जरूरत की खबर- क्या आपको भी है वॉशरूम एंग्जाइटी:पब्लिक बाथरूम यूज करने में लगता है डर, साइकोलॉजिस्ट से जानें मैनेजमेंट टिप्स
क्या आपको भी ऑफिस, स्कूल-कॉलेज या मॉल में टॉयलेट जाने में झिझक होती है? या कहीं भी, किसी भी स्थिति में पब्लिक टॉयलेट यूज करने में परेशानी महसूस होती है? अगर हां, तो यह झिझक आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है। साथ ही सेहत पर भी बुरा असर डाल सकती है। कई लोग इसी वजह से पानी कम पीने लगते हैं, लंबी मीटिंग या ट्रैवल से बचते हैं। इससे मानसिक तनाव भी बढ़ता है। मेडिकल की भाषा में इसे पैरुरेसिस (Paruresis) या शाइ ब्लैडर सिंड्रोम (Shy Bladder Syndrome) कहते हैं। यह एक तरह की एंग्जाइटी है, जिसे ‘वॉशरूम एंग्जाइटी’ कहा जाता है। समय रहते इस बारे में जानना और सही उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। हालांकि अच्छी बात ये है कि कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम वॉशरूम एंग्जाइटी के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अर्चना शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, साइकोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी क्या है? जवाब- यह एक ऐसी मेंटल कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति को पब्लिक टॉयलेट यूज करने में डर, चिंता या असुविधा महसूस होती है। इसमें व्यक्ति अक्सर सोचता है कि कोई उसे जज करेगा। कुछ लोग प्राइवेसी के कारण भी वॉशरूम यूज नहीं करते हैं। लंबे समय में इसका फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी क्यों होती है? जवाब- वॉशरूम एंग्जाइटी कई कारणों से हो सकती है। यह केवल शर्म या झिझक नहीं, बल्कि इसके कई सोशल और साइकोलॉजिकल पहलू भी हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी के क्या संकेत हैं? जवाब- इसके संकेत शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक तीनों तरह के हो सकते हैं। कई बार लोग इन्हें सामान्य घबराहट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये बार-बार हो तो सतर्क हो जाना चाहिए। नीचे दिए ग्राफिक इसे समझिए- सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी का डेली लाइफ पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर धीरे-धीरे पड़ता है। इससे न सिर्फ शारीरिक असुविधा होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इससे पीड़ित लोग अक्सर पानी कम पीने लगते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोगों के लिए ऑफिस की लंबी मीटिंग्स, स्कूल क्लास या ट्रैवल तनावपूर्ण हो जाते हैं। इससे पीड़ित लोग अक्सर सोशल गैदरिंग्स से बचने लगते हैं, जिससे अकेलापन बढ़ सकता है। वहीं यूरिन रोककर रखने से पेट दर्द, ब्लैडर प्रॉब्लम्स और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। समय के साथ इससे प्रोडक्टिविटी और मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होती है। सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी किन लोगों में ज्यादा होती है? जवाब- जिन लोगों को सोशल एंग्जाइटी या ज्यादा घबराहट होती है, उनमें यह समस्या आमतौर पर ज्यादा होती है। ऐसे लोग जो दूसरों की राय को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं या जिन्हें जज किए जाने का डर रहता है, वे पब्लिक वॉशरूम यूज करने में ज्यादा असहज महसूस करते हैं। बचपन में किसी तरह की बुलिंग का शिकार हुए या शर्मिंदगी झेल चुके लोगों में भी वॉशरूम एंग्जाइटी हो सकती है। कुल मिलाकर कहने का आशय ये है कि किसी भी तरह का बुरा या डरावना अनुभव इसका कारण हो सकता है। इसके अलावा जो लोग ज्यादा सोचते हैं या तनाव में रहते हैं, वे भी इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। गंदगी या संक्रमण से डरने वाले लोग भी पब्लिक टॉयलेट यूज करने से बचते हैं। सवाल- क्या यह समस्या किसी बीमारी से जुड़ी हो सकती है? जवाब- ये एक तरह की मेंटल कंडीशन है, जो सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर और ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) से जुड़ी है। कई मामलों में डर और तनाव के कारण शरीर की सामान्य प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इससे यूरिन या मल त्याग में दिक्कत होती है। अगर अक्सर यूरिन पास करते समय जलन, दर्द और कब्ज की समस्या बनी रहती है तो यह किसी मेडिकल कंडीशन का संकेत भी हो सकता है। इसलिए मेंटल इश्यू के साथ-साथ फिजिकल प्रॉब्लम्स को भी इग्नोर नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी को कैसे मैनेज करें? जवाब- वॉशरूम एंग्जाइटी को सही समझ, धैर्य और छोटे-छोटे प्रयासों से धीरे-धीरे मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए खुद पर दबाव डालने के बजाय सहज तरीके अपनाना जरूरी है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या वॉशरूम एंग्जाइटी पूरी तरह ठीक हो सकती है? जवाब- हां, वॉशरूम एंग्जाइटी को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए सही समझ, नियमित अभ्यास और धैर्य जरूरी होता है। जब व्यक्ति धीरे-धीरे अपने डर का सामना करता है, रिलैक्सेशन तकनीक अपनाता है तो ये एंग्जाइटी कम हो जाती है। सवाल- वॉशरूम एंग्जाइटी में कब डॉक्टर या काउंसलर से सलाह लेना जरूरी है? जवाब- जब वॉशरूम एंग्जाइटी रोजमर्रा की जिंदगी, काम, पढ़ाई या सेहत को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जैसेकि- इसके अलावा अगर घबराहट के साथ तेज धड़कन, पसीना या बहुत ज्यादा मानसिक तनाव महसूस हो तो प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए। सही समय पर काउंसलिंग या थेरेपी लेने से समस्या को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। ...................... जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- कहीं आपको टेलिफोबिया तो नहीं: फोन बजते ही घबराते हैं, धड़कन बढ़ जाती है, न्यूरोलॉजिस्ट से जानें कंट्रोल का तरीका कुछ लोगों के लिए फोन कॉल एक उम्मीद की तरह होता है। जबकि कुछ लोगों को फोन की घंटी बजते ही घबराहट होने लगती है। उनकी हार्ट बीट बढ़ जाती है, पसीना आने लगता है। वे फोन नहीं रिसीव कर पाते हैं। पूरी खबर पढ़िए...
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