Political Drama in Bengal: रेजीनगर उपचुनाव से नामांकन वापसी के तीन घंटे बाद ही ममता के प्रत्याशी रबीउल आलम ने पलटा अपना फैसला
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और पुराने 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने के बाद से दोनों गुटों में नए सिंबल को लेकर उथल-पुथल मची हुई थी। रेजीनगर से उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शुरुआती हिचकिचाहट और भ्रम के बाद यह साफ कर दिया है कि वे मैदान से पीछे नहीं हटेंगे और ममता बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे।
नामांकन वापसी के तीन घंटे बाद बदला फैसला
रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी गुट के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी ने पहले अपना नामांकन वापस लेने का ऐलान किया था। उन्होंने नए चुनाव चिह्न के कारण मतदाताओं में पहचान की कमी और कार्यकर्ताओं पर दबाव जैसी वजहें बताई थीं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने तीन घंटे के भीतर ही अपने फैसले को पलट दिया और कहा कि वे शनिवार से ही इलाके में चुनाव प्रचार शुरू कर देंगे।
'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न पर लड़ेंगे चुनाव
चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों धड़ों के बीच चल रहे विवाद को देखते हुए अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नया नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। रबीउल आलम चौधरी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि नया निशान जनता तक पहुंचाना एक चुनौती है, फिर भी वे इस 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न के साथ ही चुनावी मैदान में उतरेंगे।
नंदीग्राम में बदला सियासी गणित, कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन
दूसरी ओर, नंदीग्राम सीट पर भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। नंदीग्राम से ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान (डे) के चुनाव से हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया। हालांकि, इसके तुरंत बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक पुराने मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया, जिसको लेकर विपक्षी दलों और ममता बनर्जी ने राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
चुनाव आयोग का फैसला और उपचुनाव की स्थिति
चुनाव आयोग ने टीएमसी के बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' सिंबल दिया है। दोनों धड़ों के अलग-अलग चुनाव लड़ने और नए सिंबलों के आने से आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनाव और 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
Maharashtra Railway Projects: चौक-कर्जत दोहरीकरण और मुकुटबन-गढ़चंदूर नई रेल लाइन को मंजूरी
रेलवे प्रोजेक्ट महाराष्ट्र। भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र में रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मध्य रेलवे के चौक-कर्जत रेलवे खंड के 10.86 किलोमीटर दोहरीकरण के लिए 497 करोड़ रुपए और दक्षिण मध्य रेलवे के मुकुटबन (आदिलाबाद)-गढ़चंदूर के बीच 38.21 किलोमीटर नई रेल लाइन के निर्माण के लिए 493 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
इन परियोजनाओं से औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से मौजूदा रेल नेटवर्क पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
चौक-कर्जत रेल खंड का होगा दोहरीकरण
रेलवे ने मध्य रेलवे के पनवेल-चौक-कर्जत मार्ग के महत्वपूर्ण हिस्से चौक-कर्जत खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। 10.86 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 497 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
यह मार्ग यात्री और माल ढुलाई दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे के अनुसार, दोहरीकरण से इस खंड की रेल क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा। यह परियोजना दोहरीकरण, तिहरीकरण, चौगुनीकरण, फ्लाईओवर और बाईपास कार्यों के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।
मुकुटबन-गढ़चंदूर के बीच बनेगी नई रेल लाइन
दक्षिण मध्य रेलवे में मुकुटबन (आदिलाबाद) और गढ़चंदूर के बीच 38.21 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के निर्माण को 493 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। यह परियोजना महाराष्ट्र के यवतमाल और चंद्रपुर जिलों के औद्योगिक एवं खनन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुकुटबन और गढ़चंदूर क्षेत्र में सीमेंट प्लांट, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानें और चूना पत्थर की खदानें हैं। नई रेल लाइन से इन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने और माल ढुलाई को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।
छोटा रेल मार्ग मिलने से घटेगा समय और लागत
रेलवे के अनुसार, नई लाइन से यात्रा की दूरी, परिवहन समय और लागत कम होने की उम्मीद है। यह वर्धा-मानिकगढ़ खंड पर यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध कराएगी। इससे मालगाड़ियों के संचालन में सुधार और मौजूदा नेटवर्क पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, नई लाइन चालू होने के बाद दोनों दिशाओं में प्रतिदिन दो-दो मेमू ट्रेनों के साथ 6.08 मीट्रिक टन सालाना माल ढुलाई संभालने की उम्मीद है। इसमें कोयला और कोक, सीमेंट, स्पंज आयरन, धातु स्क्रैप, लोहा-इस्पात, उर्वरक और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं का परिवहन शामिल होगा।
माजरी-नांदेड़ मार्ग से मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
नई रेल लाइन कोयला और सीमेंट क्लस्टर को माजरी-नांदेड़ रेल मार्ग से सीधे जोड़ेगी। इससे जालना, परभणी, छत्रपति संभाजीनगर और महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के अन्य गंतव्यों तक कोयला, सीमेंट और आरएमएसपी यातायात के लिए लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से भीड़भाड़ वाले बल्हारशाह-नागपुर हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्ग पर निर्भरता कम होगी। साथ ही यवतमाल और चंद्रपुर के अपेक्षाकृत कम जुड़े क्षेत्रों में रेल संपर्क बेहतर होगा।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया का कहना है कि दोनों परियोजनाएं रेल अवसंरचना को मजबूत करने के साथ औद्योगिक और खनन क्षेत्रों के विकास में मदद करेंगी।
नई रेल लाइन और दोहरीकरण से यात्री एवं माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होने और माल ढुलाई को अधिक कुशल बनाने की उम्मीद है।
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