MP में 5 दिन बंद रहेंगे बैंक, 7 हजार शाखाओं पर लगेगा ताला, 3 दिन में निपटा लें जरूरी काम
अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम है, तो अगले तीन दिनों यानी बुधवार से शुक्रवार 23 से 25 सितंबर के बीच हर हाल में निपटा लें। इसके बाद लगातार पांच दिनों तक बैंकों में काम ठप्प रहेगा।
दरअसल शनिवार और रविवार की छुट्टी के साथ ही बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। ऐसे में अगर समय पर काम नहीं निपटाया, तो कैश और चेक से जुड़े काम अटक सकते हैं।
क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं बैंक कर्मचारी?
बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग 5-डे वर्किंग कल्चर यानी हफ्ते में 5 दिन काम लागू करने की है। फिलहाल बैंकों में सिर्फ दूसरे और चौथे शनिवार को ही छुट्टी रहती है। आपको बता दें कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) का प्रस्ताव है कि हर शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए और इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम कराया जाए। लेकिन सरकार इस मांग को लगातार टालती आ रही है।
कैश निकासी और चेक क्लियरेंस पर पड़ेगा असर
पांच दिनों की इस लंबी बंदी का सीधा असर आम जनता और व्यापारियों के लेन-देन पर पड़ेगा। हड़ताल के दौरान एटीएम में कैश खत्म होने की समस्या आ सकती है, वहीं चेक क्लियरेंस और ड्राफ्ट जैसे काम पूरी तरह रुक जाएंगे। दरअसल, अपनी मांगों को लेकर बैंककर्मी आज से ही लामबंद हो रहे हैं। बुधवार को दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक पंजाब नेशनल बैंक के सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
मांग पेंडिंग रहने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी
यूनियन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा का कहना है कि 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की जायज मांग को लेकर सरकार का रवैया बिल्कुल भी सकारात्मक नहीं है। कई दौर की बैठकें होने के बावजूद अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। आपको बता दें कि बैंक यूनियनों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और उग्र होगा और आने वाले दिनों में देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
UP चुनाव में सपा-कांग्रेस का गठबंधन टूटेगा? सपा के इस नेता ने दिया बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर बयानबाजी का दौर जोरों पर है. सीट बंटवारे में हो रही देरी को लेकर दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस का माहौल है. इसी बीच हाल ही में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने इस पूरे विवाद पर बड़ा बयान देकर स्थिति साफ करने की कोशिश की है.
UP Election 2027 सपा-कांग्रेस गठबंधन पर विवाद शुरू कहां से हुआ?
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के एक बयान से शुरू हुआ. दरअसल, उन्होंने सीट शेयरिंग में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव की सक्रियता कोई मायने नहीं रखती और अगर गठबंधन को अंतिम रूप नहीं दिया गया तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में अपनी तैयारी खुद करेगी.
सपा की तरफ से इसका जवाब किसने दिया?
इमरान मसूद के इस तीखे बयान के बाद सपा ने पश्चिमी यूपी की अपनी मुस्लिम नेता और कैराना सांसद इकरा हसन को आगे किया. इकरा हसन ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने की कोशिश करेगी तो उसका कुछ खास नहीं बनेगा और गठबंधन न होने की सूरत में नुकसान सिर्फ कांग्रेस को उठाना पड़ेगा, सपा को नहीं.
अब एसटी हसन ने इस पूरे विवाद पर क्या कहा है?
इकरा हसन के बयान के बाद सपा नेता एसटी हसन ने संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि पार्टी को ऐसी कोई बात नहीं कहनी चाहिए जिससे गठबंधन को नुकसान पहुंचे. उनका मानना है कि अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा को कोई हरा सकता है तो वह समाजवादी पार्टी ही है और कांग्रेस के साथ आने से सपा की ताकत और बढ़ जाएगी.
खबर अपडेट की जा रही है
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News
News Nation











