फिल्म शूटिंग का बड़ा हब बन रहा उत्तराखंड, पांच साल में निर्माताओं ने खर्च किए ₹1759 करोड़
देहरादून: अपनी खूबसूरत वादियों और पहाड़ों के कारण लंबे समय से फिल्म निर्माताओं की पसंद रहे उत्तराखंड में अब शूटिंग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पांच साल से भी कम समय में फिल्म निर्माताओं ने यहां शूटिंग पर करीब 1,759 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। फिल्मों और वेब सीरीज की बढ़ती शूटिंग के बीच सरकार अब उत्तराखंड को ऐसी जगह के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है, जहां शूटिंग के साथ फिल्म बनाने से जुड़े दूसरे काम भी हो सकें।
उत्तराखंड में फिल्म निर्माताओं की बढ़ती दिलचस्पी आंकड़ों में भी दिखाई देती है। 2019-20 से 2025-26 के बीच प्रदेश में फिल्म शूटिंग और उससे जुड़ी NOC के 1,440 से ज्यादा मामले आए। शूटिंग पर होने वाला खर्च भी लगातार बड़ा रहा है। 2022-23 से 19 सितंबर 2026 तक फिल्म निर्माताओं ने प्रदेश में करीब 1,759 करोड़ रुपये खर्च किए। इनमें 2024-25 में सबसे ज्यादा 531.62 करोड़ रुपये खर्च हुए।
शूटिंग से आगे फिल्म बनाने के दूसरे काम भी उत्तराखंड में हों
फिल्मों की बढ़ती शूटिंग के साथ सरकार ने 2024 में नई फिल्म नीति लागू की। इसमें शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था की गई, ताकि फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग जगह मंजूरी के लिए न जाना पड़े। फिल्मों को आर्थिक मदद देने के साथ एडिटिंग और शूटिंग के बाद होने वाले दूसरे कामों के लिए भी उत्तराखंड में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसके साथ स्थानीय फिल्मों और कलाकारों को आगे बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। 2021-22 से 2025-26 के बीच 52 फिल्मों को आर्थिक मदद दी गई है। इनमें हिंदी के अलावा गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और उत्तराखंड की दूसरी भाषाओं में बनी फिल्में भी शामिल हैं। अकेले 2025-26 में 25 फिल्मों को आर्थिक मदद मिली।
फिल्म से जुड़े काम सीखने वाले युवाओं के लिए प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति को भी फिल्म नीति में जगह दी गई है। कोशिश है कि कैमरा, साउंड, एडिटिंग और फिल्म से जुड़े दूसरे कामों में स्थानीय लोगों को ज्यादा मौके मिलें। प्रदेश के कलाकारों के लिए भी फिल्मों और वेब सीरीज में काम के रास्ते बढ़ सकें।
शूटिंग बढ़ी तो स्थानीय कारोबार तक पहुंचा पैसा
फिल्मों की शूटिंग का असर केवल फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहता। बाहर से आने वाली टीमों के कई दिनों तक उत्तराखंड में रहने से होटल और गाड़ियों की मांग बढ़ती है। शूटिंग के दौरान गाइड, स्पॉट बॉय और दूसरे स्थानीय लोगों की भी जरूरत पड़ती है। इस तरह फिल्म की शूटिंग पर खर्च होने वाले पैसे का एक हिस्सा स्थानीय कारोबार और लोगों तक भी पहुंचता है।
फिल्मों में उत्तराखंड की लोकेशन दिखाई देने का फायदा पर्यटन को भी मिल सकता है। पर्दे पर किसी जगह को देखने के बाद उसकी पहचान देशभर के दर्शकों तक पहुंचती है और वहां घूमने आने वाले लोगों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
फिल्मों और उनसे जुड़े लोगों को पहचान देने के लिए उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 और 2025 भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में बनी या यहां शूट हुई फिल्मों के साथ स्थानीय भाषाओं में बनी फिल्मों और उनमें काम करने वाले कलाकारों व अन्य लोगों को इन पुरस्कारों में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती और अलग-अलग तरह की लोकेशन फिल्म शूटिंग के लिए बेहतर हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग और निर्माण बढ़े और इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा कारोबार के नए मौके बनें। इसी के लिए शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया आसान करने और फिल्म निर्माताओं को जरूरी सुविधाएं देने पर काम किया जा रहा है।
इंदौर में आज ‘No UPI Day’, व्यापारियों ने किया अनोखा विरोध प्रदर्शन, राजबाड़ा पर बारकोड बॉक्स का लगाया ढेर, पढ़ें खबर
इंदौर: देशभर में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित चार्ज के खिलाफ अब विरोध तेज होता जा रहा है। व्यापारी केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ हैं। वहीं मध्य प्रदेश में व्यापारी बुधवार, 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों में व्यापारी UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करने का अभियान भी चला रहे हैं।
वहीं इंदौर में व्यापरी UPI पेमेंट पर चार्ज के विरोध में एक अनोखा प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘नो यूपीआई डे’ के तहत इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन सहित 125 व्यापारिक संगठनों से जुड़े व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों के यूपीआई बारकोड बॉक्स राजबाड़ा पहुंचाए और सभी बॉक्स को एक जगह रखकर सामूहिक रूप से प्रतीकात्मक विरोध किया। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि उनका विरोध यूपीआई से नहीं, बल्कि प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर है।
एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारियों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर अपनी चिंता सरकार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना है।
बारकोड बॉक्स प्रदर्शन बना व्यापारियों के विरोध का प्रतीक
व्यापारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क के असर से व्यापार प्रभावित होने की आशंका भी है। इस दौरान व्यापारियों ने सामूहिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई और सोशल मीडिया के जरिए भी अभियान चलाया। राजबाड़ा पर बारकोड बॉक्स का यह प्रदर्शन यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर व्यापारियों के विरोध का प्रतीक बना।
कम मार्जिन वाले कारोबारों पड़ सकता है असर
व्यापारियों और कारोबारी संगठनों का मानना है कि नए शुल्क का सबसे ज्यादा असर कम मार्जिन वाले कारोबारों पर पड़ेगा। इनमें किराना, पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और मोबाइल कारोबार प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में पहले से ही मुनाफे का मार्जिन काफी सीमित है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत शुल्क कटने से व्यापारियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और उनका बचा हुआ मार्जिन भी काफी हद तक खत्म हो सकता है।
इंदौर से शकील अंसारी की रिपोर्ट
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