Delhi Kalkaji Park Gangrape Case | न CCTV, न रोशनी... कालकाजी की घटना ने खोली दिल्ली के सुरक्षा दावों की पोल
देश की राजधानी दिल्ली के कालकाजी इलाके स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुई गैंगरेप की दर्दनाक घटना ने शहर की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि पार्क की सुरक्षा में भारी लापरवाही बरती जा रही थी। आस्था कुंज पार्क के एंट्री और एग्जिट गेटों पर एक भी CCTV कैमरा तैनात नहीं है और शाम ढलते ही पूरे पार्क में अंधेरा छा जाता है। इसके अलावा, पार्क की बाउंड्री वॉल जगह-जगह से टूटी हुई है और कई प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा गार्ड तक तैनात नहीं हैं। सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक के उजागर होने के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने खुद घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
तीनों आरोपी गिरफ्तार: LSR कॉलेज के पास एनकाउंटर के बाद दबोचा गया मुख्य आरोपी
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों- आसिफ, हेमंत और उसके छोटे भाई मुकेश को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
हेमंत और मुकेश की गिरफ्तारी: पेशे से वकील हेमंत और B.Sc. मैथमेटिक्स के अंतिम वर्ष के छात्र मुकेश को उनके घर से गिरफ्तार किया गया।
आसिफ का एनकाउंटर: मामले के मुख्य आरोपी आसिफ को लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन (LSR) के पिछले गेट के पास पुलिस मुठभेड़ (Encounter) के बाद पकड़ा गया। यह जगह कॉलेज कैंपस से महज 50 मीटर की दूरी पर है। मुठभेड़ के दौरान आसिफ के पैर में गोली लगी है।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे क्योंकि वे पार्क के आसपास ही रहते और काम करते थे तथा अक्सर आस्था कुंज पार्क में मिला करते थे।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने घटनास्थल का दौरा किया। तीनों आरोपियों - आसिफ, हेमंत और उसके छोटे भाई मुकेश - को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। हेमंत (एक वकील) और मुकेश (B.Sc. मैथमेटिक्स के फाइनल ईयर के छात्र) को उनके घर से पकड़ा गया, जबकि आसिफ को लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन के पिछले गेट के पास पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद हिरासत में लिया गया। यह जगह कैंपस से करीब 50 मीटर दूर है। उसके पैर में गोली लगी। तीनों आरोपी एक-दूसरे को जानते थे क्योंकि वे पार्क के आस-पास ही रहते और काम करते थे और अक्सर वहां मिलते थे।
सोमवार को क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक, लड़की और उसका 17 साल का दोस्त शाम को गेट नंबर 7 से आस्था कुंज पार्क में घुसने से पहले कालकाजी मंदिर गए थे। पार्क के अंदर, तीनों आरोपी उन किशोरों के पास पहुंचे, खुद को पुलिसवाला बताया और कहा कि वे कुछ गलत कर रहे हैं और उन पर पुलिस केस हो सकता है। इसके बाद उन लोगों ने लड़की को उसके दोस्त से अलग कर दिया और उसे पत्थर से बनी एक पुरानी, जर्जर इमारत में ले गए। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बारी-बारी से लड़के को काबू में रखा जबकि बाकी लोगों ने लड़की के साथ रेप किया। रेप के दौरान आसिफ ने बंदूक और चाकू दिखाकर लड़की को धमकाया, जबकि बाकी लोगों ने उसके दोस्त की पिटाई की। रात करीब 8.45 बजे उसके मोबाइल फोन से PCR कॉल की गई।
ऑनलाइन क्लास, सॉलिडैरिटी मार्च
पुलिस मुठभेड़ के बाद, LSR कॉलेज ने रेगुलर क्लास रद्द कर दीं और बुधवार के लिए उन्हें ऑनलाइन कर दिया। वहीं, छात्र आज शाम 4 बजे पीड़िता के समर्थन में एक सॉलिडैरिटी मार्च निकालने वाले हैं। यह मार्च कॉलेज गेट से शुरू होगा, जहां कथित तौर पर एक आरोपी के साथ मुठभेड़ हुई थी। आयोजकों ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन का मकसद नाबालिग पीड़िता के लिए न्याय की मांग करना और सिस्टम की उन कमियों पर चिंता जताना है, जिनकी वजह से महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं और उन्हें कोई सुरक्षा या जवाबदेही नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि यह मार्च महिलाओं के रात में बेरोकटोक घूमने, शिक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली सड़कों पर सुरक्षित चलने और अपने शरीर व ज़िंदगी पर खुद का अधिकार रखने के हक को भी ज़ाहिर करेगा।
2 हफ़्तों में रेप का चौथा मामला
कालकाजी की घटना दिल्ली में पिछले दो हफ़्तों में नाबालिगों के साथ रेप का चौथा मामला है। सोमवार को सेंट्रल दिल्ली के देशबंधु गुप्ता रोड पर छह साल की बच्ची के साथ रेप हुआ। पुलिस ने बताया कि आरोपी अंकित को गिरफ़्तार कर लिया गया है। 17 सितंबर को सदर बाज़ार में 11 साल की बच्ची पेंसिल और किताबें खरीदने के लिए घर से निकली थी, तभी पास की एक दर्ज़ी की दुकान के मालिक ने उसे दुकान के अंदर बुला लिया।
पुलिस ने बताया कि दर्ज़ी मकसूद ने बच्ची के हाथ-पैर बांधकर उसके साथ रेप किया। बाद में उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। एक और मामले में, 10 सितंबर को स्वरूप नगर में 17 साल की लड़की मृत पाई गई। उसके साथ गैंगरेप किया गया, चाकू मारा गया और उसे एक खुले मैदान में फेंक दिया गया। इस मामले में चार लोगों को पकड़ा गया, जिनमें तीन नाबालिग शामिल थे।
Facebook और X पर एंटी नेशनल कंटेंट हटाने की मांग खारिज, Supreme Court का दखल से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस PIL में केंद्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट और मीम्स की पहचान करने, उन्हें हटाने और ब्लॉक करने के निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्हें याचिकाकर्ता ने देश-विरोधी नारे और भाषण बताया था। चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने अहमदाबाद के रहने वाले याचिकाकर्ता हितेंद्र कुमार परसोत्तमभाई गाधिया की ओर से पेश वकील बरुण सिन्हा की दलीलों को नहीं माना। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा। सुनवाई के दौरान, बेंच ने इस याचिका को सोशल मीडिया कंटेंट से जुड़े किसी दूसरे लंबित मामले के साथ जोड़ने से भी इनकार कर दिया। कोर्ट में दी गई दलीलों के मुताबिक, चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता से कहा आप दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। याचिका में केंद्र और कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उन पोस्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं।
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PIL में क्या मांग की गई थी?
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह याचिका X Corp, Facebook, YouTube, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखाए और फैलाए जा रहे उन नारों, भाषणों या बयानों के खिलाफ दायर की गई थी, जिन्हें उन्होंने 'राष्ट्र-विरोधी' बताया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि SMS और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए झूठे मैसेज फैलाने और "CJP" के बैनर तले बेकाबू भीड़ से पैदा हुए सुरक्षा खतरों के कारण राष्ट्रीय राजधानी और कई राज्यों की राजधानियां "बंधक" जैसी स्थिति में आ गई थीं। इसमें यह भी कहा गया कि फेक न्यूज़ और भड़काऊ बयानों व भाषणों के प्रसार से सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ, जिससे अशांति और अव्यवस्था फैली।
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याचिका में सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने की मांग की गई
याचिकाकर्ता ने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (अदालत का आदेश) की मांग की, जिसमें प्रतिवादियों को X Corp, YouTube, Facebook, Instagram और WhatsApp पर पब्लिश सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने या हटाने का निर्देश देने को कहा गया। याचिका के अनुसार, जिन पोस्ट को हटाने की मांग की गई, वे ऐसी थीं जिनसे जनता को सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ भड़काने और संवैधानिक अधिकारियों के अधिकार को कमजोर करने की आशंका थी।याचिका में ऐसे कंटेंट और मीम्स का भी ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे राष्ट्र-विरोधी नारों और भाषणों से जुड़े थे।
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