प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी पीड़ा हमेशा दूरी की रही है। दूरी दिलों की, दूरी स्थानों की। दशकों तक यहां के लोगों को ये महसूस होता रहा कि देश का विकास कहीं और हो रहा है और वे पीछे छूट रहे हैं। इसका असर केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा बल्कि भरोसे पर भी पड़ा। इस भावना को बदलने का काम भाजपा ने किया। डबल इंजन की सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के विकास को प्राथमिकता बनाया। रोडवेज, रेलवे, एयरवेज और वाटरवेज के माध्यम से असम को जोड़ने का काम एक साथ शुरू हुआ। लेकिन कांग्रेस ने कभी इसकी परवाह नहीं की। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो असम को बहुत कम रेल बजट मिलता था। लगभग 2000 करोड़ रुपये। अब भाजपा सरकार ने इसे बढ़ाकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब प्रकृति सुरक्षित होती है तो उसके साथ अवसर भी पैदा होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में काजीरंगा में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। होम स्टे, गाइड सेवाएं, परिवहन, हस्त शिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आय के नए साधन मिले हैं। आज मैं असम के आप लोगों की, यहां की सरकार की एक और बात के लिए खासतौर पर तारीफ करूंगा। एक समय था जब काजीरंगा में राइनो के शिकार की घटनाएं असम की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी थी। 2013-14 में एक सींग वाले दर्जनों राइनो मारे गए। भाजपा सरकार ने तय किया था कि हम ये नहीं चलने देंगे, अब ऐसा नहीं चलेगा।
हमने इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया, वन विभाग को आधुनिक संसाधन मिले, निगरानी तंत्र सशक्त हुआ, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई। इसका सुखद परिणाम भी सामने आया। 2025 में राइनो के शिकार की एक भी घटना सामने नहीं आई है। बीते कुछ समय में जितने भी चुनाव परिणाम आए हैं, उनका जनादेश स्पष्ट है। देश का वोटर आज गुड गवर्नेंस चाहता है, विकास चाहता है, वो विकास और विरासत दोनों पर फोकस करता है। इसलिए वो भाजपा को पसंद करता है... इन चुनावों का एक और संदेश है। कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को देश लगातार नकार रहा है। जिस मुंबई शहर में कांग्रेस का जन्म हुआ था वहां वो आज चौथे या पांचवें नंबर की पार्टी बन गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज भाजपा पूरे देश में लोगों की पहली पसंद बन गई है। बीते एक-डेढ़ वर्षों से भाजपा पर देश का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में बिहार में चुनाव हुए। वहां 20 वर्ष बाद भी जनता ने भाजपा को रिकॉर्ड वोट दिए हैं। रिकॉर्ड सीटें जिताई हैं। दो दिन पहले ही महाराष्ट्र के बड़े शहरों में मेयर और पार्षदों के चुनाव परिणाम आए हैं। मुंबई जो दुनिया के सबसे बड़े निगमों में से एक है, वहां की जनता ने पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड जनादेश दिया। जीत मुंबई में हो रही है, जश्न काजीरंगा में मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र के अधिकतर शहरों की जनता ने भाजपा को सेवा का अवसर दिया है। महाराष्ट्र और केरल के नगर निगम चुनावों में पार्टी की सफलता का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मतदाता सुशासन और विकास के लिए भाजपा पर भरोसा करते हैं। भाजपा देश में सबकी पहली पसंद बन गई है। पिछले डेढ़ साल में भाजपा पर देश का भरोसा लगातार बढ़ा है। हाल ही में बिहार में चुनाव हुए और जनता ने भाजपा को रिकॉर्ड जनादेश दिया। दो दिन पहले महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों के नगर निगम चुनावों के परिणाम घोषित हुए।
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ताइवान के विदेश मंत्रालय मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर आरओसी ताइवान ने खुले तौर पर भारत का धन्यवाद किया है और सिर्फ धन्यवाद ही नहीं बल्कि यह संदेश दिया है कि भारत और ताइवान अब एक लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। ताइवान ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों पर आवाज उठाई और ताइवान ने भारत के सामने हाथ जोड़कर उनका शुक्रिया किया। दरअसल ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा भारत हमारा लाइक माइंडेड पार्टनर है। भारत ने पीआरसी चीन की सैन एक्सरसाइज पर आवाज उठाई। भारत और ताइवान के ट्रेड इकोनॉमिक और मैरिटाइम महत्व कॉमन है और दोनों मिलकर इंडोपेसिफिक में शांति और स्थिरता के लिए काम करेंगे। यह सिर्फ एक डिप्लोमेटिक ट्वीट नहीं है। यह स्ट्रेटेजिक सिग्नल है चीन के लिए। अब सवाल यह है कि पीआरसी की मिलिट्री एक्सरसाइज असली मसला क्या है?
दरअसल चीन पिछले कुछ वर्षों से ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर नेवल ड्रिल, फाइटर जेट्स की घुसपैठ, मिसाइल फोर्स की मूवमेंट और ब्लॉकेड जैसी स्थिति क्रिएट कर रहा है। बीजिंग का साफ संदेश है कि ताइवान हमारा है और हम जब चाहे ताकत दिखा सकते हैं। लेकिन अब फर्क यही है कि भारत ने इस पर चुप्पी नहीं साधी। भारत ने साफ कहा ताइवान स्टेट में शांति जरूरी है। किसी भी तरह की सैन्य उकसावेबाजी अस्वीकार्य है और यही बात ताइवान को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगी। बता दें डिप्लोमेसी में शब्द बहुत मायने रखते हैं। ताइवान ने भारत को कहा लाइक माइंडेड पार्टनर। इसका मतलब है लोकतंत्र, नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, फ्री नेविगेशन, संप्रभुता का सम्मान। यानी ताइवान भारत को अब सिर्फ एक ट्रेड पार्टनर नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदार मानता है और यह बात चीन को सबसे ज्यादा चुकती है। चीन से रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे हैं। गलवान के बाद भारत का भरोसा टूट गया। एलएसी पर तनाव जारी है। चीन का आक्रामक रवैया भी देखने को मिल रहा है।
भारत अब चुप रहो वाली नीति छोड़ चुका है। इंडोपेसिफिक में भारत की बढ़ती भूमिका। क्वाड एक्ट इस पॉलिसी इंडोपेसिफिक विज़न। ताइवान स्टेट की स्थिरता भारत के मेरिटाइम इंटरेस्ट से जुड़ी हुई है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी फैक्टर भी है। ताइवान दुनिया का चिप हब है। भारत को टेक्नोलॉजी चाहिए। सप्लाई चेन चीन से हटानी है और भारत ताइवान की नजदीकी रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। वैसे चीन की सबसे बड़ी डर यही है कि ताइवान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन ना मिल जाए और अब ताइवान खुलकर भारत का नाम ले रहा है। भारत चुप नहीं रहा। इंडोपेसिफिक में मोर्चा बना रहा है। यह चीन की वन चाइना नैरेटिव को कमजोर करता है। ताइवान ने साफ कहा ट्रेड इकोनॉमिक और मेरिटाइम अफेयर्स तीनों में भारत और ताइवान के हित जुड़े हुए हैं। मतलब समुद्री रास्तों की सुरक्षा, सप्लाई चेन और फ्री नेविगेशन यह सीधा चीन के विस्तारवाद के खिलाफ खड़ा ब्लॉक है।
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