय मानकों के अनुरूप नहीं पाया। इनमें फ्रेस लो फैट क्रीम, फार्म फ्रेश दही और ग्रीक योगर्ट जैसे उत्पाद शामिल हैं।

इस मामले में स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। नियामक यह जांच कर रहा है कि उत्पादों से जुड़े दावे और विज्ञापन खाद्य सुरक्षा एवं लेबलिंग नियमों का पालन करते हैं या नहीं।

एफएसएसएआई ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर धतूरा के फल और बीजों की बिक्री एवं प्रदर्शन को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। नियामक के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत ऐसे उत्पादों की बिक्री से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया गया है।

इस मामले में अमेजन सेलर सर्विसेज, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट समेत कुछ प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। एफएसएसएआई का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे उत्पादों की उपलब्धता को गंभीरता से लिया जा रहा है।

हाल के महीनों में एफएसएसएआई ने ऑनलाइन खाद्य वितरण और किराना प्लेटफॉर्म्स की निगरानी बढ़ाई है। खाद्य सुरक्षा, लाइसेंसिंग, उत्पादों के भंडारण, हैंडलिंग और नियामकीय अनुपालन से जुड़े मामलों में जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग भी डार्क स्टोर्स, गोदामों और वितरण केंद्रों का निरीक्षण तेज कर चुके हैं, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले खाद्य उत्पाद निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

पिछले छह महीनों में एफएसएसएआई ने खाद्य कारोबार संचालकों (एफबीओ) और ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कई प्रवर्तन कार्रवाइयां की हैं। नियामक लगातार उपभोक्ताओं को भी इन कार्रवाइयों की जानकारी दे रहा है, ताकि खाद्य सुरक्षा और जागरूकता को बढ़ावा मिल सके।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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‘महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना, रेप का प्रयास नहीं’ हाईकोर्ट के आदेश का सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने एक महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने दबाने के आरोप को रेप की कोशिश नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया है. बता दें, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्वतः संज्ञान लिया है. सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश कुछ टिप्पणियां ऐसी थी कि जिन पर विचार करना आवश्यक है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि फैसले को पलटने से पहले आरोपी को सुनवाई का मौका जरूर दिया जाएगा. 

क्या था पटना हाईकोर्ट का फैसला?

केस 2008 की घटना से जुड़ा हुआ है. मामला 2008 की एक घटना से जुड़ा है. अभियोजन के अनुसार, बांका जिले के अमरपुर में एक फोटो स्टूडियो में आरोपी ने महिला के पिता को फोटो देखने के बहाने बाहर भेज दिया था. आरोप था कि इसके बाद उसने दरवाजा बंद कर महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर छेड़छाड़ की. महिला के शोर मचाने पर उसके पिता मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास और अन्य आरोपों में दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की थी.

पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ऐसा कोई स्पष्ट कृत्य सामने नहीं आया, जिससे दुष्कर्म के प्रयास की मंशा साबित हो. अदालत ने माना कि आरोपों से महिला की लज्जा भंग करने का अपराध बनता है, लेकिन दुष्कर्म के प्रयास की धारा लगाने का कोई मजबूत आधार नहीं है. इसके बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करके हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया.  

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया स्वतः संज्ञान?

सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट के इस आदेश का जिक्र हुआ था. उस समय वकीलों ने अदालत को बताया कि पटना हाईकोर्ट का फैसला उन परिस्थितियों से मिलता-जुलता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले में हस्तक्षेप कर चुका है. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस मामले में एक नाबालिग लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कृत्यों को दुष्कर्म के प्रयास की श्रेणी में नहीं रखने वाली टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक टिप्पणियों में संवेदनशीलता बरतने से संबंधित दिशा-निर्देश भी दिए थे. 

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी को नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा है. अदालत ने संकेत दिया है कि हाईकोर्ट के आदेश में मौजूद आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सुनवाई की जाएगी. हालांकि, अंतिम निर्णय सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा.  

यह मामला अब इस बात को लेकर भी महत्वपूर्ण है कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में किसी कृत्य को 'दुष्कर्म का प्रयास' मानने के लिए किन परिस्थितियों और साक्ष्यों को पर्याप्त माना जाए और न्यायिक फैसलों में ऐसी घटनाओं का वर्णन किस तरह किया जाए. 

 

 

 

 

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