Lalbaugcha Raja: संजय दत्त ने बप्पा के पैरों से सिंदूर लेकर पत्नी मान्यता की भरी मांग, Video ने जीता फैंस का दिल
Sanjay Dutt at Lalbaugcha Raja: मुंबई में गणेशोत्सव की धूम के बीच बॉलीवुड सितारों का लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचने का सिलसिला जारी है। शाहरुख खान, परिणीति चोपड़ा और गोविंदा के बाद अब अभिनेता संजय दत्त भी पत्नी मान्यता दत्त के साथ बप्पा के दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान संजय दत्त ने अपनी पत्नी की सुरक्षा का खयाल रखा साथ ही एक खास अंदाज भी देखने को मिला जिसने फैंस का दिल जीत लिया।
पत्नी मान्यता के साथ लालबागचा राजा पहुंचे संजय दत्त
संजय दत्त मंगलवार को पत्नी मान्यता दत्त के साथ मुंबई के मशहूर लालबागचा राजा पंडाल पहुंचे। भारी भीड़ को देखते हुए अभिनेता के साथ सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। दर्शन के लिए संजय दत्त ने नारंगी रंग का कुर्ता पहना था, जबकि मान्यता गुलाबी रंग के सूट में नजर आईं।
पंडाल में पहुंचने के बाद दोनों ने गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया। भीड़ के बीच संजय लगातार मान्यता के करीब रहे और यह सुनिश्चित करते दिखे कि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
बप्पा के चरणों से सिंदूर लेकर पत्नी की मांग में भरा
संजय दत्त के दर्शन के दौरान एक पल ने सभी का ध्यान खींच लिया। अभिनेता ने बप्पा के चरणों से सिंदूर लिया और उसे अपनी पत्नी मान्यता की मांग में लगाया। इस खूबसूरत पल को वहां मौजूद फोटोग्राफर्स ने कैमरे में कैद कर लिया।
सामने आए वीडियो में दोनों की बॉन्डिंग भी साफ नजर आ रही है। संजय और मान्यता ने साथ में बप्पा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
‘बप्पा हर साल मुझे यहां बुलाएं’
दर्शन के बाद संजय दत्त ने लालबागचा राजा के प्रति अपनी आस्था के बारे में भी बात की। अभिनेता ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें एक बार फिर लालबागचा राजा के दर्शन करने का मौका मिला। संजय ने कहा कि वह बप्पा से प्रार्थना करते हैं कि हर साल उन्हें यहां आने का बुलावा मिले और वह लगातार दर्शन के लिए आते रहें।
चंकी पांडे से भी हुई खास मुलाकात
संजय दत्त की इस यात्रा के दौरान एक खास मुलाकात भी देखने को मिली। उसी समय अनन्या पांडे अपने पिता और अभिनेता चंकी पांडे के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंची थीं।
पंडाल में संजय दत्त और चंकी पांडे की मुलाकात हुई। दोनों पुराने दोस्तों की तरह एक-दूसरे से गले मिले और बातचीत करते नजर आए। दोनों का यह मिलना भी वहां मौजूद लोगों और तस्वीरें लेने वाले फोटोग्राफरों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
इन हालिया फिल्मों में नजर आए संजय दत्त
काम की बात करें तो संजय दत्त साल 2026 में ‘द राजा साब’, ‘धुरंधर: द रिवेंज’, ‘राजा शिवाजी’, ‘आखिरी सवाल’ और कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ में दिखाई दिए हैं। इसके अलावा अब वह आने वाली फिल्म ‘खलनायक रिटर्न्स’ में नजर आएंगे।
28 से 30 सितंबर तक होगी Bank Strike ! Weekend जोड़कर 5 दिन बंद रहेंगे बैंक, जल्द निपटा लें काम वरना होगी परेशानी
देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह भारी पड़ सकता है। दरअसल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 28, 29 और 30 सितंबर को राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इससे पहले 26 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार होने के कारण शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होगा। ऐसे में यदि प्रस्तावित हड़ताल पूरी तरह लागू होती है तो 26 से 30 सितंबर तक लगातार पांच दिनों तक शाखा-आधारित बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 30 सितंबर बैंकों के लिए छमाही समापन का महत्वपूर्ण दिन है। इस दौरान खातों के मिलान, प्रावधान, कोषागार और बाजार से जुड़े कामकाज सहित कई वित्तीय प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे समय में तीन दिन की हड़ताल का असर केवल बैंक की खिड़की तक सीमित रहने वाला नहीं है, बल्कि कारोबार, सरकारी लेन-देन और वित्तीय व्यवस्था के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकता है।
इसे भी पढ़ें: Fitch Ratings ने भारत का GDP वृद्धि अनुमान बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस टकराव की कीमत कौन चुकाएगा? बैंक कर्मचारी अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, प्रबंधन और सरकार बातचीत के जरिए समाधान की बात कर रहे हैं, लेकिन इनके बीच सबसे अधिक परेशानी उस ग्राहक की होगी जिसे पेंशन निकालनी है, जरूरी भुगतान करना है, चेक जमा करना है, बैंक खाते से जुड़ा कोई काम कराना है या किसी ऐसी सेवा की जरूरत है जिसके लिए शाखा में कर्मचारी की मदद अनिवार्य है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का कहना है कि वह बैंकिंग कार्यबल के करीब 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और जब तक पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक प्रगति नहीं होती, तब तक हड़ताल टालने पर विचार नहीं किया जाएगा। 22 सितंबर को उप मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इसके बाद यूनियनों ने साफ कर दिया कि ठोस प्रगति के अभाव में 28 से 30 सितंबर की हड़ताल जारी रहेगी।
यूनियनों की मांग केवल पांच दिन की बैंकिंग तक सीमित नहीं है। पेंशन में सुधार, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते की एक समान व्यवस्था और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़े कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था में जाने का विकल्प देने जैसी मांगें भी उनके एजेंडे में हैं। हम आपको याद दिला दें कि इससे पहले 11 सितंबर को भी बैंक यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी।
दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि बैंक कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए गए हैं और पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था का विषय भी विचाराधीन है, लेकिन इस पर फैसला करने से पहले संबंधित पक्षों की राय लेना आवश्यक है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों से हड़ताल से बचने और शेष मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की है। मोदी सरकार का तर्क है कि हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं बाधित होती हैं, जनता को परेशानी होती है और बैंक के कारोबार पर भी असर पड़ता है।
अब सवाल व्यवस्था की तैयारी का भी है। यदि बातचीत अंतिम समय तक सफल नहीं होती तो क्या बैंकिंग तंत्र इतने महत्वपूर्ण छमाही समापन के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर पाएगा? क्या जरूरी भुगतान, चेक निपटान और सरकारी लेन-देन समय पर हो पाएंगे? और सबसे अहम सवाल यह है कि जिस आम नागरिक के पास बैंक की डिजिटल सुविधा उपलब्ध नहीं है, उसके लिए क्या विकल्प है?
ग्राहकों को सलाह दी गई है कि शाखा से जुड़े जरूरी काम हड़ताल से पहले निपटा लें। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम, यूपीआई और बैंकिंग सहायता केंद्रों जैसी सेवाओं का उपयोग किया जा सकता है। कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी ग्राहकों से समय रहते जरूरी लेन-देन पूरा करने की अपील की है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के चलते हर प्रकार का बैंकिंग काम बंद नहीं होगा, लेकिन शाखा-निर्भर सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार और बैंक यूनियनों के बीच यह टकराव केवल कर्मचारियों की मांग बनाम प्रबंधन का मामला नहीं रह गया है। देखा जाये तो यह उस व्यवस्था की परीक्षा भी है जिस पर करोड़ों नागरिक अपने रोजमर्रा के वित्तीय जीवन के लिए निर्भर हैं। कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत होनी चाहिए, लेकिन ऐसी स्थिति पैदा न हो जिसमें समाधान की बातचीत के बीच आम ग्राहक ही सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला पक्ष बन जाए।
बहरहाल, फिलहाल गेंद सरकार और बैंक यूनियनों दोनों के पाले में है। सवाल यह है कि क्या 28 सितंबर आने से पहले कोई ठोस रास्ता निकलेगा, या सितंबर का आखिरी सप्ताह देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए पांच दिन की बैंकिंग परेशानी में बदल जाएगा?
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi
prabhasakshi







/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
