ममदानी का सच उजागर करूंगाः नेतन्याहू [Netanyahu Targets Mamdani Ahead of UN Visit to New York]
इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला है. संयुक्त राष्ट्र में संबोधन के लिए न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले जारी एक वीडियो में नेतन्याहू ने ममदानी की आलोचना की. ममदानी ने नेतन्याहू की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान उनकी गिरफ्तारी की मांग दोहराई है. Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu lashed out at New York Mayor Zohran Mamdani in a video released ahead of his trip to the United Nations. The remarks came after Mamdani renewed calls for Netanyahu's arrest during his visit to New York.
CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जरूरी, केंद्र सरकार ने Supreme Court में दाखिल किया हलफनामा
केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लिया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की मौजूदगी उनके प्रभावी कामकाज और उनके विशिष्ट चरित्र को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि यह दावा केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दो सितंबर को शीर्ष अदालत द्वारा उन्हें जारी किए गए निर्देश के जवाब में दाखिल एक हलफनामे में किया था, जिसमें उनसे यह बताने को कहा गया था कि मई 2025 के उसके आदेश के बावजूद पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के क्या कारण हैं, जबकि उस आदेश में इन नियुक्तियों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।
गृह मंत्रालय ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि पिछले साल अदालत के फैसले के बाद से कुल 46 आईपीएस अधिकारियों को इन बलों में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया था। न्यायालय का निर्देश कई सीएपीएफ कैडर अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें दावा किया गया था कि सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 उनके करियर में प्रगति को प्रतिबंधित करता रहेगा क्योंकि मंत्रालय न्यायालय के 2025 के फैसले को लागू नहीं कर रहा था, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह उनके पक्ष में था। हलफनामे में कहा गया कि राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा की “अंतर्निहित” आवश्यकता को देखते हुए और भारत के संघीय ढांचे की मजबूती के लिए, सीएपीएफ में आईपीएस और सेना के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था में “महत्वपूर्ण” भूमिका निभाती है।
हलफनामे में कहा गया कि केंद्र सरकार ने “एक सुविचारित नीतिगत निर्णय” लिया है कि सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की मौजूदगी उनके प्रभावी कामकाज और उनके विशिष्ट चरित्र को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसमें कहा गया, “वे केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच मुख्य समन्वयकारी सेवा हैं, जो दिन-प्रतिदिन के पुलिसिंग कार्यों, कानून और व्यवस्था संबंधी कर्तव्यों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में उग्रवाद, आतंकवाद आदि के खिलाफ रणनीति बनाने का कार्य करती हैं, तथा राज्य पुलिस बलों और सशस्त्र पुलिस बलों दोनों में सेवाएं प्रदान करती हैं।” हलफनामे में कहा गया कि संबंधित सीएपीएफ में ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी अधिकारियों की नियुक्ति अब हाल ही में अधिनियमित सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 द्वारा भी विनियमित होती है।
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