आयुर्वेद दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, सही जानकारी जनता तक पहुंचाना उद्देश्य: डॉ. संजीव शर्मा
नागपुर, 22 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य केवल एक पर्व या उत्सव मनाना नहीं, बल्कि आयुर्वेद के बारे में सही और प्रामाणिक जानकारी आम जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान परंपरा भी है और व्यक्ति, राष्ट्र तथा विश्व के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
23 सितंबर को मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से जनता तक आयुर्वेद को लेकर सही संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। आम लोगों को आयुर्वेद की प्रमाणिक जानकारी सीधे विशेषज्ञों से मिलनी चाहिए, ताकि किसी तरह के भ्रम के बजाय सही ज्ञान लोगों तक पहुंचे। आयुर्वेद दिवस का संदेश केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रासरूट स्तर तक पहुंचे। आम लोगों को आयुर्वेद की विधा और उसके उपयोग के बारे में सही जानकारी देना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
आयुष मंत्रालय की योजनाओं को लेकर उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद को लेकर व्यापक स्तर पर योजनाओं पर काम कर रहा है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद को वैश्विक स्तर तक ले जाना और दुनिया में इसकी स्वीकार्यता बढ़ाना है। पिछले दशक में आयुर्वेद की ग्लोबल स्वीकार्यता में वृद्धि हुई है। आयुर्वेद से जुड़े निर्यात और घरेलू बाजार के आकार में वृद्धि हुई है, वहीं आयुर्वेद से उपचार कराने वाले मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल बाजार या मरीजों की संख्या नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज का निर्माण होना चाहिए। प्रयास ऐसा होना चाहिए कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का इलाज न रह जाए, बल्कि व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाए। अभी तक स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों को आयुर्वेद को करियर के विकल्प के तौर पर पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती थी। हालांकि, अब जागरूकता बढ़ने के साथ बच्चों और युवाओं का आयुर्वेद की ओर रुझान भी बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि अब नीट के माध्यम से आयुर्वेद में भी प्रवेश मिलता है। आधुनिक चिकित्सा यानी एमबीबीएस की ओर बच्चों का रुझान अभी अधिक है, लेकिन यह स्थिति बदल रही है और आयुर्वेद भी बच्चों के प्रमुख करियर विकल्पों में शामिल हो रहा है। आयुर्वेद को बच्चों के लिए दूसरे विकल्प से आगे बढ़ाकर पहले विकल्प के रूप में स्थापित करना उनका और सरकार का प्रयास है। इसके लिए आयुर्वेद के प्रति जागरूकता और सही जानकारी को व्यापक स्तर तक पहुंचाना जरूरी है।
--आईएएनएस
पीएसके
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Jamui Viral Video Controversy: बिहार के जमुई कांड पर गरमाई सियासत, Prashant Kishor का बड़ा बयान
Jamui Viral Video Controversy: बिहार के जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई बेरहमी, बदसलूकी और मारपीट की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया है. इस अमानवीय घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है. विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली और कानून के इकबाल पर तीखे सवाल दाग रहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रशासन और सरकार का कहना है कि अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है.
विपक्ष का तीखा हमला और मोरल पुलिसिंग पर सवाल
घटना का वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने सत्ता पक्ष को आड़े हाथों लिया है. विपक्ष का कहना है कि एक छोटी बच्ची के साथ जिस तरह की बर्बरता की गई है, वह समाज के लिए बेहद शर्मनाक और डरावनी है. नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुद को समाज के ठेकेदार और मोरल पुलिस समझ बैठे हैं. कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है और अपराधी बेखौफ होकर पहले तो नाबालिग बच्ची के साथ कुकृत्य करते हैं, फिर उसका वीडियो बनाकर खुद ही इंटरनेट पर जारी कर देते हैं.
विपक्षी प्रवक्ताओं ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर प्रहार करते हुए कहा कि यह घटना कई दिन पहले की है, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी. अगर यह वीडियो वायरल नहीं होता, तो शायद यह मामला कभी सामने ही नहीं आता. कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के बयानों पर भी ऐतराज जताया गया, जिसमें वीडियो प्रसारित करने वालों पर कार्रवाई की बात कही गई थी. विपक्ष का तर्क है कि अगर ऐसे मामले सामने नहीं आएंगे, तो समाज को सच कैसे पता चलेगा. विपक्ष ने दावा किया कि राज्य में कमजोर वर्गों और बेटियों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है.
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