ट्रंप की ईरान को धमकी: संयुक्त राष्ट्र में बोले- डील करो, वरना...; परमाणु हथियार पर दो टूक
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि उनके सामने अब एक “बड़ा फैसला” है- ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जाए, जिससे वह फिर से खड़ा हो सके या फिर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई की जाए।
ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को दोबारा लोगों और देशों को नुकसान पहुंचाने का मौका नहीं देना चाहते। उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हों। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं।
हालांकि, सख्त बयान के साथ ट्रंप ने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद ईरान के साथ समझौता हो जाएगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान भी चुनाव के नतीजे देखने का इंतजार कर रहा है। इससे पहले भी वह कह चुके हैं कि ईरान युद्ध को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद खत्म किया जा सकता है।
President Trump: "Do I annihilate the Islamic Republic, and do it quickly? Do I drive them into hell?" pic.twitter.com/G82ppe1q2v
— Open Source Intel (@Osint613) September 22, 2026
ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख, फिर डील की बात
ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। साथ ही, उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि वह खतरों को बढ़ने नहीं देना चाहते।
इसके बाद ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते की बात की। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा समझौता होता है, तो ईरान अपने देश को दोबारा खड़ा कर सकता है और पहले से बेहतर बना सकता है। वहीं, उन्होंने बेहद कड़ी कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ट्रंप के भाषण से बाहर निकला
ट्रंप जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और संघर्ष का जिक्र कर रहे थे, तब ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अधिकांश सदस्य सभा से बाहर निकल गए। इससे ट्रंप के भाषण के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव साफ दिखाई दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की आवाजाही का जिक्र
ट्रंप ने अपने भाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिकी नौसेना और तेल की आवाजाही का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए काम कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान खास महत्व रखता है। यहां जहाजों पर हमलों और आवाजाही में रुकावट से वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ा है।
ट्रंप ने गिनाए आठ युद्ध सुलझाने के दावे
ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी कहा कि आठ युद्धों को सुलझाना और संबंधित देशों के नेताओं के साथ दोस्ती करना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई संघर्ष सालों और दशकों तक चले थे।
ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान और आर्मेनिया-अजरबैजान समेत कई संघर्षों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रिश्तों, व्यापार और टैरिफ जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर अलग-अलग देशों के बीच समझौते कराने में भूमिका निभाई।
भारत-पाकिस्तान पर ट्रंप का पुराना दावा
भारत-पाकिस्तान का जिक्र करते हुए ट्रंप ने अपने पुराने दावे को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया था कि उन्होंने 3 करोड़ लोगों की जान बचाई। इसे खबर में ट्रंप के दावे के रूप में ही रखना उचित है। ट्रंप पहले भी भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अपनी भूमिका और इस तरह के आंकड़े का दावा कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावे को लगातार खारिज करती रही है और उसका कहना है कि दोनों देशों के बीच मुद्दे द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाए जाने चाहिए।
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