हस्तरेखा में मध्यमा के नीचे शनि पर्वत और भाग्य रेखा से तय होता है साढ़ेसाती का प्रभाव
ज्योतिष में कुंडली के जरिए ग्रहों की स्थिति के बारे पता चलता है, लेकिन शनि की स्थिति को बिना जन्मपत्री के देखें हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हाथ के मध्य भाग से जो लंबी रेखा निकलती है, वो शनि रेखा होती है। इस रेखा से भाग्य को समझने में काफी सहायता प्राप्त होगी। भाग्य रेखा शनि पर्वत यानी शनि की मध्यमा उंगली तक होती है।
दरअसल, जातक के जीवन पर होने वाले शनि के प्रभाव को हाथ में स्थित शनि के स्थान से सरलतापूर्वक जाना जा सकता है। वहीं, शनि देव का प्रभाव अनिष्टफलदायक है या शुभफलदायक है, इसका निर्णय जन्मपत्री में शनि की स्थिति को देखकर किया जाता है।
जब योगकारक शनि होने पर शानि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा शनि की महादशा में शनि अशुभ फल नहीं देते। हमारे हाथ की सबसे बड़ी उंगली को मध्यमा उंगली कहा जाता है, उसे ही सामुद्रिक शास्त्र में शनि की उंगली मानी जाती है, इस उंगली के मूल में शनि पर्वत होता है। शनि पर्वत एवं शनि रेखा जातक के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव के बारे में बताता है।
- भाग्य रेखा हथेली पर निर्दोष हो तो जातक को अपने सभी जीवन में शनि का सहयोग प्राप्त होता है।
- जीवन रेखा से कोई भी रेखा प्रारंभ होकर शनि पर्वत की तरफ आगे बढ़ सकते हैं, तो वह शनि की उपरेखा कहलाती है, यह रेखा शनि पर्वत तक पहुंचे, तो बेहतरीन फल देती है। वहीं, जीवन में काफी संघर्ष देखने को मिलता है।
- गुरु पर्वत से शनि पर्वत तक एक ही सीधी रेखा हो, तो जातक को जीवन के अंतिम चरण में सर्वोच्च यश की तरफ ले जाएगी। जिन जातकों की जन्मपत्री में केंद्र में बलवान उच्च का अथवा स्वराशि का शनि बैठकर पंचमहापुरुण राजयोग के अंतर्गत शशक नामक राजयोग बनाता है, उन विशेष भाग्यशाली जातकों के हाथ में इस प्रकार की शनि दिखाई देता है।
- भाग्य रेखा का आरंभ में, मध्य में या अंत में द्वीप हो तो बचपन, जवानी और बुढ़ापा इन अवस्थाओं में रोग उत्पन्न होता है या कारावास जैसा कष्ट सहना पड़ता है। हाथ में शनि पर्वत की स्थिति और जन्मपत्री में शनि की स्थिति जब एक जैसी स्थिति और फल बताए तो फलादेश सौ प्रतिशत सच निकलता है।
Kolkata में TMC और BJP कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प, पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा
दक्षिण-पूर्व कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यालय पर नियंत्रण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प के एक दिन बाद बुधवार को पार्टी के ममता बनर्जी नीत गुट के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। झड़प के बाद तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसके कई कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई।
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को झूठा करार दिया। पुलिस के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व कोलकाता में मंगलवार को पार्टी कार्यालय पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उसे लाठीचार्ज करना पड़ा। खबरों के अनुसार, झड़प के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्व कोलकाता में पार्टी के कार्यालय को भाजपा के “कब्जे” से मुक्त कराने की मांग को लेकर रैली निकाली, जिसके बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। तृणमूल कार्यकर्ता स्थानीय पुलिस थाने में इस सिलसिले में एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। ममता खेमे ने आरोप लगाया कि रैली शुरू होने के कुछ देर बाद नशे में धुत भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में झड़प हो गई।
उसने ममता खेमे के आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख और अन्य महिला कार्यकर्ताओं पर अंडे फेंके जाने का भी दावा किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस को मिली शिकायत और उपलब्ध सबूतों की जांच के बाद श्रीदिब दास और बिक्रम पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी ने कहा, “हमने मुकुंदपुर में मंगलवार शाम हुई झड़पों में शामिल होने के आरोप में ममता गुट के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
मामले की जांच जारी है और घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।” तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि जब वह स्थानीय पुलिस थाने पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, जहां झड़पों के तुरंत बाद पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में रखा गया था, तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की।
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